महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? आने वाला है बड़ा संकट? ये संकेत दे रहे एक्सपर्ट
हार्मुज (Hormuz) स्ट्रेट बंद होने से दुनिया भर में तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है, जिससे करीब 10% की कमी आ चुकी है। फिलहाल, अमीर देश अपने स्टॉक से हालात संभाल रहे हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि जल्द ही डिमांड में गिरावट यानी डिमांड डिस्ट्रक्शन देखने को मिलेगी।

दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ हार्मुज (Strait of Hormuz) इस समय ग्लोबल मार्केट के लिए बड़ा संकट बन चुका है। यह रास्ता बंद होने की वजह से तेल सप्लाई पर भारी असर पड़ा है, लेकिन अभी तक इसकी पूरी मार डिमांड पर साफ तौर पर नहीं दिखी है। वजह यह है कि अमीर देश अपने स्टॉक (भंडार) का इस्तेमाल कर रहे हैं और ज्यादा कीमत देकर भी तेल खरीद रहे हैं। हालांकि, अब ट्रेडर्स चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले समय में इसका बड़ा झटका देखने को मिल सकता है।
असल समस्या यह है कि सप्लाई में करीब 10% तक की कमी आ चुकी है। अगर यह रास्ता जल्द नहीं खुलता, तो लोगों को मजबूरी में कम तेल इस्तेमाल करना पड़ेगा। यह या तो बढ़ती कीमतों की वजह से होगा या फिर सरकारें खुद खपत कम करने के लिए कदम उठाएंगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 1 अरब बैरल तेल की सप्लाई पहले ही प्रभावित हो चुकी है, जो कि आपातकालीन भंडार से कहीं ज्यादा है।
शुरुआती असर एशिया के पेट्रोकेमिकल सेक्टर में दिखा, लेकिन अब इसका असर धीरे-धीरे आम लोगों की जिंदगी तक पहुंच रहा है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency) के अनुसार, इस महीने वैश्विक तेल मांग में पिछले 5 साल का सबसे बड़ा गिरावट देखने को मिल सकती है।
इस संकट का सीधा असर ट्रांसपोर्ट और एविएशन सेक्टर पर भी पड़ रहा है। यूरोप और अमेरिका की कई एयरलाइंस ने हजारों फ्लाइट्स कैंसिल कर दी हैं। वहीं, पेट्रोल और डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ रहा है। अमेरिका में पेट्रोल 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गया है, जिसके चलते लोग कम फ्यूल खरीद रहे हैं।
सबसे ज्यादा चिंता डीजल को लेकर है, क्योंकि यह पूरी दुनिया की सप्लाई चेन की रीढ़ माना जाता है। ट्रक, मशीनें और इंडस्ट्री, सब कुछ डीजल पर चलता है। अगर इसकी कमी बढ़ती है, तो सामान की आवाजाही और महंगाई दोनों पर बड़ा असर पड़ेगा। भारत जैसे देशों में भी एलपीजी और डीजल की सप्लाई को लेकर दबाव बढ़ सकता है।
एक और बड़ा खतरा यह है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि क्रूड ऑयल $150 से $250 प्रति बैरल तक जा सकता है। इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ेगा और मंदी (Recession) का खतरा भी बढ़ सकता है।
फिलहाल, दुनिया के बड़े देश अपने स्टॉक का इस्तेमाल करके हालात संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह ज्यादा समय तक संभव नहीं है। अगर स्ट्रेट ऑफ हार्मुज (Strait of Hormuz) जल्द नहीं खुलता, तो आने वाले महीनों में लोगों को महंगे फ्यूल, कम खपत और आर्थिक सुस्ती का सामना करना पड़ सकता है।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
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