क्या आप ITR फाइलिंग के समय बदल सकते हैं टैक्स रिजीम? ये है पूरा गाइड हिन्दी में
मुख्य बातें
- ITR Filing 2025: भारत में करोड़ों टैक्सपेयर्स के लिए आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख 15 सितंबर नजदीक आ रही है
- ऐसे में सैलरी पाने वाले ज्यादातर लोगों के मन में एक सवाल आम है कि क्या वे आईटीआर फाइल करते समय पुराने और नए टैक्स रिजीम के बीच स्विच कर सकते हैं?

भारत में करोड़ों टैक्सपेयर्स के लिए आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख 15 सितंबर नजदीक आ रही है। ऐसे में सैलरी पाने वाले ज्यादातर लोगों के मन में एक सवाल आम है कि क्या वे आईटीआर फाइल करते समय पुराने और नए टैक्स रिजीम के बीच स्विच कर सकते हैं?
वित्तीय वर्ष के दौरान, कर्मचारी एक रिजीम चुनकर उसकी घोषणा अपने एंप्लाॅयर को दे देते हैं ताकि TDS की कटौती सही हो, लेकिन आखिर में जब ITR फाइल करने का समय आता है, तो कई लोगों को लगता है कि दूसरा टैक्स रिजीम उनकी आमदनी और निवेश के हिसाब से ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
पुराने और नए टैक्स रिजीम में अंतर
पुराने टैक्स रिजीम में टैक्सपेयर्स को प्रोविडेंट फंड, लाइफ इंश्योरेंस, होम लोन की मूल राशि की चुकौती जैसे कई एरियाज में छूट मिलती है। इसके अलावा HRA (हाउस रेंट अलाउंस), LTA (लीव ट्रैवल अलाउंस) जैसे छूट भी मिलती है। इस रिजीम में टैक्स की दरें आमदनी बढ़ने के साथ बढ़ती हैं, लेकिन डिडक्शन और एक्जेम्प्शन की वजह से कुल टैक्स लायबिलिटी काफी कम हो जाती है।
वहीं नया टैक्स रिजीम, जो वित्तीय वर्ष 2020-21 से लागू है, कम टैक्स दरें ऑफर करता है , लेकिन इसमें पुराने रिजीम वाले ज्यादातर डिडक्शन और एक्जेम्प्शन खत्म कर दिए गए हैं। FY 2023-24 से, नया टैक्स रिजीम सैलरी पाने वालों के लिए डिफॉल्ट ऑप्शन बन गया है।
क्या ITR फाइलिंग के दौरान रिजीम बदल सकते हैं?
जी हां, सैलरी कमाने वाले कर्मचारी आईटीआर फाइल करते समय दूसरा टैक्स रिजीम चुन सकते हैं, भले ही उन्होंने साल के दौरान नियोक्ता को कोई दूसरा रिजीम बताया हो।
क्लियरटैक्स की टैक्स विशेषज्ञ चांदनी आनंदन के अनुसार, "नियोक्ता साल भर कर्मचारी द्वारा चुने गए रिजीम के आधार पर टैक्स की गणना और कटौती करता है, लेकिन रिजीम का अंतिम चुनाव ITR फाइल करते समय किया जाता है।" उन्होंने आगे कहा, "कानूनी तौर पर टैक्सपेयर्स को फाइलिंग के दौरान रिजीम बदलने की अनुमति है, बशर्ते सही डिडक्शन, एक्जेम्प्शन और दूसरे समायोजनों पर ध्यान दिया जाए।"
टैक्स रिजीम कैसे बदलें?
अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय टैक्स रिजीम चुनने या बदलने के लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें...
1. सबसे पहले इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करें।
2. फिर ITR फॉर्म भरना शुरू करें। सैलरी वाले individuals को अपनी आमदनी के आधार पर या तो ITR फॉर्म 1 या फिर फॉर्म 2 भरना होता है। सालाना 50 लाख रुपये से ज्यादा आमदनी वाले व्यक्ति को ITR 2 भरना जरूरी है।
3. फॉर्म के जिस सेक्शन में यह option होता है, वहां आपको पुराने और नए टैक्स रिजीम में से एक को चुनने का विकल्प दिखेगा। अपना पसंदीदा रिजीम चुनें और जरूरी जानकारी भरें।
क्या रिजीम बदलना चाहिए?
सबसे सही टैक्स रिजीम चुनने के लिए, अंतिम फैसला लेने से पहले दोनों रिजीम में अपनी कुल टैक्स लायबिलिटिज का आकलन जरूर कर लें।
चांदनी आनंदन के मुताबिक, "पुराना टैक्स रिजीम उन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है, जिनकी टैक्स योग्य आमदनी ज्यादा है और जो कई डिडक्शन का लाभ उठा सकते हैं, क्योंकि इससे उनकी टैक्स योग्य आमदनी काफी कम हो जाती है।" पुराने रिजीम में मिलने वाले डिडक्शन में सेक्शन 80C (निवेश के लिए), 80D (हेल्थ इंश्योरेंस के लिए), और HRA (हाउस रेंट अलाउंस) आदि शामिल हैं।
उन्होंने आगे कहा, "जिनकी इनकम का स्ट्रक्चर साधारण है या जो बहुत कम डिडक्शन ले सकते हैं, उनके लिए नए रिजीम में टैक्स की कम दरों की वजह से टैक्स लायबिलिटिज कम हो सकती है, हालांकि उन्हें डिडक्शन का फायदा नहीं मिलेगा।"
किन गलतियों से बचें?
हालांकि, ITR फाइलिंग के दौरान रिजीम बदलने की अनुमति है, लेकिन गलतियों की वजह से इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट की ओर से जांच का सामना करना पड़ सकता है।
आनंदन के अनुसार, "सबसे आम गलती बिना सोचे-समझे रिजीम बदलना है। बहुत से लोग बदलाव से पहले दोनों रिजीम में अपनी कुल टैक्स देनदारी की ठीक से गणना नहीं करते, जिसकी वजह से उन्हें टैक्स बचत का पूरा फायदा नहीं मिल पाता।"
उन्होंने कहा कि एक और सामान्य गलती पुराने रिजीम के तहत डिडक्शन को सही तरीके से नहीं दिखाना है, खासकर HRA, एजुकेशन लोन रिपेमेंट या फिर 80C के तहत मिलने वाले डिडक्शन को भूल जाना।


