पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल पर टैक्स 166% बढ़ाने की तैयारी, पब्लिक से होगी वसूली, मचेगा हाहाकार
पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कठिन शर्तों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। यह कदम आम नागरिकों पर और बोझ डालेगा, जो पहले से ही महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रहे हैं।
पाकिस्तान में आने वाले दिनों में वहां की जनता पर टैक्स का भारी बोझ बढ़ने वाला है। हाहाकार मचना तय है। क्योंकि, सरकार ने राज्य सरकारों से अगले वित्त वर्ष में 400 अरब रुपये से अधिक का अतिरिक्त टैक्स वसूलने को कहा है। पेट्रोलियम उत्पादों जैसे पेट्रोल-डीजल पर टैक्स 166% लगेगा। इसके लिए सरकार ने सभी प्रांतों को वसूली का टार्गेट भी दे दिया है।
दरअसल, पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कठिन शर्तों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। यह कदम आम नागरिकों पर और बोझ डालेगा, जो पहले से ही महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। केंद्र और प्रांतीय बजट मिलाकर वित्त वर्ष 2026-27 में कुल अतिरिक्त टैक्स 1.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है।
पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर भारी टैक्स
आईएमएफ ने पाकिस्तान से कम टैक्स वाले सेक्टर्स जैसे, एग्रीकल्चर, रियल एस्टेट, सर्विसेज पर टैक्स बढ़ाने को कहा है। एएनआई की खबर के मुताबिक कृषि का पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में 24.6% योगदान है, लेकिन उस पर प्रभावी टैक्स सिर्फ 0.3% है।
वहीं, पेट्रोलियम उत्पादों जैसे पेट्रोल-डीजल पर टैक्स 166% आंकी गई है। अगले वित्त वर्ष में पेट्रोलियम लेवी से 17.27 लाख करोड़ रुपये वसूलने का लक्ष्य है, जो मौजूदा टार्गेट से 260 अरब रुपये अधिक है।
पेट्रोलियम लेवी बढ़ाकर 700 अरब रुपये जुटाने की योजना
वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने प्रांतीय वित्त मंत्रियों के साथ ऑनलाइन बैठक कर आईएमएफ से जुड़े नए रेवेन्यू टार्गेट पर चर्चा की। पाकिस्तान की केंद्र सरकार नए टैक्स उपायों, सख्त वसूली और पेट्रोलियम लेवी बढ़ाकर 700 अरब रुपये जुटाने की योजना बना रही है। वहीं, राज्यों को 400 अरब रुपये से अधिक का अतिरिक्त राजस्व जुटाना होगा।
किस स्टेट को कितना मिला टार्गेट
सिंध प्रांत को सबसे अधिक 200 अरब रुपये का टार्गेट दिया गया है। जबकि, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत को 175 अरब रुपये और खैबर पख्तूनख्वा को 45 अरब रुपये की वसूली का टार्गेट मिला है। जबकि सबसे कम बलूचिस्तान को लगभग 20 अरब रुपये का टार्गेट मिला है।
आईएमएफ की क्या हैं शर्तें
पाकिस्तान अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए आईएमएफ की मदद पर निर्भर है। आईएमएफ ने प्रांतों से सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP का 0.3% (लगभग 430 अरब रुपये) अतिरिक्त टैक्स वसूलने को कहा है। फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के कमजोर प्रदर्शन से सरकार को करीब 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना है। इस अंतर को पाटने के लिए कटौती और पेट्रोलियम लेवी बढ़ाई जा रही है।
प्रांतों को सख्त निर्देश
आईएमफ ने कृषि टैक्स सुधारों में देरी और कमजोर लागू करने पर भी नाराजगी जताई है। अब प्रांतों को सेवाओं पर टैक्स का दायरा बढ़ाने, प्रॉपर्टी टैक्स सुधारने और वसूली तंत्र मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। पाकिस्तान ने आईएमएफ को आश्वासन दिया है कि प्रांत ऐसी नीतियों से बचेंगे, जो कर्जदाता के सुधार कार्यक्रम को कमजोर करें।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


