सऊदी अरब में कच्चे तेल का उत्पादन 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर, रेट पर क्या होगा असर?
मुख्य बातें
- सऊदी अरब का उत्पादन रोजाना 19 लाख बैरल गिरकर 62.38 लाख बैरल रह गया
- इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने इस साल तेल की मांग के अनुमान को घटा दिया है और चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में खपत और कम हो सकती है

कच्चे तेल को लेकर बड़ा अपडेट सऊदी अरब से आ रहा है। इस खाड़ी देश ने ओपेक को बताया है कि पिछले महीने उसके कच्चे तेल का उत्पादन फिर धड़ाम से गिर गया और 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। उसने इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच फिर भड़की दुश्मनी को बताया, जिसने सऊदी के निर्यात रास्तों पर दबाव डाला।
दूसरी ओर इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने इस साल तेल की मांग के अनुमान को घटा दिया है और चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में खपत और कम हो सकती है, क्योंकि ईरान युद्ध खिंच रहा है और ग्राहकों को कम सप्लाई के हिसाब से खुद को ढालना पड़ रहा है।
पेरिस स्थित इस एजेंसी ने इस साल ग्लोबल ऑयल डिमांड में गिरावट के अपने अनुमान को 9,40,000 बैरल प्रति दिन और बढ़ा दिया है। अब एजेंसी का अनुमान है कि मांग में 2.5 मिलियन बैरल प्रति दिन की कमी आएगी।
यह 2020 में कोविड महामारी के कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से के ठप होने के बाद से सालाना औसत के हिसाब से सबसे बड़ी गिरावट है। एजेंसी ने कहा कि सप्लाई सरप्लस की स्थिति अब 2027 तक नहीं आएगी।
सऊदी की क्या है चिंता
रियाद ने ओपेक सचिवालय को सूचना दी कि उसका उत्पादन रोजाना 19 लाख बैरल गिरकर 62.38 लाख बैरल रह गया। यह आंकड़ा ब्लूमबर्ग को मिली ओपेक की मासिक रिपोर्ट में दिया गया है। यह अप्रैल में युद्ध के दौरान पहुंचे पिछले सबसे निचले स्तर से भी कम है, जो खाड़ी युद्ध की शुरुआत के बाद सऊदी अरब का बताया गया सबसे कम आंकड़ा था।
तेल की कीमतों में लगी आग अब थोड़ी कम हुई
आज शाम साढ़े पांच बजे के करीब ब्रेंट क्रूड 3.20 डॉलर प्रति बैरल कम होकर 104.43 डॉलर पर आ गया है। जबकि, WTI की कीमत 100 डॉलर के नीचे आ गई है। ओपेक के इस प्रमुख सदस्य को कई महीनों की रिकवरी के बाद लगा है। यह झटका बताता है कि लंबा खिंचता ईरान संघर्ष मध्य पूर्व के ऊर्जा उत्पादकों पर कितना असर डाल रहा है।
इस हफ्ते ब्रेंट क्रूड वायदा एक बैरल 108 डॉलर से ऊपर पहुंच गया था। क्योंकि फारस की खाड़ी में तेल टैंकरों पर फिर हमले हुए। वहीं, ईंधन की बढ़ती कीमतें महंगाई को हवा दे रही हैं और आम उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव डाल रही हैं।
कच्चे तेल का निर्यात लगभग एक तिहाई घटा
रियाद ने उत्पादन में जो गिरावट बताई है, वह ब्लूमबर्ग के शुरुआती टैंकर-ट्रैकिंग आंकड़ों से मोटे तौर पर मेल खाती है। इन आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में सऊदी के कच्चे तेल का निर्यात लगभग एक तिहाई घटकर करीब 30 लाख बैरल प्रति दिन रह गया।
सऊदी ने ओपेक को बताया कि अगस्त में बाजार को कच्चे तेल की “सप्लाई” उत्पादन से ज्यादा थी। इसमें स्टोरेज टैंकों से तेल निकाले जाने को भी गिना जाता है। यह आपूर्ति 71.22 लाख बैरल प्रति दिन रही, जिससे लगता है कि सऊदी ने अपना कुछ भंडार खर्च कर दिया होगा।
सदस्य देशों से सीधे मिले आंकड़ों के अलावा ओपेक की मासिक रिपोर्ट में कई बाहरी कंपनियों के अनुमान भी होते हैं, जिन्हें “सेकेंडरी सोर्स” कहा जाता है। इनके औसत के मुताबिक अगस्त में सऊदी का उत्पादन पिछले महीने से बस थोड़ा ही कम था, 72.76 लाख बैरल प्रति दिन।
ओपेक की मुश्किलें
ईरान युद्ध से अपना उत्पादन कटने के अलावा ओपेक के सामने अपनी एकजुटता को लेकर कई चुनौतियां हैं। संस्थापक सदस्य वेनेजुएला गंभीरता से सोच-विचार कर रहा है कि वह समूह छोड़े या नहीं, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप काराकस को अमेरिका के प्रभाव में खींच रहे हैं। पिछले महीने हुआ एक समझौता अमेरिका को वेनेजुएला के काफी बड़े तेल भंडारों पर बहुमत नियंत्रण देता है।
युएई ओपेक को छोड़ चुका है
यह संभावित टूट ऐसे समय सामने आ रही है, जब संयुक्त अरब अमीरात कुछ महीने पहले ही ओपेक छोड़ चुका है। वह कई सालों से इस बात से खीझा हुआ था कि ओपेक उसके उत्पादन पर सीमा लगाता है। इस बीच, इराक अपनी उत्पादन क्षमता के कहीं ज्यादा आंकलन के लिए दबाव डाल रहा है। उसने पहले चेतावनी दी थी कि अगर उसे संतोषजनक स्तर नहीं मिला तो वह भी ओपेक छोड़ सकता है।


