Hindi Newsबिज़नेस न्यूज़China focused relentlessly on execution Harsh Goenka on why Beijing pulled ahead of India
1990 में भारत-चीन बराबर थे, अब चीन की GDP 5 गुना बड़ी, हर्ष गोयंका ने बताए कारण

1990 में भारत-चीन बराबर थे, अब चीन की GDP 5 गुना बड़ी, हर्ष गोयंका ने बताए कारण

संक्षेप:

आज चीन की अर्थव्यवस्था भारत से करीब पांच गुना बड़ी हो चुकी है। आरपीजी ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयंका ने कहा कि इस अंतर की सबसे बड़ी वजह चीन का नीतियों को अमल में लाने का अनुशासन और निरंतरता है।

Sun, 26 Oct 2025 07:09 PMVarsha Pathak लाइव हिन्दुस्तान
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आरपीजी ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयंका ने भारत और चीन की आर्थिक यात्रा की तुलना करते हुए कहा है कि दोनों देशों ने 1990 में लगभग एक जैसी स्थिति से शुरुआत की थी, लेकिन आज चीन की अर्थव्यवस्था भारत से करीब पांच गुना बड़ी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस अंतर की सबसे बड़ी वजह चीन का नीतियों को अमल में लाने का अनुशासन और निरंतरता है।

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा पोस्ट

गोयंका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक डिटेल पोस्ट में लिखा, “1990 में भारत और चीन लगभग एक ही स्तर पर थे। तीन दशक बाद चीन का GDP भारत से करीब 5 गुना है। आखिर इस अंतर की वजह क्या है?” उन्होंने अपनी पोस्ट में “China vs India” शीर्षक से एक थ्रेड साझा किया, जिसमें दोनों देशों की विकास यात्रा के बीच के मुख्य अंतर बताए।

चीन ने अमल पर दिया जोर

गोयंका के मुताबिक, चीन ने अपनी विकास रणनीति में अमल (execution) को सबसे ऊपर रखा। उन्होंने लिखा, “चीन ने लगातार अमल पर ध्यान दिया। भारी निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग में किया, कृषि और श्रम क्षेत्र में शुरुआती सुधार लाए, राज्य-समन्वित (state-coordinated) निर्यात-आधारित उद्योग बनाए और बड़े पैमाने पर विकास के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया।” उन्होंने कहा कि चीन का विकास मॉडल सरकार की सक्रिय भागीदारी और नीति-निर्धारण में अनुशासन पर आधारित रहा, जिसने देश को तेज रफ्तार से आगे बढ़ने में मदद की।

भारत का रास्ता लोकतांत्रिक लेकिन धीमा

इसके मुकाबले गोयंका ने भारत की यात्रा को धीमी लेकिन लोकतांत्रिक बताया। उन्होंने लिखा, “भारत का रास्ता धीमा लेकिन लोकतांत्रिक रहा। यहां सुधार आम सहमति के माध्यम से हुए। भारत की ताकत सेवाक्षेत्र, उद्यमिता और उपभोग पर आधारित रही, जबकि मैन्युफैक्चरिंग में हम पीछे रह गए।” उन्होंने कहा कि भारत का मॉडल स्थिरता, समावेशन और लचीलापन प्रदान करता है, लेकिन रोजगार, कौशल और मैन्युफैक्चरिंग उत्पादकता के क्षेत्र में और ध्यान देने की आवश्यकता है।

“दोनों देशों के मॉडल की अपनी ताकतें और चुनौतियां”

गोयंका ने कहा कि चीन का मॉडल गति और पैमाने पर आधारित रहा, लेकिन इसके साथ बढ़ता कर्ज, जनसंख्या वृद्धावस्था और केंद्रीकृत जोखिम जैसी चुनौतियां भी आईं। वहीं भारत का लोकतांत्रिक मॉडल अधिक स्थिर और समावेशी है, जो दीर्घकाल में स्थायित्व प्रदान करता है। गोयंका ने कहा, “चीन ने दिखाया कि अनुशासन और दिशा से क्या हासिल किया जा सकता है, अब भारत को दिखाना होगा कि लोकतंत्र और विविधता से क्या संभव है।”

आर्थिक तुलना: भारत बनाम चीन

-1990 में भारत की प्रति व्यक्ति आय लगभग $367 और चीन की 317 डॉलर थी। दोनों देश उस समय मुख्यतः कृषि आधारित और निम्न-आय अर्थव्यवस्थाएं थे। चीन ने 1970 के दशक के अंत में देंग शियाओपिंग के नेतृत्व में बाजार सुधार शुरू किए और निर्यात आधारित औद्योगिकीकरण को बढ़ावा दिया। तीन दशकों तक चीन की औसत GDP वृद्धि दर 9-10% रही, जबकि भारत की वृद्धि दर 5-6% के बीच रही।

आज की स्थिति

चीन का GDP अब 19-19.5 ट्रिलियन डॉलर के बीच है, जबकि भारत की अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन के करीब है। चीन की प्रति व्यक्ति आय भारत से लगभग 4.8 गुना अधिक है।

Varsha Pathak

लेखक के बारे में

Varsha Pathak
वर्षा पाठक बतौर डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर करीब 2 साल से हिन्दुस्तान डिजिटल से जुड़ी हुई हैं। मूल रूप से मधुबनी (बिहार) की रहने वाली वर्षा लाइव हिन्दुस्तान में बिजनेस सेक्शन के लिए खबरें लिखती हैं। उन्हें बिजनेस सेक्शन के अलग-अलग जॉनर की खबरों की समझ है। इसमें स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, यूटिलिटी आदि शामिल हैं। करीब 7 साल से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय वर्षा ने यहां से पहले दैनिक भास्कर और नेटवर्क 18 में बतौर कंटेंट राइटर काम किया है। उन्हें रिपोर्टिंग का भी अनुभव है। करियर की छोटी अवधि में ही वर्षा के काम की ना सिर्फ सराहना हुई है बल्कि सम्मानित भी किया गया है। वर्षा ने जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में डिप्लोमा की डिग्री ली। और पढ़ें
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