
इन सरकारी बैंकों का खत्म होगा वजूद! 12 से घटकर रह जाएंगे सिर्फ 4 बैंक, सरकार की मेगा बड़ी तैयारी
Bank Mega Merger Planning: सरकार एक बड़े और महत्वाकांक्षी पब्लिक सेक्टर बैंक (PSB) कंसॉलिडेशन ब्लूप्रिंट पर काम कर रही है। इसके तहत वित्त वर्ष 2026-27 तक मौजूदा 12 सरकारी बैंकों की संख्या घटाकर सिर्फ 4 कर दी जाएगी।
Bank Mega Merger Planning: सरकार एक बड़े और महत्वाकांक्षी पब्लिक सेक्टर बैंक (PSB) कंसॉलिडेशन ब्लूप्रिंट पर काम कर रही है। इसके तहत वित्त वर्ष 2026-27 तक मौजूदा 12 सरकारी बैंकों की संख्या घटाकर सिर्फ 4 कर दी जाएगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन चार में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और केनरा– यूनियन बैंक का संयुक्त ढांचा शामिल होगा। यह योजना फिलहाल वित्त मंत्रालय में तैयार हो रही है और इसका उद्देश्य सरकारी बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत करना, संचालन कुशलता बढ़ाना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मेगा-बैंक बनाना है।
चार बड़े बैंक का ढांचा तैयार करने की तैयारी
सूत्र ने मनी कंट्रोल को बताया कि योजना का मकसद '12 से घटाकर 4 PSB रखना' है। इसके लिए छोटे और मझोले सरकारी बैंकों को पहले बड़े बैंकों में मिलाया जाएगा और फिर अंतिम चार बड़े बैंक ढांचे तैयार होंगे — जो देश की विकास जरूरतों के लिए मजबूत ऋण क्षमता रखते हों।
केनरा बैंक–यूनियन बैंक विलय की ओर सरकार
सूत्रों के अनुसार, सरकार केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के विलय की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह मर्जर उन चार मुख्य इकाइयों में से एक बनाएगा, जो अंतिम संरचना का हिस्सा होंगी। इसके साथ ही इंडियन बैंक और यूको बैंक को भी इसी ढांचे में समाहित करने पर विचार किया जा रहा है, जिससे एक बड़ा संयुक्त सार्वजनिक बैंक बनेगा। यह मेगा बैंक SBI, PNB और BoB के साथ चार मुख्य सरकारी बैंकों की सूची में शामिल होगा।
IOB, CBI, BoI और BoM के भी बड़े बैंकों में विलय की तैयारी
अन्य मिड-साइज PSB जैसे — इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (CBI), बैंक ऑफ इंडिया (BoI), बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BoM) को SBI, PNB या बैंक ऑफ बड़ौदा में समाहित करने की तैयारी है। पंजाब एवं सिंध बैंक के बारे में अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इसे भी चार बड़े बैंकों में से किसी एक में विलय किया जा सकता है।
मंत्रालय से PMO तक होगी मल्टी-लेवल मंजूरी
कंसॉलिडेशन प्लान को सबसे पहले वित्त मंत्री के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उसके बाद यह कई स्तरों पर समीक्षा प्रक्रिया से गुजरेगा। जैसे- कैबिनेट सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की समीक्षा और SEBI द्वारा रेगुलेटरी टिप्पणियां। सूत्र ने बताया, “एक विस्तृत रिकॉर्ड ऑफ डिस्कशन तैयार होगा और मंजूरी के चरणों के साथ आगे बढ़ेगा। बाज़ार पर प्रभाव को देखते हुए SEBI की राय भी ली जाएगी।”
क्यों जरूरी है यह मेगा कंसॉलिडेशन?
सरकार का मानना है कि अगले वर्षों में भारत के उच्च विकास लक्ष्य को पूरा करने के लिए बैंकिंग प्रणाली को और मजबूत बनाना जरूरी है।
- बड़े और मजबूत सरकारी बैंक:
- बड़े पैमाने पर ऋण देने में सक्षम होंगे
- बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परियोजनाओं को फंड कर पाएंगे
- तेजी से बढ़ते निजी बैंकों से प्रभावी प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे
इसके साथ ही यह कदम—
- शाखा नेटवर्क का एकीकरण
- ओवरलैपिंग लागत में कमी
- पूंजी के बेहतर उपयोग, जैसे लाभ भी देगा।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस बार का विलय पिछले दौर की तुलना में आसान रहेगा क्योंकि “बड़े बैंक अब मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर गवर्नेंस और परिपक्व इंटीग्रेशन सिस्टम के साथ तैयार हैं।”
2017–2020 के बाद दूसरा सबसे बड़ा बैंकिंग पुनर्गठन
अगर यह योजना FY27 में लागू होती है, तो यह 2017–2020 के उस बड़े पुनर्गठन के बाद दूसरा मेगा मर्जर होगा, जिसमें सरकारी बैंकों की संख्या 27 से घटाकर 12 कर दी गई थी।





