Petrol, Diesel Rates: ब्रेंट क्रूड $108 के पार, फिर दिल्ली में पेट्रोल ₹102 ही क्यों? क्या तूफान से पहले की है शांति
मुख्य बातें
- Petrol, Diesel Rates Today: एक दिन पहले ही ब्रेंट में 6 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया था
- इस तेजी के साथ कच्चा तेल इस सप्ताह जुलाई के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है
- उधर अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 103 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है

मिडिल ईस्ट में लड़ाई बढ़ने का असर एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखने लगा है। ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। ऐसे में आज भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट में राहत जरूर है, लेकिन अब बढ़ने की आशंका गहराने लगी है। पिछली बार मई में ताबड़तोड़ दाम बढ़े थे और पेट्रोल-डीजल के रेट में 7.50-7.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों HPCl, IOCL और भारत पेट्रोलियम ने राहत दी है। 11 सितंबर के रेट के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 102.12 और डीजल 95.20 रुपये लीटर है।
तेल की कीमतों में क्यों भड़की आग
यमन के हूती लड़ाकों और सऊदी अरब के समर्थन वाली सेनाओं के बीच लड़ाई तेज होने से बाजार को डर है कि आने वाले दिनों में तेल की सप्लाई में और बड़ी रुकावट आ सकती है। इसी आशंका में क्रूड के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं।
एक दिन पहले ही ब्रेंट में 6 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया था। इस तेजी के साथ कच्चा तेल इस सप्ताह जुलाई के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है। उधर अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 103 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। इस तेजी की सबसे बड़ी वजह सिर्फ लड़ाई बढ़ना नहीं है, बल्कि तेल की आवाजाही वाले अहम समुद्री रास्तों पर बढ़ता खतरा है।
ईरान समर्थित हूती लड़ाके लाल सागर के दक्षिणी हिस्से में स्थित बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के करीब आगे बढ़ रहे हैं। उनकी नजर मोखा इलाके पर कब्जे की है। यह इलाका उस समुद्री रास्ते के काफी करीब है, जहां से दुनिया का बड़ा व्यापारिक और ऊर्जा परिवहन गुजरता है।
अगर इस रास्ते पर हमले या आवाजाही में रुकावट बढ़ती है तो जहाजों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे सिर्फ तेल की सप्लाई प्रभावित नहीं होगी, बल्कि जहाजों का किराया, बीमा और परिवहन लागत भी बढ़ सकती है।
इस साल पहले ही करीब 80% चढ़ चुका है ब्रेंट
कच्चे तेल के लिए 2026 पहले ही काफी उथल-पुथल वाला साल रहा है। ब्रेंट अब तक करीब 80 फीसदी चढ़ चुका है। हालांकि अप्रैल में युद्ध के दौरान यह 126 डॉलर प्रति बैरल से थोड़ा ऊपर के मुकाबले अभी कीमत कम है। लेकिन चिंता यह है कि अगर मिडिल ईस्ट में सप्लाई बाधित होती है और चीन की तेल मांग भी बढ़ती है, तो कीमतें फिर से अपने पुराने ऊंचे स्तरों की तरफ जा सकती हैं।
आगे क्या होगा
RBC Capital Markets के विश्लेषकों का कहना है कि अगर सऊदी अरब और हूतियों के बीच फिर से बड़े पैमाने पर युद्ध शुरू होता है तो यह कच्चे तेल की कीमतों में और तेज उछाल का कारण बन सकता है। यानी बाजार फिलहाल सिर्फ आज की सप्लाई नहीं देख रहा। निवेशक यह देख रहे हैं कि अगर लड़ाई लंबी चली तो अगले कुछ महीनों में तेल की सप्लाई कितनी प्रभावित हो सकती है।
इनपुट: ब्लूमबर्ग


