टेंडर में अडानी समूह पर नियम तोड़ने के लगे थे आरोप, अब CCI ने सुना दिया फैसला

Deepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
share

गौतम अडानी समूह से जुड़ी एक अहम खबर है। दरअसल, सीसीआई ने अपने आदेश में कहा कि देश का बिजली उत्पादन बाजार कई बड़ी सार्वजनिक एवं निजी कंपनियों से मिलकर बना है और अडानी समूह प्रथम दृष्टया इस बाजार में प्रभुत्वशाली नहीं लगता है।

टेंडर में अडानी समूह पर नियम तोड़ने के लगे थे आरोप, अब CCI ने सुना दिया फैसला

गौतम अडानी समूह के लिए एक अहम खबर है। दरअसल, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने गुरुवार को अडानी समूह की कंपनियों, एज्योर पावर और अन्य के खिलाफ एक सोलर एनर्जी टेंडर में कथित तौर पर प्रतिस्पर्धा-रोधी आचरण से जुड़ी शिकायत खारिज कर दी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, अडानी ग्रीन एनर्जी फोर लिमिटेड, गौतम अडानी, सागर अडानी, एज्योर पावर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) एवं कई अन्य इकाइयों ने प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन किया है। सीसीआई ने अपने आदेश में कहा कि देश का बिजली उत्पादन बाजार कई बड़ी सार्वजनिक एवं निजी कंपनियों से मिलकर बना है और अडानी समूह प्रथम दृष्टया इस बाजार में प्रभुत्वशाली नहीं लगता है।

क्या कहा सीसीआई ने?

सीसीआई ने आदेश में कहा- भारत के बिजली उत्पादन बाजार में एनटीपीसी, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन, टाटा पावर, टोरेंट पावर और रिलायंस पावर जैसी कई महत्वपूर्ण कंपनियां मौजूद हैं। ऐसे में प्रथम दृष्टया यह नहीं लगता है कि अडानी समूह इस बाजार में प्रभुत्वशाली स्थिति में है।

प्रतिस्पर्धा आयोग ने कहा कि क्रॉस-सब्सिडी, प्रतिस्पर्धा को बाहर करने और बाजार में प्रवेश बाधाओं से जुड़े आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत नहीं दिए गए। शिकायत में 'ग्रीन शू ऑप्शन' (निविदा में तय मात्रा से अतिरिक्त क्षमता जोड़ने का विकल्प), शुल्क दरों में संशोधन और अन्य शर्तों को छोटी कंपनियों को बाहर करने वाला तरीका बताया गया था।

नहीं मिले ठोस सबूत

इसके साथ ही सीसीआई ने कहा कि सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देकर सेकी को बिजली बिक्री समझौते करने में सक्षम बनाने और फिर अडानी ग्रीन एनर्जी फोर को सेकी के साथ बिजली खरीद समझौते करने की अनुमति मिलने जैसे आरोप भी प्रतिस्पर्धा कानून की धारा 4 के तहत स्थिति के गलत इस्तेमाल की श्रेणी में नहीं आते हैं। विशिष्ट शर्तों से जुड़े आरोपों पर आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं दे सका कि टेंडर दस्तावेज इस तरह तैयार किए गए थे जिससे केवल बड़ी कंपनियों को ही फायदा मिले।

आदेश के मुताबिक, किसी भी टेंडर का स्ट्रक्चर खरीदार की जरूरतों के हिसाब से बनाया जाता है। इसी आधार पर आयोग ने कहा कि प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा तीन (प्रतिस्पर्धा-रोधी समझौते) और धारा चार के उल्लंघन का कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता, इसलिए इसकी जांच करने की जरूरत नहीं है। सीसीआई ने कहा कि इस मामले को प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 26(2) के तहत तुरंत प्रभाव से बंद किया जाता है।

Deepak Kumar

लेखक के बारे में

Deepak Kumar

हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

और पढ़ें
जानें Hindi News, Business News, Budget 2026, बजट 2026 Live, Income Tax Live Updates की लेटेस्ट खबरें, शेयर बाजार का लेखा-जोखा, Share Market के लेटेस्ट अपडेट्स Investment Tips के बारे में सबकुछ।,