NSE IPO को लेकर बड़ा अपडेट, सेबी के एक्सपर्ट पैनल से मिली सैद्धांतिक मंजूरी
NSE IPO Updates: 1800 करोड़ रुपये के समझौते को मिली मंजूरी एनएसई आईपीओ के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। अगर सेबी की अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो जल्द ही बाजार को एक ऐतिहासिक आईपीओ देखने को मिल सकता है।

NSE IPO Updates: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आईपीओ को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। लंबे समय से अटकी लिस्टिंग प्रक्रिया अब तेजी पकड़ सकती है, क्योंकि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के एक्सपर्ट पैनल ने एनएसई के समझौता प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे आईपीओ की राह में सबसे बड़ी बाधा हटती दिख रही है।
कोलोकेशन और डार्क फाइबर विवाद सुलझा
एनएसई ने कोलोकेशन और डार्क फाइबर मामलों को सुलझाने के लिए करीब 1,800 करोड़ रुपये का भुगतान करने का प्रस्ताव दिया था। यही विवाद पिछले कई वर्षों से आईपीओ में देरी की मुख्य वजह बना हुआ था। अब एक्सपर्ट पैनल की मंजूरी के बाद इन मामलों का निपटारा लगभग तय माना जा रहा है, जिससे नियामकीय अनिश्चितता कम होगी।
समिति की सिफारिश अब सेबी के अंतिम फैसले के लिए
चार मेंबर वाले इस एक्सपर्ट पैनल की अध्यक्षता जय नारायण पटेल कर रहे हैं। इस समिति की सिफारिश अब सेबी के फुल टाइम मेंबर के पास जाएगी, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अगर यहां से भी मंजूरी मिल जाती है, तो एनएसई के आईपीओ का रास्ता लगभग साफ हो जाएगा।
2016 से अटका पड़ा है NSE का IPO
एनएसई ने अपना आईपीओ प्रस्ताव पहली बार 18 अक्टूबर 2016 को दाखिल किया था। लेकिन कोलोकेशन विवाद, गवर्नेंस से जुड़े सवाल और टेक्निकल खामियों के चलते सेबी ने मंजूरी रोक दी थी। पिछले करीब एक दशक से निवेशक इस आईपीओ का इंतजार कर रहे हैं, जो भारतीय बाजार के सबसे बड़े और चर्चित आईपीओ में से एक माना जाता है।
नए नेतृत्व के बाद बढ़ी उम्मीद
जब तुहिन कांता पांडे ने सेबी प्रमुख का पद संभाला, तब इस मामले में नई गति आई।एनएसई ने पिछले साल सेबी के पास समझौते के लिए आवेदन दिया, जिसमें कोलोकेशन मामले के लिए 1,165 करोड़ और डार्क फाइबर के लिए 223 करोड़ रुपये देने की पेशकश शामिल थी। अब इस प्रस्ताव को मिली मंजूरी ने बाजार में सकारात्मक संकेत दिए हैं।
क्यों खास है NSE IPO?
एनएसई का आईपीओ भारतीय कैपिटल मार्केट के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है। यह सिर्फ एक लिस्टिंग नहीं, बल्कि निवेशकों के लिए देश के सबसे बड़े एक्सचेंज में हिस्सेदारी लेने का मौका होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सब कुछ तय समय पर हुआ, तो आने वाले महीनों में इस आईपीओ को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


