₹5,700 करोड़ देकर BoB ने खत्म किया सालों पुराना विवाद, निवेशकों में मची हलचल; 4% से ज्यादा टूटे शेयर

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुख्य बातें

  • BoB (Bank of Baroda) के शेयरों में 4% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि बैंक ने NMC हेल्थ से जुड़े लंबे कानूनी विवाद को खत्म करने के लिए 600 मिलियन डॉलर (करीब ₹5,700 करोड़) का आउट-ऑफ-कोर्ट सेटलमेंट किया है
  • बैंक ने स्पष्ट किया कि यह समझौता बिना किसी गलती स्वीकार किए किया गया है
Bank of Baroda

बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के शेयर गुरुवार को निवेशकों के लिए बड़ा झटका लेकर आए। बैंक के शेयरों में 4% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिसके पीछे सबसे बड़ी वजह बैंक द्वारा NMC हेल्थ से जुड़े लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद का समझौता करना रहा। इस खबर के बाद निवेशकों ने शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी और BSE पर बैंक का शेयर 11.40 रुपये यानी 4.20% टूटकर 260.25 रुपये पर बंद हुआ। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

बैंक ऑफ बड़ौदा ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि उसने NMC हेल्थ PLC, NMC हेल्थकेयर लिमिटेड और NMC होल्डिंग लिमिटेड के संयुक्त प्रशासकों (Joint Administrators) के साथ अदालत के बाहर समझौता (Out-of-Court Settlement) कर लिया है। इस समझौते के तहत बैंक ने 600 मिलियन डॉलर (करीब 5,700 करोड़ रुपये) का भुगतान करने पर सहमति जताई है। बैंक का कहना है कि यह समझौता सालों से चल रहे कानूनी विवाद को हमेशा के लिए खत्म करने के उद्देश्य से किया गया है।

यह मामला अबू धाबी ग्लोबल मार्केट (ADGM) कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टेंस और इंग्लैंड एवं वेल्स की हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस में चल रही उन कानूनी कार्यवाहियों से जुड़ा था, जो NMC ग्रुप की दिवालिया (Insolvency) प्रक्रिया के संबंध में थीं। अब समझौते के बाद अबू धाबी की अदालत में चल रही कार्यवाही बंद कर दी गई है, जबकि इंग्लैंड की अदालत में मामला खत्म करने की प्रक्रिया जारी है।

बैंक ने अपने बयान में साफ किया कि इस समझौते का मतलब यह नहीं है कि उसने किसी भी तरह की गलती या कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार की है। बैंक के अनुसार, दोनों पक्षों ने बिना किसी दोष या गलत काम को स्वीकार किए सभी दावों और कानूनी विवादों को समाप्त करने पर सहमति बनाई है। साथ ही समझौते की अन्य शर्तों को गोपनीय रखा गया है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने यह भी बताया कि इस पूरे मामले में उसकी वित्तीय जिम्मेदारी केवल 600 मिलियन डॉलर के तय भुगतान तक सीमित है। यह राशि बैंक की अबू धाबी शाखा द्वारा अदा की जा चुकी है।

बैंक के मुताबिक, इस समझौते का सबसे बड़ा उद्देश्य लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों, अनिश्चितता और उससे जुड़े भारी कानूनी खर्च से बचना है। कई बार कंपनियां और बैंक अदालतों में सालों तक मुकदमे लड़ने की बजाय आपसी सहमति से समझौता करना बेहतर मानते हैं, क्योंकि इससे समय और धन दोनों की बचत होती है।

हालांकि, निवेशकों ने इस खबर को शुरुआती तौर पर नकारात्मक माना, क्योंकि 5,700 करोड़ रुपये जैसी बड़ी रकम का भुगतान बैंक के लिए एक बड़ा वित्तीय कदम है। इसी वजह से शेयर बाजार में बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। फिर भी कुछ मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि लंबे समय से लटके इस विवाद के खत्म होने से भविष्य में बैंक पर कानूनी अनिश्चितता का बोझ कम होगा और निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे वापस लौट सकता है।

बैंक ऑफ बड़ौदा का शेयर प्रदर्शन

बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के शेयर गुरुवार को भारी दबाव में रहे। NSE पर बैंक का शेयर 11.80 रुपये यानी 4.34% की गिरावट के साथ 259.85 रुपये पर बंद हुआ। NMC हेल्थ मामले में करीब 5,700 करोड़ के सेटलमेंट की घोषणा के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली और बिकवाली की, जिससे शेयर में तेज गिरावट देखने को मिली।

बैंक ऑफ बड़ौदा ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनी विवाद को समाप्त करने के लिए भारी भुगतान किया है। अल्पावधि में इसका असर शेयरों पर जरूर देखने को मिला, लेकिन लंबे समय में यह फैसला बैंक के लिए कानूनी जोखिम कम करने और अपने कारोबार पर बेहतर तरीके से ध्यान देने में मददगार साबित हो सकता है।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।

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