
इस बैंक में सरकार बेच रही 3% हिस्सेदारी, अब ₹36 वाले शेयर पर रहेगी नजर
बैंक ने कहा कि सरकार मूल पेशकश के तहत दो प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर 38.51 करोड़ शेयर बेचेगी। इसके अलावा ग्रीन शू विकल्प यानी अतिरिक्त बोली आने पर उसे रखने के तहत अतिरिक्त एक प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर 19.25 करोड़ शेयर भी बेचने का विकल्प रखा गया है।
Indian Overseas Bank share: शेयर बाजार के निवेशकों की नजर बुधवार को सार्वजनिक क्षेत्र के इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) पर होगी। दरअसल, केंद्र सरकार ने बैंक में तीन प्रतिशत तक हिस्सेदारी का विनिवेश बिक्री पेशकश (ओएफएस) के जरिये करने का फैसला किया है। बुधवार से शुरू होने वाली इस हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को मौजूदा बाजार भाव पर करीब 2,100 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। बता दें कि मंगलवार को बीएसई पर आईओबी का शेयर 1.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ 36.57 रुपये पर बंद हुआ।
क्या कहा बैंक ने?
आईओबी ने मंगलवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि सरकार मूल पेशकश के तहत दो प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर 38.51 करोड़ शेयर बेचेगी। इसके अलावा 'ग्रीन शू' विकल्प यानी अतिरिक्त बोली आने पर उसे रखने के तहत अतिरिक्त एक प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर 19.25 करोड़ शेयर भी बेचने का विकल्प रखा गया है। कुल मिलाकर यह बैंक की चुकता इक्विटी पूंजी का तीन प्रतिशत है। निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव अरुणिश चावला ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा- आईओबी का ऑफर फॉर सेल बुधवार को गैर-खुदरा निवेशकों के लिए खुलेगा जबकि खुदरा निवेशक बृहस्पतिवार को बोली लगा सकेंगे।
कर्मचारियों के लिए कितना आरक्षित?
बैंक ने यह भी बताया कि ओएफएस के तहत 1.5 लाख शेयर (करीब 0.001 प्रतिशत हिस्सेदारी) पात्र कर्मचारियों के लिए आरक्षित किए जा सकते हैं। पात्र कर्मचारी सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी होने पर अधिकतम पांच लाख रुपये तक के शेयरों के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह विनिवेश न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी नियमों के अनुरूप है, जिसके तहत सूचीबद्ध कंपनियों में कम-से-कम 25 प्रतिशत हिस्सेदारी आम जनता के पास होना अनिवार्य है। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों को इस नियम पर खरा उतरने के लिए अगस्त, 2026 तक की छूट दी है। आईओबी के अलावा पंजाब एंड सिंध बैंक, यूको बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में भी सरकार की हिस्सेदारी तय सीमा से अधिक है।





