5 महीने की सबसे बड़ी खुशखबरी! भारत की अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, 5% पर पहुंची कोर सेक्टर ग्रोथ
मुख्य बातें
- जून 2026 में भारत की कोर सेक्टर ग्रोथ 5% पर पहुंच गई, जो पिछले 5 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है
- इस तेजी में लौह अयस्क, बिजली, सीमेंट, स्टील और कोयला सेक्टर का बड़ा योगदान रहा
- हालांकि, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और रिफाइनरी उत्पादों में गिरावट जारी रही

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जून का महीना राहत भरी खबर लेकर आया है। देश के 8 प्रमुख उद्योगों (अब संशोधित इंडेक्स में 9 उद्योग) की विकास दर यानी कोर सेक्टर ग्रोथ जून 2026 में बढ़कर 5% पर पहुंच गई, जो पिछले 5 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। मई में यह वृद्धि दर 3.2% थी। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा योगदान लौह अयस्क, बिजली उत्पादन और सीमेंट सेक्टर का रहा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि देश में औद्योगिक गतिविधियां फिर से रफ्तार पकड़ रही हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर व मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश का असर अब साफ दिखाई देने लगा है।
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कोर सेक्टर की कुल वृद्धि 3.6% रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह केवल 1% थी, यानी इस बार औद्योगिक विकास की रफ्तार पहले के मुकाबले काफी बेहतर रही है। एक्सपर्ट का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में यही गति बनी रहती है, तो इसका सकारात्मक असर इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन, जीडीपी ग्रोथ और रोजगार पर भी देखने को मिल सकता है।
लौह अयस्क उत्पादन में तेजी
इस बार सबसे ज्यादा चर्चा लौह अयस्क उत्पादन की रही। सरकार ने कोर इंडस्ट्री इंडेक्स के नए बेस ईयर (2022-23) के तहत पहली बार आयरन ओर को इसमें शामिल किया है। जून में लौह अयस्क का उत्पादन 43.9% की शानदार दर से बढ़ा, जबकि मई में इसमें 19% की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इससे साफ है कि स्टील, निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है।
बिजली उत्पादन में भी बढ़ोतरी
बिजली उत्पादन भी मजबूत बना हुआ है। जून में बिजली उत्पादन 9.8% बढ़ा। हालांकि, मई में यह वृद्धि 11.2% थी, लेकिन भीषण गर्मी और बिजली की बढ़ती मांग के कारण उत्पादन लगातार ऊंचे स्तर पर बना रहा। वहीं, सीमेंट उत्पादन भी 9.8% बढ़ा, जो इस बात का संकेत है कि देशभर में निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। स्टील उत्पादन में भी 4.6% की वृद्धि दर्ज की गई, हालांकि यह मई के 5.1% के मुकाबले थोड़ी कम रही।
एक और राहत की बात यह रही कि कोयला उत्पादन मई में 9.5% की गिरावट के बाद जून में फिर से 1.4% की बढ़त के साथ सकारात्मक सेक्टर में लौट आया। इससे बिजली उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों को भी सहारा मिला।
हालांकि, सभी सेक्टरों का प्रदर्शन समान नहीं रहा। रिफाइनरी उत्पादों का उत्पादन 4.7% घट गया। हालांकि, मई की तुलना में गिरावट थोड़ी कम रही। वहीं, कच्चे तेल (Crude Oil) का उत्पादन लगातार तीसरे महीने घटकर 4.2% नीचे आ गया। प्राकृतिक गैस उत्पादन में भी 7.4% की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले एक साल से ज्यादा समय की सबसे कमजोर स्थिति मानी जा रही है। इसके अलावा उर्वरक (Fertiliser) उत्पादन भी 3.3% घटा और इसमें मार्च से जारी कमजोरी बनी हुई है।
इस बार सरकार ने कोर इंडस्ट्री इंडेक्स का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। संशोधित इंडेक्स में अब लौह अयस्क को पहली बार शामिल किया गया है। साथ ही स्टील और कोयले के आंकड़ों की गणना का तरीका भी बदला गया है, ताकि वास्तविक उत्पादन की तस्वीर ज्यादा सटीक तरीके से सामने आ सके।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बिजली, सीमेंट, स्टील, कोयला और आयरन ओर जैसे क्षेत्रों में आई मजबूती इस बात का संकेत है कि भारत में निवेश आधारित विकास (Investment-led Growth) अभी भी मजबूत बना हुआ है। हालांकि, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और रिफाइनरी सेक्टर की कमजोरी चिंता का विषय बनी हुई है। अगर आने वाले महीनों में ऊर्जा क्षेत्र में भी सुधार देखने को मिलता है, तो देश की औद्योगिक विकास दर और मजबूत हो सकती है। फिलहाल, जून के आंकड़ों ने यह संकेत जरूर दिया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे और मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
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उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
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