डीजल पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, ₹36 तक बढ़ा दिए गए ये चार्ज
केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने हाई-स्पीड डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹24 प्रति लीटर और इंफ्रा सेस ₹36 प्रति लीटर बढ़ाए हैं। आइए जान लेते हैं कि सरकार ने यह फैसला क्यों लिया है।

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग की वजह से भारत समेत दुनियाभर में फ्यूल संकट है। इस माहौल से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने हाई-स्पीड डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी ₹24 प्रति लीटर और इंफ्रा सेस ₹36 प्रति लीटर बढ़ाए हैं। वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि शुल्क में यह बढ़ोतरी तत्काल प्रभाव से लागू होगी। बता दें कि इससे पहले 26 मार्च को सरकार ने डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाया था।
क्या कहा सरकार ने?
सरकार ने शनिवार को घोषणा की कि उसने डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दी है। वहीं, हाई-स्पीड डीजल पर एडिशनल एक्साइज ड्यूटी और सेस भी बढ़ा दिए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत, हाई-स्पीड डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर 24 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस अब 36 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इस बीच, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी ड्यूटी 29.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। वहीं, पेट्रोल की बात करें तो इ पर एक्सपोर्ट ड्यूटी अभी भी शून्य बनी हुई है।
क्या है फैसले की वजह?
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ये शुल्क लगाए गए थे। इन शुल्कों का उद्देश्य निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के अंतर का अनुचित लाभ उठाने से रोकना है, क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है।
बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य हमले शुरू करने के बाद तेहरान की ओर से व्यापक जवाबी कार्रवाई की गई थी। हालांकि, आठ अप्रैल को ईरान, अमेरिका और इजरायल दो सप्ताह के संघर्ष विराम पर सहमत हुए, जिससे पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक ऊर्जा बाजार में पैदा हुआ व्यवधान फिलहाल थमा है।
हाल ही में ऐसी खबरें आई थीं कि सरकार भारत ने घरेलू ईंधन बिक्री में नुकसान की भरपाई के लिए रिफाइनरी मार्जिन पर सीमा तय की है। अब रिफाइनरी के मार्जिन को 15 डॉलर प्रति बैरल तक सीमित कर दिया गया है। इस सीमा से ऊपर की किसी भी कमाई को सरकारी विपणन कंपनियों को बेचे गए ईंधन पर छूट के रूप में माना जाएगा। अतिरिक्त लाभ को खुदरा नुकसान की भरपाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
लेखक के बारे में
Deepak Kumarहिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।
और पढ़ें

