हेल्थ इंश्योरेंस में बड़े बदलाव की तैयारी, जल्द दूर होंगी पॉलिसी होल्डर्स की परेशानियां

Drigraj Madheshia मिंट
Follow us on Google News
share

मुख्य बातें

  • देश में पिछले कुछ वर्षों में हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही समस्याएं भी बढ़ी हैं
  • बढ़ते प्रीमियम, अस्पतालों की मनमानी बिलिंग, क्लेम में देरी और पॉलिसी की जटिल शर्तों से लोग परेशान हैं
हेल्थ इंश्योरेंस में बड़े बदलाव की तैयारी, जल्द दूर होंगी पॉलिसी होल्डर्स की परेशानियां

केंद्र सरकार ने हेल्थ इंश्योरेंस के क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत बीमा नियामक इरडा ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है, जो हेल्थ इंश्योरेंस के पूरे ढांचे की गहराई से जांच करेगी और ऐसे सुझाव देगी, जिससे सिस्टम ज्यादा सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बन सके।

इसका मकसद बीमा लेने वाले लोगों की परेशानियों को कम करना और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसकी पहुंच बनाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में पिछले कुछ वर्षों में हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही समस्याएं भी बढ़ी हैं। लोग लगातार बढ़ते प्रीमियम, अस्पतालों की मनमानी बिलिंग, क्लेम में देरी और पॉलिसी की जटिल शर्तों से परेशान हैं।

कम हुआ आम लोगों का भरोसा

कई बार बीमा होने के बावजूद मरीज को बड़ी रकम अपनी जेब से खर्च करनी पड़ती है। यही वजह है कि आम लोगों का भरोसा इंश्योरेंस सिस्टम पर कुछ हद तक कम हुआ है। इन समस्याओं को देखते हुए बीमा ढांचे में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

अस्पतालों की मनमानी बिलिंग सबसे बड़ी समस्या

अस्पतालों की मनमानी बिलिंग सबसे बड़ी समस्या है। एक ही बीमारी के इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में अलग-अलग खर्च लिया जाता है। इस गड़बड़ी को दूर करने के लिए अस्पतालों की फीस और टैरिफ सिस्टम की समीक्षा की जाएगी, ताकि इलाज की कीमतों में पारदर्शिता लाई जा सके।

क्या करेगी समिति

हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े हर पहलू की समीक्षा करेगी। समिति यह भी देखेगी कि हेल्थ इंश्योरेंस कितने लोगों तक पहुंच रहा है, दावा निपटान की प्रक्रिया कैसी है, नए बीमा प्लान कैसे बनाए जाएं, लोगों की शिकायतों का समाधान कैसे तेज किया जाए। इसके अलावा फर्जी दावे, गलत बिलिंग और प्रशासनिक कमियों को दूर करने के उपाय भी सुझाएगी।

इसके लिए बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश होगी। समिति यह भी देखेगी कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और निजी बीमा के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए। इससे लोगों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे और बीमा का फायदा ज्यादा लोगों तक पहुंच सकेगा। साथ ही पॉलिसी को एक कंपनी से दूसरी कंपनी में ले जाना भी आसान हो सकता है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

जानें Hindi News, Business News, Budget 2026, बजट 2026 Live, Income Tax Live Updates की लेटेस्ट खबरें, शेयर बाजार का लेखा-जोखा, Share Market के लेटेस्ट अपडेट्स Investment Tips के बारे में सबकुछ।,