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बजट में मिडिल क्लास को लग सकता है झटका, इन चीजों पर फोकस

बजट में मिडिल क्लास को लग सकता है झटका, इन चीजों पर फोकस

संक्षेप:

केंद्रीय बजट 2026 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे सैलरीड और मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स की उम्मीदें फिर से बढ़ गई हैं। महंगाई, बढ़ती EMI और रोज़मर्रा के खर्चों के बीच लोग चाहते हैं कि सरकार इस बार इनकम टैक्स में बड़ी राहत दे, ताकि हाथ में आने वाला पैसा बढ़े।

Jan 26, 2026 06:04 pm ISTVarsha Pathak लाइव हिन्दुस्तान
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Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे सैलरीड और मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स की उम्मीदें फिर से बढ़ गई हैं। महंगाई, बढ़ती EMI और रोज़मर्रा के खर्चों के बीच लोग चाहते हैं कि सरकार इस बार इनकम टैक्स में बड़ी राहत दे, ताकि हाथ में आने वाला पैसा बढ़े। लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स की मानें तो इस बार भी बड़े टैक्स कट की संभावना कम ही है। वजह साफ है। सरकार पहले ही पिछले कुछ बजट्स में इनकम टैक्स सिस्टम में बड़े बदलाव कर चुकी है और अब फिस्कल स्पेस काफी सीमित है।

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क्या कहते हैं जानकार

टैक्स एक्सपर्ट दिनकर शर्मा ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस से कहा है कि सरकार मानती है कि पर्सनल इनकम टैक्स में ज़्यादातर बड़े सुधार पहले ही हो चुके हैं। नया टैक्स रिजीम, जिसमें कम स्लैब रेट, ज़्यादा रिबेट और आसान नियम हैं, उसे लॉन्ग टर्म सुधार के तौर पर देखा गया है, न कि अस्थायी राहत के रूप में। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और सोशल स्कीम्स पर भारी खर्च की वजह से सरकार के पास बड़े टैक्स कट के लिए ज़्यादा गुंजाइश नहीं बचती। अब टैक्सपेयर्स भी बड़े ऐलान से ज़्यादा प्रैक्टिकल बदलाव चाहते हैं, जैसे महंगाई के हिसाब से स्लैब, छूट की लिमिट में सुधार और आसान कंप्लायंस।

अन्य एक्सपर्ट की राय

ध्रुवा एडवाइजर्स के पार्टनर दीपेश छेड़ा भी मानते हैं कि पिछले कुछ सालों में कॉरपोरेट और इंडिविजुअल टैक्स में पहले ही काफी राहत दी जा चुकी है। कॉरपोरेट टैक्स रेट घटाकर करीब 25% कर दिया गया, जिससे सरकार को बड़ा रेवेन्यू नुकसान हुआ। वहीं, इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स को भी नए टैक्स रिजीम के ज़रिये फायदा मिला है। ऊपर से अक्टूबर 2025 में GST रेट रेशनलाइजेशन के चलते सरकार को करीब 48 हजार करोड़ रुपये का रेवेन्यू फोरगो करना पड़ा। ऐसे में बजट 2026 में बड़े टैक्स कट करना सरकार के लिए मुश्किल हो सकता है।

CA विनीते द्विवेदी के मुताबिक सरकार की प्राथमिकता फिलहाल टैक्स राहत से ज्यादा आर्थिक स्थिरता और निवेश पर आधारित ग्रोथ है। फिस्कल डेफिसिट भले ही FY21 के 9.2% से घटकर FY24 में 5.6% हुआ हो, लेकिन आज भी टैक्स रेवेन्यू का करीब 40% सिर्फ ब्याज चुकाने में चला जाता है। साथ ही, कैपेक्स पर खर्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि बजट 2026 में हेडलाइन बनाने वाले टैक्स कट की जगह छोटे, टारगेटेड बदलाव ही देखने को मिलेंगे। यानी मिडिल क्लास को सरप्राइज़ कम और स्टेबिलिटी ज़्यादा मिलने वाली है।

Varsha Pathak

लेखक के बारे में

Varsha Pathak
वर्षा पाठक बतौर डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर करीब 2 साल से हिन्दुस्तान डिजिटल से जुड़ी हुई हैं। मूल रूप से मधुबनी (बिहार) की रहने वाली वर्षा लाइव हिन्दुस्तान में बिजनेस सेक्शन के लिए खबरें लिखती हैं। उन्हें बिजनेस सेक्शन के अलग-अलग जॉनर की खबरों की समझ है। इसमें स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, यूटिलिटी आदि शामिल हैं। करीब 7 साल से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय वर्षा ने यहां से पहले दैनिक भास्कर और नेटवर्क 18 में बतौर कंटेंट राइटर काम किया है। उन्हें रिपोर्टिंग का भी अनुभव है। करियर की छोटी अवधि में ही वर्षा के काम की ना सिर्फ सराहना हुई है बल्कि सम्मानित भी किया गया है। वर्षा ने जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में डिप्लोमा की डिग्री ली। और पढ़ें
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