सरकारी कर्मचारियों के लिए नया मेडिकल नियम, मां-बाप या सास-ससुर? बाद में नहीं बदल पाएंगे फैसला
केंद्र सरकार ने CGHS और CS(MA) नियम के तहत सरकारी कर्मचारियों के लिए मेडिकल बेनिफिट्स से जुड़े नियम स्पष्ट कर दिए हैं। अब कर्मचारी अपने माता-पिता या सास-ससुर में से किसी एक पक्ष को ही डिपेंडेंट चुन सकेंगे और यह विकल्प सिर्फ एक बार मिलेगा। बाद में इसे बदला नहीं जा सकेगा।

केंद्र सरकार ने अपने लाखों कर्मचारियों को चिकित्सा सुविधाओं के मामले में एक बड़ी स्पष्टता दी है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी एक नए कार्यालय ज्ञापन (OM) के अनुसार, अब सरकारी कर्मचारी चिकित्सा सुविधाओं (CGHS और CS (MA) नियम) के लिए अपने माता-पिता (Parents) या सास-ससुर (Parents-in-law) में से किसी एक को डिपेंडेंट (आश्रित) के रूप में चुन सकते हैं। यह फैसला कर्मचारियों को अपने परिवार की स्वास्थ्य देखभाल की योजना बनाने में प्रदान करेगा। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
माता-पिता या सास-ससुर: चुनाव केवल एक बार
इस नियम का पेंच थोड़ा अलग है। सरकार ने साफ किया है कि एक पुरुष कर्मचारी को यह विकल्प केवल एक बार चुनने का मौका मिलेगा। अगर किसी कर्मचारी ने एक बार अपने माता-पिता को CGHS (Central Government Health Scheme) सुविधा के लिए चुन लिया, तो वह भविष्य में इसे बदलकर सास-ससुर के नाम नहीं कर पाएगा।
कोई बदलाव नहीं
यह नियम तब भी लागू रहेगा, अगर माता-पिता का देहांत हो जाता है, यानी माता-पिता के निधन के बाद भी कर्मचारी अपने सास-ससुर को आश्रित के रूप में नहीं जोड़ सकेगा। अगर कर्मचारी ने शुरुआत में सास-ससुर को चुना हो, तो वह बाद में माता-पिता को शामिल नहीं कर पाएगा, मतलब कि यह नियम तब भी लागू होगा।
कौन हो सकता है 'डिपेंडेंट'?
CGHS नियमों के तहत 'परिवार' और 'आश्रित' की परिभाषा काफी विस्तृत है। इसमें पति/पत्नी के अलावा निम्नलिखित सदस्य शामिल हो सकते हैं।
बच्चे:- बेटा 25 वर्ष की आयु तक या शादी होने तक (जो भी पहले हो)। बेटी शादी होने तक।
अन्य:- आश्रित बहनें, विधवा बहनें, विधवा बेटियां, नाबालिग भाई और तलाकशुदा/अलग रहने वाली बेटियां (उनके नाबालिग बच्चों सहित)।
शर्त क्या है?
इन सभी का कर्मचारी के साथ रहना और उन पर पूरी तरह आर्थिक रूप से आश्रित होना अनिवार्य है।
7वें वेतन आयोग के अनुसार CGHS शुल्क
कर्मचारियों के वेतन स्तर (Pay Level) के आधार पर उनके वेतन से हर महीने CGHS (Central Government Health Scheme) का अंशदान काटा जाता है।
- लेवल 1 से 5:- 250 प्रति माह
- लेवल 6:- 450 प्रति माह
- लेवल 7 से 11:- 650 प्रति माह
- लेवल 12 और उससे ऊपर:- 1,000 प्रति माह
पेंशनभोगियों के लिए विकल्प
जो पेंशनभोगी CGHS (Central Government Health Scheme) कवर वाले क्षेत्रों में रहते हैं, वे OPD और IPD दोनों सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। वहीं, जो लोग नॉन-CGHS क्षेत्रों में रहते हैं, उनके पास दो विकल्प हैं, या तो वे हर महीने निश्चित चिकित्सा भत्ता (Fixed Medical Allowance - FMA) लें, या फिर वे नजदीकी CGHS शहर में पंजीकरण कराकर चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठाएं।
सरकार का यह स्पष्टीकरण उन कर्मचारियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो अपने सास-ससुर की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। हालांकि, चुनाव करते समय सावधानी बरतनी जरूरी है, क्योंकि यह 'वन-टाइम ऑप्शन' है और इसे बाद में बदला नहीं जा सकेगा।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
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ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
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उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
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