हूती हमले से क्रूड ऑयल में खलबली…100 डॉलर के पार, भारत की बढ़ सकती है टेंशन
मुख्य बातें
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 6% से अधिक उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो पिछले आठ सप्ताह का सबसे ऊंचा स्तर है
- कच्चे तेल में यह उछाल ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमले की वजह से आया है

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमले से क्रूड ऑयल यानी कच्चे तेल की कीमतों में खलबली मच गई है। एक बार फिर से कच्चे तेल की कीमतें बेकाबू होने लगी हैं। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 6% से अधिक उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो पिछले आठ सप्ताह का सबसे ऊंचा स्तर है।
वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड में भी लगातार दूसरे दिन तेजी रही। इस दौरान यह 5% से ज्यादा बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। यह 11 जून के बाद सबसे ज्यादा है। कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेजी का असर भारत पर भी पड़ने की आशंका है। बता दें कि भारत बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। अगर हालात में सुधार नहीं हुआ तो कच्चे तेल के आयात का बिल बढ़ेगा और इससे महंगाई भी बढ़ने की आशंका रहेगी।
अचानक तेजी की वजह?
दरअसल, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रेड शी यानी लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमले का दावा किया। इस ग्रुप ने पहले ही सऊदी अरब की नाकेबंदी का ऐलान किया था। ऐसे में अब कहा जा सकता है कि संघर्ष का दायरा बढ़ रहा है। बता दें कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से जहाजों पर हमले ज्यादातर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ही हो रहे थे।
ताजा दावों से पता चलता है कि यह खतरा अब लाल सागर तक फैल सकता है, जिससे तेल बाजार के लिए एक और चिंता का विषय बन गया है। लाल सागर का रास्ता इसलिए अहम है क्योंकि दुनिया भर के बाजारों में जाने वाला लाखों बैरल तेल बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इस जलमार्ग से दुनिया का लगभग 12-15% समुद्री व्यापार भी होता है, जिसकी कीमत सालाना $1 ट्रिलियन से अधिक है। होर्मुज जलडमरूमध्य से बाधा के बीच इसे एक वैकल्पिक रास्ते के तौर पर भी इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में अब वैकल्पिक रास्ते पर भी खतरा मंडराने लगा है।
भारत के लिए टेंशन क्यों?
इस बिगड़ते माहौल का असर भारत पर पड़ सकता है और देश में महंगाई बढ़ सकती है। ये इसलिए क्योंकि कच्चे तेल के महंगे होने वजह से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ेंगे। इससे ट्रांसर्पोटेशन खर्च बढ़ेगा और फिर ज्यादातर आयातित वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। बता दें कि भारत से पहले इसका असर अमेरिका पर दिखने लगा है। अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत बढ़कर 4.09 डॉलर प्रति गैलन हो गई है।


