टैक्स कंप्लायंस में बड़ा बदलाव: फॉर्म 15G और 15H की जगह लेगा फॉर्म 121, जानें किसके लिए जरूरी

Apr 07, 2026 10:22 am ISTDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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New Income Tax Act: अब आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 15G और फॉर्म 15H को हटाकर नए फॉर्म 121 को लाया जा रहा है। यह बदलाव इनकम-टैक्स एक्ट 2025 के तहत किया गया है। आइए समझें कि यह किसके लिए जरूरी है और क्यों?

टैक्स कंप्लायंस में बड़ा बदलाव: फॉर्म 15G और 15H की जगह लेगा फॉर्म 121, जानें किसके लिए जरूरी

अब आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 15G और फॉर्म 15H को हटाकर नए फॉर्म 121 को लाया जा रहा है। यह बदलाव इनकम-टैक्स एक्ट 2025 के तहत किया गया है। इसका मकसद उन डिक्लेरेशंस को सरल बनाना है, जिनके जरिए टीडीएस कटने से बचा जा सकता है। हालांकि, इससे फॉर्म भरने का तरीका और कौन इसे भर सकता है, दोनों में बदलाव आएगा।

फॉर्म 121 क्या है?

फॉर्म 121 एक Self-Declaration है, जिसे टैक्सपेयर अपनी ओर से देता है। इस डिक्लेरेशन के जरिए टैक्सपेयर बताता है कि वित्त वर्ष के दौरान उसकी अनुमानित कुल इनकम शून्य है। इसलिए उसकी निर्धारित इनकम पर कोई टीडीएस नहीं काटा जाना चाहिए। जब टैक्सपेयर यह फॉर्म अपने बैंक या कंपनी को जमा करता है, तो वह संस्था उस इनकम पर टीडीएस नहीं काटेगी, बशर्ते यह घोषणा सही और मान्य हो।

फॉर्म 15G और 15H में क्या बदलेगा?

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब दो फॉर्मों की जगह एक ही फॉर्म का इस्तेमाल होगा। पहले के नियमों के अनुसार फॉर्म 15G उन व्यक्तियों के लिए था, जिनकी उम्र 60 साल से कम थी। फॉर्म 15H सिर्फ सीनियर सिटीजन (60 साल या उससे अधिक) के लिए था।

अब नए नियमों में फॉर्म 121 सभी पात्र व्यक्तियों के लिए एक साझा फॉर्म होगा, चाहे उनकी उम्र कितनी भी हो। इससे उम्र के आधार पर अलग-अलग फॉर्म चुनने की जरूरत नहीं रहेगी। इससे टैक्स प्रक्रिया अधिक सरल और सुव्यवस्थित हो जाएगी।

फॉर्म 121 कौन भर सकता है?

निम्नलिखित लोग फॉर्म 121 भरने के लिए पात्र हैं…

· भारतीय नागरिक, चाहे वे 60 साल से कम हों या अधिक।

· हिंदू अविभाजित परिवार (HUF)।

· कुछ अन्य पात्र संस्थाएं।

लेकिन कुछ लोग इस फॉर्म को भरने के लिए पात्र नहीं हैं, जैसे कंपनियां और फर्म, अनिवासी।

फॉर्म 121 के तहत किस इनकम पर टीडीएस नहीं कटेगा?

यह फॉर्म कई तरह की आय पर टीडीएस कटने से बचाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे बैंक जमा पर मिलने वाला ब्याज, डिविडेंड, रेंट, बीमा कमीशन, म्यूचुअल फंड से होने वाली इनकम, जीवन बीमा की राशि, प्रोविडेंट फंड (PF) निकासी और पेंशन।

क्या फॉर्म 121 भरना अनिवार्य है?

नहीं, यह फॉर्म भरना पूरी तरह से वैकल्पिक है। यह केवल उन करदाताओं के लिए है, जिनकी टैक्सेबल इनकम शून्य है और वे चाहते हैं कि उनसे पहले ही टीडीएस न काटा जाए। अगर आप यह फॉर्म नहीं भरते हैं, तो सामान्य रूप से टीडीएस कटेगा और बाद में रिटर्न दाखिल करते समय आप इसका रिफंड दावा कर सकते हैं।

फॉर्म 121 कैसे जमा करें?

आप यह फॉर्म या ऑनलाइन जमा कर सकते हैं, बशर्ते जिस संस्था (पेयर) को आप दे रहे हैं, वह डिजिटल सबमिशन की सुविधा देती हो। दूसरा तरीका है कि आप इसे पेयर (बैंक/कंपनी) की तरफ से सबमिट कर सकते हैं। पेयर को इस फॉर्म की डिटेल्स इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से अपलोड करना होगा। साथ ही तिमाही टीडीएस स्टेटमेंट (फॉर्म 140) में इन लेन-देन की रिपोर्ट करनी होगी।

किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

हालांकि, नया फॉर्म प्रोसेस को सरल बनाता है, फिर भी टैक्सपेयर की जिम्मेदारी कम नहीं हुई है। अगर आप पर वास्तव में टैक्स बनता है और आप गलत घोषणा करते हैं तो आपको जुर्माना या सजा भुगतना पड़ सकता है।

अगर आपकी आय कई स्रोतों से है, तो आपको अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग फॉर्म 121 जमा करने पड़ सकते हैं। अगर आप फॉर्म देर से जमा करते हैं, तो टीडीएस रोकने के लिए यह मान्य नहीं होगा और फिर भी टीडीएस कट सकता है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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