कच्चे तेल की कीमतें 150-200 डॉलर के पार जाने की आशंका, 15 मिलियन बैरल की सप्लाई ठप

Mar 12, 2026 06:06 am ISTDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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खाड़ी से सबसे अधिक कच्चा तेल आयात करने वाला एशिया भी दबाव में है। चीन, भारत और अन्य एशियाई खरीददार वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में जुट गए हैं, जिससे पश्चिम अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी क्रूड की मांग और कीमतें आसमान छू रही हैं।

कच्चे तेल की कीमतें 150-200 डॉलर के पार जाने की आशंका, 15 मिलियन बैरल की सप्लाई ठप

खलीज टाइम्स की रिपोर्ट की एक रिपोर्ट डराने वाली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मचा दिया है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर यह क्षेत्रीय तनाव लंबा खिंचा और होर्मुज स्ट्रेट बंद रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।

भयानक सप्लाई संकट

खलीज टाइम्स ने एनर्जी एनालिटिक्स फर्म वुड मैकेंजी के विश्लेषण के हवाले से कहा है कि खाड़ी देश कुल मिलाकर 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन करते हैं। मौजूदा संघर्ष की वजह से अनुमानित 15 मिलियन बैरल दैनिक निर्यात ग्लोबल मार्केट से बाहर हो गया है। यह एक अभूतपूर्व सप्लाई झटका है, जिसकी भरपाई करना बेहद मुश्किल होगा।

कीमतों में उछाल और गिरावट का सिलसिला

हाल ही में सोमवार को कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था, हालांकि मंगलवार को यूएई समयानुसार शाम 4 बजे तक यह 90 डॉलर से नीचे आ गिरा और बुधवार को भी यह 87.80 डॉलर तक आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अस्थिरता बनी रहेगी और संघर्ष लंबा खिंचने पर कीमतें आसमान छू सकती हैं।

युद्ध खत्म होने के बाद भी नहीं सुधरेगी सप्लाई

वुड मैकेंजी के चेयरमैन और मुख्य विश्लेषक साइमन फ्लॉवर्स ने चेतावनी दी है कि भले ही संघर्ष समाप्त हो जाए, सप्लाई बहाल करना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर तेल के कुएं लंबे समय तक बंद रहे, तो उत्पादन दोबारा पूरी क्षमता से शुरू होने में हफ्तों या उससे भी अधिक का समय लग सकता है।

यूरोप और एशिया पर संकट का सबसे ज्यादा असर

इस सप्लाई संकट की चपेट में यूरोप सबसे गंभीर रूप से आया है। वर्ष 2025 में यूरोप की 60 प्रतिशत जेट ईंधन और 30 प्रतिशत डीजल की सप्लाई खाड़ी रिफाइनरियों से होती थी, जो अब पूरी तरह बंद हो चुकी है।

वहीं, खाड़ी से सबसे अधिक कच्चा तेल आयात करने वाला एशिया भी दबाव में है। चीन, भारत और अन्य एशियाई खरीददार वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में जुट गए हैं, जिससे पश्चिम अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी क्रूड की मांग और कीमतें आसमान छू रही हैं।

कोई विकल्प नहीं, डिमांड में ही कटौती एकमात्र हल

रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार कुछ राहत दे सकते हैं, लेकिन 15 मिलियन बैरल प्रतिदिन के इस भारी नुकसान की भरपाई करना असंभव है। अमेरिका जैसे उत्पादक देश भी उत्पादन बढ़ाकर इस कमी का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा (कुछ लाख बैरल) ही पूरा कर सकते हैं। ऐसे में वुड मैकेंज का कहना है कि बाजार को संतुलित करने का एकमात्र तरीका वैश्विक मांग में भारी गिरावट है, जिसके लिए कीमतों का 150 डॉलर प्रति बैरल तक जाना जरूरी होगा।

तो क्या भविष्य में 200 डॉलर तक जा सकता है तेल?

वुड मैकेंजी का मानना है कि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान मुद्रास्फीति-समायोजित आधार पर तेल 150 डॉलर तक गया था, लेकिन मौजूदा स्थिति उससे कहीं अधिक गंभीर है। "इस बार जोखिम वाली सप्लाई का आकार बहुत बड़ा और वास्तविक है," फ्लॉवर्स ने कहा। फर्म ने निष्कर्ष निकाला कि वर्ष 2026 तक तेल का 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचना "संभावना के दायरे से बाहर नहीं है।"

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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