ईरान पर बमबारी कच्चे तेल पर पड़ रही ‘भारी’, दाम 78 डॉलर के पार, तेजी से बढ़ रहा संकट
मुख्य बातें
- ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिकी हमले ईरान द्वारा जहाज़ों पर किए गए हमलों के 'बदले' में हैं
- इससे ब्रेंट क्रूड की कीमत 5.20 प्रतिशत उछलकर 78 डॉलर के पार पहुंच गई है
अमेरिका ने ईरान के अंदर लगातार दूसरे दिन हमले किए हैं। इससे तेल की कीमतों में आग लग गई है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड ऑयल का भाव 1.26 प्रतिशत चढ़कर 74.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि बुधवार को इसमें 4 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखी गई थी। ब्रेंट क्रूड की कीमत 5.20 प्रतिशत उछलकर 78 डॉलर के पार पहुंच गई है।
अमेरिकी सेना ने ईरान की उस क्षमता को कमजोर करने के लिए और हमले किए, जिससे वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही के लिए खतरा पैदा कर सकता था। वहीं, ईरान ने इस क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों के खिलाफ बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सख्त चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान के साथ हुई अंतरिम शांति समझौता अब खत्म हो गया है। उन्होंने ईरान के बंदरगाहों पर फिर से नाकाबंदी लागू करने की संभावना भी जताई। साथ ही, उन्होंने आगाह किया कि कच्चे तेल के दाम और बढ़ सकते हैं, और हमलों में ईरान के निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर "कब्जा" करना भी शामिल हो सकता है।
ट्रंप ने हमलों को ईरानी हमलों का 'बदला' बताया: ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिकी हमले ईरान द्वारा जहाजों पर किए गए हमलों के 'बदले' में हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा दोबारा हुआ, तो स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी।
ग्लोबल ऑयल मार्केट हिला
इस हफ्ते मध्य पूर्व में फिर से लड़ाई शुरू होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार हिल गया है। तेल के भाव दूसरी तिमाही में आए कुछ नुकसान की भरपाई कर रहे हैं। खाड़ी देशों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाली स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस तनाव के केंद्र में है। अमेरिका ने व्यापारिक जहाजों पर हालिया हमलों के बाद ये कार्रवाई की है।
कितनी बढ़ सकती है कीमत?
टीपी आईसीएपी के विश्लेषक स्कॉट शेल्टन का कहना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद हो गया, तो तेल के दाम में और 10 डॉलर की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, अगर ऑयल सप्लाई जारी रहा, तो कीमतें इससे ज्यादा नहीं बढ़ेंगी, लेकिन यह अनुमान लगाना मुश्किल है।
पहले भी बंद हो चुका है होर्मुज
फरवरी में अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद जब युद्ध शुरू हुआ, तो ईरान ने होर्मुज को लगभग पूरी तरह बंद कर दिया था। इससे खाड़ी के तेल उत्पादकों को अपने तेल क्षेत्र बंद करने पड़े क्योंकि भंडारण टैंक भर गए थे। हाल ही में अंतरिम समझौते के बाद जहाजों की आवाजाही बढ़ी थी, लेकिन अब नए हमलों से यह फिर से जांचा जाएगा कि सप्लॉयर इस रिस्की रूट से जहाज निकाल पाते हैं या नहीं।
इनपुट: ब्लूमबर्ग
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