PF जमा नहीं करने वाली कंपनियों की कड़ी निगरानी होगी, UP समेत इन राज्यों में शुरुआत
EPO Updates: अभी तक कई बार ऐसा होता है कि कुछ संस्थान कर्मचारियों के वेतन से पीएफ काट लेते थे, लेकिन उसे समय पर जमा नहीं करते थे या पूरी जानकारी नहीं देते थे। अब ईपीएफओ अपना डाटाबेस सरकारी खरीद पोर्टल (जेम), जीएसटी विभाग और विभिन्न राज्य सरकारों के साथ जोड़ रहा है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपनी निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए अलग-अलग सरकारी विभागों के डाटा को आपस में जोड़ने जा रहा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियां अपने कर्मचारियों की भविष्य निधि (PF) राशि सही समय पर और सही रकम में जमा करें। इस पहल का सीधा उद्देश्य रोजगार से जुड़ी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन है।
दरअसल, अभी तक कई बार ऐसा होता है कि कुछ संस्थान कर्मचारियों के वेतन से पीएफ काट लेते थे, लेकिन उसे समय पर जमा नहीं करते थे या पूरी जानकारी नहीं देते थे। अब ईपीएफओ अपना डाटाबेस सरकारी खरीद पोर्टल (जेम), जीएसटी विभाग और विभिन्न राज्य सरकारों के साथ जोड़ रहा है।
जेम वह मंच है, जहां केंद्र और राज्य सरकारों के विभाग तथा सार्वजनिक उपक्रम सामान और सेवाएं खरीदते हैं। जेम पर पंजीकृत सेवा प्रदाताओं को अपने कर्मचारियों के पीएफ अंशदान का नियमित भुगतान करना होता है। नई व्यवस्था में यह आसानी से पता चल सकेगा कि कौन-कौन से प्रतिष्ठान पंजीकृत हैं और कंपनियां कर्मचारियों का पीएफ समय पर जमा कर रही हैं या नहीं। इसका मासिक सत्यापन किया जाएगा।
यूपी समेत इन राज्यों में शुरुआत
ईपीएफओ का सैलरी से रिलेटेड डेटा पहले से ही उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकारों के साथ साझा किया जा रहा है। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के साथ यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जबकि अन्य राज्यों के साथ बातचीत जारी है। इसके अलावा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय और कर्मचारी राज्य बीमा निगम के साथ भी डाटा का आदान-प्रदान किया जा रहा है। इससे संस्थानों की सही पहचान और कर्मचारियों के पंजीकरण की जांच आसान होगी।
रोजगार से जुड़ी योजनाओं में मददगार
जीएसटी विभाग से भी प्रतिष्ठानों के पंजीकरण संबंधी डाटा साझा करने पर सहमति बन चुकी है। इससे यह जांच आसान होगी कि किसी कंपनी का कारोबार और कर्मचारियों की संख्या क्या है और क्या उसके सभी कर्मचारियों को पीएफ के दायरे में लाया गया है। यह कदम विशेष रूप से प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के प्रभावी संचालन में मददगार माना जा रहा है, जिसके तहत रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। योजना का लाभ लेने के लिए संस्थानों को अपना जीएसटी पंजीकरण नंबर देना अनिवार्य है।
कर्मचारियों को ऐसे फायदा
- कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति बचत अधिक सुरक्षित होगी।
- पीएफ जमा न करने वाले संस्थानों पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।
- रोजगार योजनाओं का लाभ वास्तविक कर्मचारियों तक पहुंचेगा।
- फर्जी पंजीकरण और गलत दावों पर रोक लगेगी।
- पारदर्शिता बढ़ेगी और कर्मचारियों को अपने खाते की स्थिति स्पष्ट रूप से देखने का लाभ मिलेगा।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


