GST के 9 साल: रिफंड में तेजी, ऑडिट प्रक्रिया में बदलाव की डिमांड

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मुख्य बातें

  • देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के नौ वर्ष पूरे होने वाले हैं
  • उद्योग जगत ने इस टैक्स सुधार को व्यापक रूप से सफल बताया है
  • हालांकि, बदलाव की भी मांग की जा रही है
GST

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था को लेकर भारतीय उद्योग जगत का रुख काफी सकारात्मक रहा है। हालांकि, कारोबारियों ने रिफंड में देरी और ऑडिट संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर चिंता भी जताई है। डेलॉयट इंडिया ने एक सर्वेक्षण में यह जानकारी मिली है। दरअसल, जीएसटी को प्रभावी हुए एक जुलाई को नौ वर्ष पूरे होने वाले हैं। इससे पहले डेलॉयट इंडिया की ओर से जारी किए गए 'GST 9' सर्वेक्षण में कहा गया है कि अब सुधारों का अगला चरण केवल डिजिटलीकरण तक सीमित न रहकर एआई आधारित और आंकड़े-आधारित विवाद सैटलमेंट पर केंद्रित होना चाहिए।

बता दें कि यह सर्वेक्षण आठ प्रमुख क्षेत्रों के 1096 उद्योग प्रतिनिधियों और कारोबारियों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है, जिसमें 99 प्रतिशत प्रतिभागियों ने जीएसटी के प्रति सकारात्मक या तटस्थ दृष्टिकोण व्यक्त किया। नकारात्मक राय रखने वालों में एक प्रतिशत से भी कम लोग थे।

रिफंड की प्रक्रिया तेज करने की मांग

सर्वेक्षण के अनुसार, अगले चरण के सुधारों में 87 प्रतिशत लोगों ने टैक्स प्रावधानों की स्पष्ट व्याख्या को प्राथमिकता दी। वहीं 61 प्रतिशत ने ऑडिट प्रक्रियाओं में एकरूपता और 36 प्रतिशत ने रिफंड की प्रक्रिया को तेज करने की मांग की। बता दें कि जीएसटी को एक जुलाई, 2017 से लागू किया गया था। इसमें 17 स्थानीय करों और 13 उपकरों को समाहित किया गया था। जीएसटी करदाताओं की संख्या 2017 में 66.5 लाख थी और 2026 में यह बढ़कर लगभग 1.65 करोड़ हो गई है।

डेलॉयट दक्षिण एशिया के अध्यक्ष (टैक्स) गोकुल चौधरी ने कहा कि जीएसटी ने कर अनुपालन और पारदर्शिता में उल्लेखनीय सुधार किया है। जीएसटी नेटवर्क देश के विश्वसनीय टैक्स स्ट्रक्चर के रूप में स्थापित हुआ है और जल्द ही एआई क्षमताएं वास्तविकता बनेंगी।

जीएसटी के विकास के अगले चरण में वर्किंग कैपिटल से जुड़ी चिंताओं को दूर करने का यह उपयुक्त समय है। वहीं, एमएसएमई क्षेत्र के लिए त्रैमासिक रिटर्न फाइलिंग व्यवस्था को बड़ी राहत माना गया है। सर्वे रिपोट में कहा गया है कि सूक्ष्म,लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की इकाइयां तेजी से तिमाही कर विवरण जमा करने की व्यवस्था अपना रही हैं और इसे शीर्ष जीएसटी पहल मान रहे हैं।

नियमित जीएसटी परिषद बैठक की उम्मीद

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर और लीडर (अप्रत्यक्ष कर) महेश जयसिंह ने कहा, "हाल ही में जीएसटी दरों को तार्किक बनाए जाने का का काम एक अहम और पथ-प्रदर्शक सुधार रहा है। इसका समग्र मूल्य निर्धारण और खपत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। जयसिंह ने कहा, '' उद्योग उम्मीद करता है कि कुछ सिफारिशों पर अगली जीएसटी परिषद की बैठक में विचार किया जाएगा और उसके बाद नियमित जीएसटी परिषद की बैठकें होंगी, ताकि सामयिक मुद्दों का समय-समय पर समाधान किया जा सके।"

Deepak Kumar

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

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