17 फ्लैट बेचकर कमाए 11.80 करोड़ रुपये, फिर भी नहीं दिया कोई टैक्स! जानिये कैसे किया ये कमाल
मुख्य बातें
- मकान मालिक ने 17 अपार्टमेंट बेचे और 11.8 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया लेकिन कोई टैक्स नहीं भरा
- ज्यादातर लोग यही जानना चाहते है कि मकान बेचने पर 11 करोड़ रुपये से अधिक प्रॉफिट कमाने के बाद भी टैक्स कैसे नहीं बनाा? अगर टैक्स बना, तो ऐसा क्या किया कि टैक्स देना ही नहीं पड़ा

मकान मालिक ने 17 अपार्टमेंट बेचे और 11.8 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया लेकिन कोई टैक्स नहीं भरा। ज्यादातर लोग यही जानना चाहते है कि मकान बेचने पर 11 करोड़ रुपये से अधिक प्रॉफिट कमाने के बाद भी टैक्स कैसे नहीं बनाा? अगर टैक्स बना, तो ऐसा क्या किया कि टैक्स देना ही नहीं पड़ा। आखिर ये पूरा मामला क्या है। दरअसल, बेंगलुरु के एक जमीन मालिक ने 17 अपार्टमेंट बेचकर करीब 11.80 करोड़ रुपये का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) कमाया, लेकिन इस रकम पर कोई टैक्स नहीं चुकाया। इसके बाद इनकम टैक्स विभाग ने उन्हें नोटिस भेजा और टैक्स की मांग की। मामला आखिरकार इनकम टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल (ITAT) बेंगलुरु पहुंचा, जहां जमीन मालिक के पक्ष में फैसला आया।
11.8 करोड़ रुपये के प्रॉफिट पर क्यों नहीं देना पड़ा टैक्स?
कोरमंगला निवासी अग्रवाल के पास बेंगलुरु के कुंबेना अग्रहारा इलाके में दो बड़े जमीन के टुकड़े थे। उन्होंने इन जमीनों पर बिल्डर के साथ जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट किया। इसके बदले बिल्डर ने उन्हें दोनों प्रोजेक्ट्स में कुल 122 फ्लैट दिए। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक फाइनेंशियल ईयर 2019-20 के दौरान उन्होंने इनमें से 17 फ्लैट बेच दिए, जिससे उन्हें 11.80 करोड़ रुपये का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ।
अग्रवाल ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न में दावा किया कि उन्होंने कैपिटल गेन अमाउंट का फायदा 5 नए घरों जिसमें से चार खरीदे और एक बनवाया था, उसमें निवेश कर दिये। इसी आधार पर उन्होंने इनकम टैक्स एक्ट की धारा 54 के तहत टैक्स छूट मांगी। इसलिए उन्होंने इस कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं दिया।
हालांकि, इनकम टैक्स ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया। असेसिंग ऑफिसर (AO) ने कहा कि रिवाइज नियमों के अनुसार धारा 54 का फायदा सिर्फ एक आवासीय घर में निवेश पर ही मिल सकता है। इसलिए उन्होंने केवल 5.91 करोड़ रुपये के निवेश को मान्य माना और बाकी 5.88 करोड़ रुपये को टैक्स योग्य आय मानते हुए जोड़ दिया। इसके बाद अग्रवाल ने पहले CIT(A) में अपील की लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। आखिरकार उन्होंने ITAT बेंगलुरु का दरवाजा खटखटाया।
ITAT ने अपने फैसले में कहा कि अग्रवाल ने 17 अलग-अलग फ्लैट बेचे थे और हर फ्लैट एक अलग कैपिटल एसेट था। इसलिए हर सेल को अलग ट्रांजैक्शन माना जाएगा। ट्रिब्यूनल ने माना कि यदि कई मकान बेचे गए हैं और उनके बदले खरीदे गए नए मकानों की संख्या बेचे गए मकानों से अधिक नहीं है, तो धारा 54 के तहत अलग-अलग छूट का दावा किया जा सकता है।
ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि कानून में एक आवासीय घर की शर्त का मतलब यह नहीं है कि एक ही साल में कई घर बेचने पर पूरी छूट सिर्फ एक नए घर तक सीमित कर दी जाए। इस आधार पर ITAT ने अग्रवाल की अपील स्वीकार कर ली और उन्हें पूरी टैक्स छूट का फायदा दे दिया।


