सरकार का बड़ा फैसला: चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक, क्या कोई संकट आने वाला है?

Drigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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भारत सरकार ने शुगर एक्सपोर्ट को बैन कर दिया है। यह कदम इसलिए उठाया है कि जिन क्षेत्रों में गन्ने की पैदावार अच्छी होती थी, उन जगहों पर फसल खराब होने से उत्पादन लगातार दूसरे साल घरेलू खपत से कम रहने का अनुमान है।

सरकार का बड़ा फैसला: चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक, क्या कोई संकट आने वाला है?

भारत सरकार ने चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक जारी रहेगा। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश ने यह कदम देश में दाम बढ़ने से रोकने यानी घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया है।

क्यों जरूरी था यह कदम?

भारत में इस बार गन्ने की पैदावार कमजोर पड़ गई है। जिन क्षेत्रों में गन्ने की पैदावार अच्छी होती थी, उन जगहों पर फसल खराब होने से उत्पादन लगातार दूसरे साल घरेलू खपत से कम रहने का अनुमान है। सरकार ने पहले सोचा था कि गन्ने का उत्पादन मांग से अधिक होगा, इसलिए मिलों को 15.9 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी गई थी। लेकिन, अब हालात बदल गए हैं।

अल नीनो का खतरा भी मंडरा रहा

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अल नीनो प्रभाव से इस साल मानसून पर खतरा बना हुआ है। इससे अगले सीजन का उत्पादन भी अनुमान से कम रह सकता है। यही वजह है कि सरकार ने समय रहते निर्यात रोकने का फैसला लिया।

कितना निर्यात पहले ही हो चुका है?

मिंट ने व्यापारियों के हवाले से कहा है कि मंजूर किए गए 15.9 लाख टन में से करीब 8 लाख टन के सौदे हो चुके थे। इनमें से 6 लाख टन से अधिक चीनी पहले ही भेजी जा चुकी है। अब बचे हुए सौदों को पूरा करना व्यापारियों के लिए मुश्किल होगा।

किन शर्तों पर निर्यात की मंजूरी?

सरकार ने साफ किया है कि कच्ची और सफेद चीनी का निर्यात पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। हालांकि, जो चीनी पहले से निर्यात प्रक्रिया में है, उसे विशेष शर्तों पर भेजा जा सकेगा। अगर राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने से पहले लोडिंग शुरू हो चुकी थी। अगर शिपिंग बिल दाखिल हो चुका था और जहाज भारतीय पोर्ट पर लग चुका था। अगर चीनी कस्टम या कस्टोडियन को सौंपी जा चुकी थी।

दुनिया पर क्या असर होगा?

इस प्रतिबंध से ग्लोबल लेवल पर सफेद और कच्ची चीनी की कीमतों में तेजी आएगी। न्यूयॉर्क में चीनी के वायदा भाव 2% से अधिक बढ़ गए, जबकि लंदन में सफेद चीनी के दाम 3% उछल गए। इसका सबसे ज्यादा फायदा भारत के प्रतिद्वंद्वी उत्पादकों ब्राजील और थाईलैंड को मिलेगा। ये देश एशियाई और अफ्रीकी खरीदारों को अधिक चीनी भेज सकेंगे।

व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ीं

मुंबई के एक वैश्विक व्यापार घराने के डीलर ने बताया, "सरकार ने फरवरी में अतिरिक्त निर्यात कोटा दिया था, जिससे व्यापारियों ने कई सौदे कर लिए। अब इन ऑर्डरों को पूरा करना उनके लिए सिरदर्द बन गया है।"

विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ महीनों में घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें स्थिर रहेंगी, लेकिन अगर मानसून कमजोर रहा, तो सरकार को और कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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