कच्चा तेल 125 डॉलर के पार, होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकाबंदी से दाम रिकॉर्ड हाई पर

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मुख्य बातें

  • Crude Oil Price: होर्मुज स्ट्रेट में जारी नौसैनिक नाकाबंदी के चलते इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड का जून कॉन्ट्रैक्ट 125 डॉलर प्रति बैरल के पार था
  • 8 मार्च 2022 को तेल की कीमत 127.98 डॉलर प्रति बैरल थी
  • उसके बाद से यह सबसे ज्यादा कीमत है
कच्चा तेल 120 डॉलर के पार, होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकाबंदी से दाम रिकॉर्ड हाई पर

ग्लोबल ऑयल मार्केट में उथल-पुथल जारी है। अमेरिका के ईरान के खिलाफ सख्त रुख और होर्मुज स्ट्रेट में जारी नौसैनिक नाकाबंदी के चलते कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। गुरुवार को कीमतों में और इजाफा देखने को मिला, जबकि एक दिन पहले ही इनमें करीब 7 प्रतिशत की उछाल आई थी।

ब्रेंट क्रूड 125 डॉलर के पार

ब्लूमबर्ग के मुताबिक गुरुवार को ब्रेंट क्रूड (कच्चे तेल) की कीमत तेजी से बढ़कर करीब 126 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई है। बुधवार के मुकाबले यह करीब 7% बढ़कर 126.20 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। 8 मार्च 2022 को तेल की कीमत 127.98 डॉलर प्रति बैरल थी। उसके बाद से यह सबसे ज्यादा कीमत है।

ट्रंप का बयान: ‘सूअर की तरह घुट रहे हैं ईरान’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में साफ किया कि जब तक ईरान के साथ परमाणु समझौता नहीं हो जाता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी नहीं हटाई जाएगी। उन्होंने कहा, “यह नाकाबंदी बमबारी से कहीं ज्यादा कारगर है। वे (ईरान) सूअर की तरह घुट रहे हैं। उनके पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते।”

ईरान का प्रस्ताव भी खारिज

इससे पहले ईरान ने परमाणु वार्ता को टालते हुए होर्मुज को फिर से खोलने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन ट्रंप इससे खुश नहीं थे क्योंकि इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा नहीं उठाया गया था। शांति वार्ता ठप होने और नाकाबंदी जारी रहने से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चरमरा गई है। ध्यान रहे कि होर्मुज स्ट्रेट से होकर दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार की आवाजाही होती है।

भारत पर क्या असर पड़ रहा है?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 90 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में इस नाकाबंदी ने देश के लिए एलपीजी, एलएनजी और क्रूड ऑयल की सप्लाई बुरी तरह बाधित की है। महंगे कच्चे तेल का सीधा असर आम नागरिक की जेब पर भी पड़ने के आसार प्रबल होते जा रहे हैं, हालांकि पेट्रोल-डीजल के रिटेल दाम अभी स्थिर हैं।

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इक्रा की चेतावनी: इन सेक्टरों पर दबाव

रेटिंग एजेंसी इक्रा ने बुधवार को अनुमान जताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे माल की कीमतों में दबाव और सप्लाई कमी के चलते ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs, फर्टीलाइजर सेक्टर, केमिकल इंडस्ट्री, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन क्षेत्र के मुनाफे पर असर पड़ेगा।

OMCs का मुनाफा क्यों घट रहा है?

इक्रा के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ ने बताया कि क्रूड की ऊंची कीमतों के बावजूद पंप पर पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं, जिससे तेल कंपनियों की लाभप्रदता प्रभावित हुई है। हाल ही में एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद भी यह स्थिति बनी हुई है।

कंपनियों को पेट्रोल-डीजल पर कितना हो रहा नुकसान

उनके अनुसार, अगर क्रूड 120-125 डॉलर प्रति बैरल पर रहता है और लॉन्ग-टर्म औसत क्रैक स्प्रेड बना रहता है, तो पेट्रोल पर मार्केटिंग मार्जिन लगभग माइनस 14 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर माइनस 18 रुपये प्रति लीटर रहने का अनुमान है।

क्या आगे और बढ़ेंगे दाम?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी जारी रहेगी और अमेरिका-ईरान वार्ता में सफलता नहीं मिलती, तब तक तेल की कीमतों में गिरावट की संभावना कम है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है।

इनपुट: PTI

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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