
साल के पहले IPO का इंतजार खत्म, ₹23 प्राइस बैंड, इस सरकारी कंपनी को बड़ा फायदा
कोल इंडिया की सहायक कंपनी BCCL आईपीओ की बात करें तो यह 1071 करोड़ रुपये का है। इसके लिए 21 रुपये से लेकर 23 रुपये तक का प्राइस बैंड तय किया गया है। ग्रे मार्केट में भी इस आईपीओ को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
BCCL IPO: आईपीओ मार्केट में एक और सरकारी कंपनी की एंट्री हो रही है। इस कंपनी का नाम- भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) है। कोल इंडिया की सहायक कंपनी BCCL का यह पब्लिक इश्यू न केवल निवेशकों के लिए बल्कि इसकी मूल कंपनी कोल इंडिया के लिए भी बड़ा फायदे का सौदा साबित हो सकता है। इस आईपीओ के जरिए कोल इंडिया को करीब 605 करोड़ रुपये का विंडफॉल गेन मिलने का अनुमान है, जो उसके निवेश पर लगभग 130 प्रतिशत का रिटर्न दिखाता है।
आईपीओ के बारे में
BCCL आईपीओ की बात करें तो यह 1071 करोड़ रुपये का है। इसके लिए 21 रुपये से लेकर 23 रुपये तक का प्राइस बैंड तय किया गया है। ग्रे मार्केट में भी इस आईपीओ को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। BCCL आईपीओ का मौजूदा ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) 13.5 रुपये बताया जा रहा है, यानी शेयर इश्यू प्राइस से करीब 58.70 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर कंपनी का कुल मूल्यांकन 10,700 करोड़ रुपये आंका गया है। बता दें कि BCCL का आईपीओ नौ जनवरी को खुलेगा जो वर्ष 2026 का पहला आईपीओ भी होगा। यह इश्यू 13 जनवरी को बंद होगा जबकि एंजेल यानी बड़े निवेशक आठ जनवरी को बोली लगाएंगे। आईपीओ के मसौदा प्रस्ताव के मुताबिक, इस इश्यू में कोल इंडिया की तरफ से 46.57 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री पेशकश की जाएगी। इसमें नए शेयरों की पेशकश नहीं की गई है। बता दें कि BCCL के शेयरों को 16 जनवरी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया जाएगा।
कोल इंडिया बेच रही कितनी हिस्सेदारी
कोल इंडिया इस इश्यू के जरिए BCCL में अपनी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी यानी 46.57 करोड़ शेयर बाजार में उतार रही है। BCCL में कोल इंडिया की प्रति शेयर औसत अधिग्रहण लागत (WACA) सिर्फ 10 रुपये है। वहीं, आईपीओ का प्राइस बैंड 21 से 23 रुपये तय किया गया है। ऐसे में ऊपरी स्तर 23 रुपये पर कोल इंडिया को प्रति शेयर 13 रुपये का मुनाफा होगा, जो कुल मिलाकर 130 प्रतिशत के मल्टीबैगर रिटर्न में तब्दील हो जाता है। रकम में यह ₹605 करोड़ हो जाता है। इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स, 35 प्रतिशत रिटेल निवेशकों और 15 प्रतिशत नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के लिए आरक्षित है।





