100 डॉलर के नीचे आया कच्चा तेल, युद्ध खत्म करने के ट्रंप के संकेत से रेट में भारी गिरावट

Drigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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Crude Oil Price: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह संकेत देने के बाद कि ईरान में युद्ध जल्द ही समाप्त हो जाएगा, कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड 91.55 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। WTI क्रूड की कीमत में 10% तक की गिरावट आई और यह 85.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।

100 डॉलर के नीचे आया कच्चा तेल, युद्ध खत्म करने के ट्रंप के संकेत से रेट में भारी गिरावट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह संकेत देने के बाद कि ईरान में युद्ध जल्द ही समाप्त हो जाएगा, कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड 91.55 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत में 10% तक की गिरावट आई और यह 85.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।

यह गिरावट सोमवार को हुए उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र के बाद आई है, जब तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दायरा महामारी के दौरान कीमतों के नकारात्मक होने के बाद सबसे ज्यादा था। बता दें मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने ग्लोबल एनर्जी माार्केट्स को हिलाकर रख दिया है और मुद्रास्फीति संकट को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक फ्लोरिडा में एक संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने कहा कि वह तेल से संबंधित प्रतिबंधों में छूट देने और होर्मुज स्ट्रेट्स से टैंकरों को एस्कॉर्ट करने के लिए अमेरिकी नौसेना को तैनात करने की योजना बना रहे हैं।

ट्रंप ने सोमवार देर रात पत्रकारों से कहा, "हम तेल की कीमतों को कम रखना चाहते हैं।" उन्होंने कहा, "इस संकट की वजह से कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ गई थीं," साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह संघर्ष इस सप्ताह के अंत तक खत्म होगा।

तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं थीं

सोमवार को तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं, जब फारस की खाड़ी के प्रमुख उत्पादक देशों को होर्मुज के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण उत्पादन कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। यह संकरे जलमार्ग आमतौर पर वैश्विक कच्चे तेल के प्रवाह का पांचवां हिस्सा संभालता है। हालांकि, बाद में सत्र में कीमतों में गिरावट आई क्योंकि, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने आपातकालीन भंडार जारी करने के प्रयास पर विचार किया।

ट्रंप पर अतिरिक्त दबाव

यह संघर्ष अब अपने दूसरे सप्ताह में है और इसमें एक दर्जन से अधिक देश शामिल हो गए हैं, जिससे तेल, प्राकृतिक गैस और गैसोइल जैसे उत्पादों सहित ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया है। अमेरिका में खुदरा पेट्रोल की कीमतें अगस्त 2024 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे ट्रंप पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने टैंकरों को एस्कॉर्ट करने या तेल संबंधी प्रतिबंधों में छूट देने की योजना पर अतिरिक्त जानकारी नहीं दी, सिवाय इसके कि उन्होंने सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर इस विषय पर चर्चा की थी। पिछले सप्ताह, ट्रंप प्रशासन ने भारत के लिए रूसी कच्चे तेल की अपनी खरीद में अस्थायी रूप से वृद्धि करने का रास्ता साफ कर दिया, जो इस व्यापार पर महीनों से चल रहे दबाव से उलट था।

बाजार की नजरें होर्मुज पर

बाजार की नजरें होर्मुज से टैंकरों के आवागमन को फिर से शुरू होते देखने पर टिकी हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से कई जहाजों पर हमले के कारण अधिकांश जहाजों ने इस जलमार्ग से बचना शुरू कर दिया है। फिर भी, हाल के दिनों में सऊदी कच्चा तेल ले जाने वाला एक टैंकर वहां से गुजरा, जबकि ईरान ने इस मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल भेजना जारी रखा है।

होर्मुज के बंद होने के कारण

भंडारण तेजी से भर जाने के कारण सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात ने उत्पादन कम कर दिया है। मध्य पूर्व से कच्चे तेल और तेल उत्पादों के प्रवाह पर पड़े इस संकट के कारण रिफाइनरियों ने कुछ कार्यों और आपूर्ति को रोक दिया है, और एशियाई ऊर्जा खरीदारों ने मूल रूप से अन्य क्षेत्रों के लिए जाने वाले ईंधन शिपमेंट को लुभाने के लिए प्रतिस्पर्धियों से आगे बढ़कर बोली लगाई है।

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लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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