CNG और रसोई गैस के फिर से बढ़ेंगे दाम… ईरान-अमेरिका टकराव से बिगड़े हालात
मुख्य बातें
- अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तीन पोतों पर हमले किए हैं
- होर्मुज जलडमरूमध्य के रूट से दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी की सप्लाई होती है

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है। दरअसल, अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तीन पोतों पर हमले किए हैं। इन हमलों ने दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। इसी दौरान भारत आ रहे कतर के एक एलएनजी (LNG) टैंकर पर भी ड्रोन हमले की खबर सामने आई है। ऐसे में अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या आने वाले दिनों में भारत में एलपीजी, CNG, PNG समेत अन्य तरह की गैस महंगी हो सकती है। आइए डिटेल जान लेते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य के मायने?
दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य के रूट से दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी की सप्लाई होती है। भारत अपनी प्राकृतिक गैस की लगभग आधी जरूरत आयातित एलएनजी से पूरी करता है और इसमें कतर सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। कतर से आने वाली ज्यादातर एलएनजी इसी रास्ते से होकर गुजरात के दहेज जैसे टर्मिनलों तक पहुंचती है। ताजा घटनाक्रम में कम से कम चार तेल और गैस टैंकर वापस लौट चुके हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड 6 प्रतिशत तक बढ़कर लगभग 78 डॉलर प्रति बैरल हो गया जबकि अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट में भी भारी उछाल आया क्योंकि व्यापारियों ने लंबे समय तक आपूर्ति में रुकावट की संभावना को ध्यान में रखा।
निवेशकों को डर है कि शिपिंग पर नए हमलों से होर्मुज के रास्ते ऊर्जा का प्रवाह धीमा हो सकता है, भले ही जलडमरूमध्य तकनीकी रूप से खुला रहे। जानकारों के मुताबिक ईरान संकेत दे रहा है कि वह खाड़ी देशों के प्रस्तावित वैकल्पिक शिपिंग कॉरिडोर का विरोध करेगा और उन जहाजों को निशाना बनाना जारी रख सकता है जो उसके पसंदीदा तरीकों को छोड़कर दूसरे रास्ते अपनाते हैं।
क्या भारतीय ग्राहकों पर पड़ेगा असर?
पेट्रोल और डीजल के उलट CNG और PNG की कीमतें न सिर्फ घरेलू गैस उत्पादन से बल्कि आयातित LNG की लागत से भी प्रभावित होती हैं। अगर ज्यदा फ्रेट रेट, इंश्योरेंस कॉस्ट या सप्लाई की कमी के कारण LNG कार्गो महंगे हो जाते हैं तो शहर में गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स को आखिरकार ज्यादा खरीद लागत का सामना करना पड़ सकता है।
इसका असर गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली CNG, घरों में सप्लाई होने वाली PNG और इंडस्ट्रीज, कमर्शियल यूजर्स को सप्लाई होने वाली गैस पर पड़ सकता है। स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका ने ईरान को दी गई तेल निर्यात संबंधी अस्थायी छूट भी वापस ले ली है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।
लेखक के बारे में
Deepak Kumarहिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।
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