शेयर बाजार में बवंडर: सेंसेक्स 1048 अंक टूटकर बंद, निफ्टी 25500 अंक के नीचे
Stock Market Updates: शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी बिकवाली वाला माहौल था। ट्रेडिंग के अंत में सेंसेक्स 1,048.16 अंक लुढ़ककर 82,626.76 अंक पर बंद हो गया। वहीं, निफ्टी 336 अंक फिसलकर 25,471.10 अंक पर ठहरा।

कमजोर वैश्विक बाजार के माहौल के चलते शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शेयर बाजार में भूचाल आ गया। शुक्रवार को सेंसेक्स 1,048.16 अंक लुढ़ककर 82,626.76 अंक पर बंद हो गया। वहीं, निफ्टी 336 अंक फिसलकर 25,471.10 अंक पर ठहरा। इस बड़ी गिरावट की वजह से निवेशकों को 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा नुकसान हो गया।
आखिर क्यों गिर रहा है भारतीय शेयर बाजार?
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में आई भारी गिरावट के कारणों पर बात करते हुए जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी के विजयकुमार ने कहा कि बाजार अब एक उथल-पुथल भरे दौर में प्रवेश कर चुका है। यह स्थिति निवेशकों के बीच घबराहट पैदा कर सकती है, लेकिन साथ ही यह अवसर भी लेकर आती है। अमेरिकी बाजारों में एआई शेयरों में हुई बिकवाली की उम्मीद तो थी, लेकिन इसके समय और दायरे के बारे में पहले से पता नहीं चल पाया था। नैस्डैक में 2.04% की गिरावट को 'क्रैश' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, लेकिन अगर यह गिरावट जारी रहती है तो अमेरिकी बाजार और नीचे जा सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय बाजार को इस समय सबसे ज्यादा झटका आईटी शेयरों में हुई जोरदार बिकवाली से लगा है, क्योंकि यह सेक्टर इंडिया इंक का दूसरा सबसे बड़ा प्रॉफिट पूल है। 'एन्थ्रोपिक शॉक' का आईटी सेक्टर पर वास्तविक प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। ऐसे में आईटी शेयरों में घबराहट में बिकवाली करना सही रणनीति नहीं होगी। निवेशकों को सलाह है कि वे स्थिति साफ होने तक धैर्य रखें।
शेयर बाजार गिरावट के पांच बड़े कारण
सेबी रजिस्टर्ड फंडामेंटल इक्विटी एनालिस्ट अविनाश गोरक्षकर के मुताबिक, आज भारतीय बाजार में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी बाजारों में आई गिरावट है। इसके अलावा, आज जारी होने वाले अमेरिकी सीपीआई आंकड़ों से पहले बाजार में दबाव बना हुआ है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था इन दिनों गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे में भारतीय निवेशक सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्र में कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा के बाद भारतीय शेयरों में आई भावनात्मक तेजी के बाद मुनाफावसूली, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और कमजोर तिमाही नतीजों की आशंका भी आज बाजार गिरावट के प्रमुख कारण हैं।
- आईटी शेयरों में भारी बिकवाली
अविनाश गोरक्षकर ने बताया कि शुक्रवार को बाजार गिरावट की सबसे बड़ी वजह भारतीय आईटी शेयरों में लगातार जारी बिकवाली है। निफ्टी 50 इंडेक्स में करीब 10 फीसदी वेटेज रखने वाले इन शेयरों पर एआई के नए खतरे को लेकर बिकवाली का दबाव बना, जिससे प्रमुख सूचकांक नीचे खिसक गए। जियोजित इन्वेस्टमेंट के डॉ. विजयकुमार ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे एआई के डर से आईटी शेयरों में हो रही इस बिकवाली को एक अवसर के रूप में देखें। उनके अनुसार, भारतीय बाजार के लिए एआई शेयरों में यह सुधार सकारात्मक है, क्योंकि पिछले साल वैश्विक स्तर पर जो तेजी देखी गई, वह मुख्य रूप से एआई से जुड़े शेयरों में थी, जिसमें भारत पीछे रह गया था। इसलिए अगर एआई कारोबार में यह कमजोरी बनी रहती है, तो यह भारत के नजरिये से अच्छा संकेत है।
2. अमेरिकी सीपीआई डेटा का दबाव
सेबी रजिस्टर्ड बाजार विशेषज्ञ अनुज गुप्ता का कहना है कि अमेरिकी सीपीआई डेटा आज जारी होना है और बाजार को इससे किसी सकारात्मक नतीजे की उम्मीद नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था इन दिनों गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है, खासकर रूस, चीन और ब्राजील जैसे देशों की ओर से डी-डॉलराइजेशन का खतरा। यह आंकड़े भारतीय बाजार बंद होने के बाद आएंगे और उसके बाद अगले दो दिन साप्ताहिक अवकाश हैं। ऐसे में निवेशक सप्ताह के आखिरी दिन अपने पोजीशन होल्ड करके कोई जोखिम नहीं लेना चाहते।
3. भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद मुनाफावसूली
अनुज गुप्ता के मुताबिक, भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा के बाद भारतीय बाजार में जो भावनात्मक तेजी आई थी, उसके बाद मुनाफावसूली होना तय था। इसलिए आज की गिरावट का कुछ श्रेय इस डील के बाद आई इसी भावनात्मक तेजी को भी जाता है। उन्होंने कहा कि इस व्यापार समझौते को जमीनी स्तर पर लागू होने में करीब 6 से 9 महीने का समय लगेगा, इसलिए यह भावनात्मक तेजी मुनाफावसूली के एक झटके से खत्म होने की उम्मीद थी। आने वाले नतीजों का सीजन भी फिलहाल कमजोर ही रहने की संभावना है।
4. भारत-अमेरिका ट्रेड डील की असल चुनौती
अविनाश गोरक्षकर ने एक अहम पहलू की ओर ध्यान दिलाया है, जिस पर चर्चा नहीं हो रही। उनके अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद भारत का लगभग एक-तिहाई निर्यात अब सिर्फ दो देशों अमेरिका और चीन पर केंद्रित हो गया है। ऐसे में भारत सरकार के सामने इन दोनों देशों के बीच संतुलन बनाने की बड़ी व्यावहारिक चुनौती होगी, क्योंकि ये दोनों एक-दूसरे के खिलाफ ट्रेड वॉर का ऐलान कर चुके हैं।
5. रुपये में उतार-चढ़ाव से बढ़ी मुश्किल
अविनाश गोरक्षकर ने आगे बताया कि भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौतों के ऐलान के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने धीरे-धीरे भारतीय बाजार में भरोसा दिखाना शुरू किया था। गुरुवार को एफआईआई और घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) दोनों ही शुद्ध खरीदार बने थे। लेकिन शुक्रवार सुबह डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 0.10 फीसदी की गिरावट और इससे पैदा हुई अस्थिरता एफआईआई के भरोसे को तोड़ सकती है।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया:-लाइव हिन्दुस्तान में पिछले 6 साल से बिजनेस टीम का अहम हिस्सा हैं। दृगराज को पत्रकारिता में 21 वर्षों का लंबा अनुभव है। इन्होंने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी स्पेशल खबरों से खास पहचान बनाई है। शेयर मार्केट, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी पर विशेष पकड़। मैथ्स से ग्रेजुएट, मास कम्युनिकेशन और कंप्यूटर साइंस में पीजी डिप्लोमा। दृगराज, रिसर्च और एनॉलिस के जरिए मार्केट डेटा को आसान भाषा में 'कुछ अलग' पाठकों तक पहुंचाते हैं। लाइव हिन्दुस्तान से पहले साढ़े सात साल तक हिन्दुस्तान अखबार में बतौर सीनियर रिपोर्टर काम किया। इसके अलावा सहारा समय, दैनिक जागरण, न्यूज नेशन में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
और पढ़ें


