जी एंटरटेनमेंट को SAT से बड़ी राहत, 11 बजे के बाद शेयर खरीदने की मच गई होड़
मुख्य बातें
- सेबी ने जी एंटरटेनमेंट पर 30 लाख रुपये, पुनीत गोयनका पर 58 लाख रुपये और सुभाष चंद्रा पर 60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था
- कुल मिलाकर यह जुर्माना 1.48 करोड़ रुपये बैठता है
- इससे भी बड़ी बात यह थी कि सेबी ने गोयनका और चंद्रा पर एक साल के लिए शेयर बाजार से दूर रहने की पाबंदी लगा दी थी,

11 बजे तक जी एंटरटेनमेंट के शेयर 95.46 और 97 रुपये के बीच ट्रेड कर रहे थे। सवा 11 बजे के बाद अचानक स्टॉक काउंटर पर हलचल बढ़ जाती है। बिकवाली अचानक खरीदारी में बदल जाती है। इस काउंटर पर छाए मायूसी के बादल छंट जाते हैं। यह सब होने के पीछे एक राहतभरी खबर है, जो आज 11 बजे के आसपास आई। इसके बाद ZEEL के शेयर 104.74 रुपये डे हाई को टच कर गए। दोपहर सवा एक बजे के करीब 5.73 प्रतिशत उछलकर 102.29 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे।
खबर यह थी कि सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल यानी सैट ने जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड की उस याचिका को मंजूरी दे दी है, जिसमें कंपनी ने प्रमोटर ग्रुप से प्रेफरेंशियल वारंट के जरिए पैसा जुटाने की इजाजत मांगी थी। ट्रिब्यूनल ने कंपनी को रोजमर्रा के खर्चों के लिए म्यूचुअल फंड से पैसा निकालने की भी छूट दे दी है। इसके साथ ही प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक हफ्ते का अतिरिक्त समय भी दिया गया है।
आदेश में क्या कहा गया
ट्रिब्यूनल की टेक्निकल मेंबर मीरा स्वरूप ने बेंच की तरफ से आदेश पढ़ते हुए कहा कि अपील करने वाली कंपनी और पुनीत गोयनका को प्रमोटर ग्रुप की इकाई के साथ फुली कन्वर्टिबल वारंट जारी करने की प्रक्रिया पूरी करने की इजाजत दी जाती है, बशर्ते दोनों अपीलकर्ता एक हफ्ते के भीतर पूरा जुर्माना जमा करा दें।
उन्होंने आगे कहा कि वारंट जारी करने की समयसीमा 14 अगस्त को खत्म होने वाली थी, उसे आज से एक हफ्ते के लिए बढ़ा दिया गया है। कंपनी को म्यूचुअल फंड से जुड़े लेनदेन की इजाजत सिर्फ आम कारोबार में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दी गई है, किसी और मकसद के लिए नहीं। इसमें प्रस्तावित डिविडेंड का भुगतान भी शामिल नहीं है।
पूरा मामला क्या है
दरअसल सेबी के 31 जुलाई 2026 के आदेश का संबंध जी एंटरटेनमेंट की संपत्ति को बिना मंजूरी के गिरवी रखने से है। सेबी ने कहा था कि कंपनी की हैदराबाद वाली जमीन को प्रमोटरों से जुड़ी इकाइयों के कर्ज के लिए सिक्योरिटी के तौर पर इस्तेमाल किया गया, जबकि इसके लिए जरूरी कॉरपोरेट मंजूरी और खुलासे नहीं किए गए थे।
सेबी की जांच तब शुरू हुई जब पता चला कि जी की संपत्तियों से जुड़े टाइटल डीड गायब हैं। सेबी के मुताबिक कंपनी की संपत्ति असल में बड़े शेयरधारकों से जुड़ी इकाइयों के फायदे के लिए लगाई गई थी, लेकिन इस बात की जानकारी जी के बोर्ड, ऑडिट कमेटी, शेयरधारकों या निवेशकों को ठीक से नहीं दी गई थी। सेबी ने इसे सिक्योरिटीज कानूनों और कॉरपोरेट गवर्नेंस नियमों का उल्लंघन माना।
सेबी ने क्या सजा सुनाई थी
सेबी ने जी एंटरटेनमेंट पर 30 लाख रुपये, पुनीत गोयनका पर 58 लाख रुपये और सुभाष चंद्रा पर 60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। कुल मिलाकर यह जुर्माना 1.48 करोड़ रुपये बैठता है। इससे भी बड़ी बात यह थी कि सेबी ने गोयनका और चंद्रा पर एक साल के लिए शेयर बाजार से दूर रहने की पाबंदी लगा दी थी, जबकि जी एंटरटेनमेंट पर दो महीने के लिए बाजार से पैसा जुटाने पर रोक लगाई गई थी।
इस रोक का असर कंपनी के 3,144 करोड़ रुपये के प्रमोटर-आधारित फंड जुटाने के प्रस्ताव पर पड़ रहा था। इसके बाद कंपनी ने सेबी से ही पूछा था कि क्या बाजार पर लगी रोक के दौरान भी फंड जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं
सैट के इस फैसले से जी एंटरटेनमेंट को अपनी फंडिंग योजना को आगे बढ़ाने का रास्ता मिल गया है। कंपनी के लिए यह राहत इसलिए भी अहम है, क्योंकि अगर वारंट जारी करने की समयसीमा नहीं बढ़ती तो पूरी प्रक्रिया अटक सकती थी। हालांकि राहत के साथ शर्त यह भी है कि पहले पूरा जुर्माना जमा करना होगा और म्यूचुअल फंड से मिली रकम का इस्तेमाल सिर्फ जरूरी खर्चों में ही करना होगा।


