ऑटो इंडस्ट्री पर संकट: मांग में गिरावट, टैरिफ और चिप की कमी से बढ़ी टेंशन

Mar 09, 2026 01:25 pm ISTDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
share

Auto Industry: ऑटोमोबाइल उद्योग पर एक तरफ टैरिफ का दबाव है, तो दूसरी ओर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन में लगातार आ रहे दिक्कतों ने उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। चीन, अमेरिका और यूरोप तीनों ही प्रमुख बाजारों में इस दौरान वाहनों की बिक्री में कमी देखी गई।

ऑटो इंडस्ट्री पर संकट: मांग में गिरावट, टैरिफ और चिप की कमी से बढ़ी टेंशन

दुनिया भर का ऑटोमोबाइल उद्योग इन दिनों कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक तरफ टैरिफ का दबाव है, तो दूसरी ओर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन में लगातार आ रहे दिक्कतों ने उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। एएनआई ने एलारा सिक्योरिटीज की एक हालिया रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि अब मेमोरी चिप्स की कमी एक नई चुनौती के रूप में सामने आई है, जिसका सीधा असर वाहनों के उत्पादन पर पड़ रहा है।

मंदी का असर

रिपोर्ट में बताया गया है कि इन चुनौतियों के अलावा, ग्लोबल लेवल पर ऑटोमोबाइल की मांग पर भी आर्थिक मंदी का गहरा असर देखने को मिल रहा है। पिछले साल हल्की बढ़त दर्ज करने के बावजूद, कैलेंडर वर्ष 2026 (CY26) की शुरुआत काफी सुस्त रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कैलेंडर वर्ष 2025 (CY25) में ग्लोबल पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में करीब 4.5 फीसदी की सालाना वृद्धि हुई थी। इनमें चीन सबसे आगे रहा, जहां 9.1 फीसदी की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अमेरिका और यूरोप में यह वृद्धि क्रमशः 1.9 फीसदी और 0.5 फीसदी के मामूली स्तर पर ही रही।

हालांकि, CY26 के शुरुआती आंकड़े एक अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में वैश्विक विकास दर में 1.2 प्रतिशत की गिरावट आई है। चीन, अमेरिका और यूरोप तीनों ही प्रमुख बाजारों में इस दौरान वाहनों की बिक्री में कमी देखी गई। चीन में बिक्री 6.8 प्रतिशत, अमेरिका में 0.8 प्रतिशत और यूरोप में 3.9 प्रतिशत तक लुढ़क गई।

इलेक्ट्रिक वाहनों पर सरकारी सब्सिडी खत्म

रिपोर्ट के अनुसार, चीन में यह गिरावट मुख्य रूप से सरकारी सब्सिडी खत्म होने के कारण आई है। इससे पहले इन्हीं सब्सिडी ने CY25 की चौथी तिमाही में जबरदस्त खरीदारी को बढ़ावा दिया था। सब्सिडी हटने का असर नए इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री पर भी पड़ा, जिसका हिस्सा दिसंबर 2025 के 52.3 फीसदी से घटकर जनवरी में 40.3 फीसदी पर आ गया।

अमेरिका भी परेशान

अमेरिका में बढ़ती कीमतों और लोगों की कम होती खरीदने की क्षमता ने वाहन बिक्री को प्रभावित किया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिलने वाला 7,500 डॉलर का संघीय कर क्रेडिट खत्म होने से भी मांग पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

एलारा सिक्योरिटीज ने कहा है कि कई वैश्विक वाहन निर्माता (ओईएम) अपने हालिया नतीजों और कॉन्फ्रेंस कॉल के आधार पर उम्मीद कर रहे हैं कि CY26 के दौरान मांग की स्थिति कमजोर ही बनी रहेगी। वाहन निर्माता अमेरिका और यूरोप में सपाट से लेकर मामूली बढ़त का अनुमान लगा रहे हैं, जबकि चीनी बाजार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। उदाहरण के लिए, मर्सिडीज-बेंज ने वैश्विक बिक्री में 2 से लेकर 2 प्रतिशत तक की गिरावट का अनुमान जताया है।

नुकसान में बढ़ोतरी

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उद्योग में इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े राइट-ऑफ में बढ़ोतरी हो रही है, क्योंकि कंपनियां बदलते बाजार के हिसाब से अपनी इलेक्ट्रिक वाहन रणनीतियों में फेरबदल कर रही हैं।

कमर्शियल वाहन के मोर्चे पर तस्वीर थोड़ी बेहतर

वहीं, कमर्शियल वाहन के मोर्चे पर तस्वीर थोड़ी बेहतर नजर आ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, वोल्वो ने क्लास 8 ट्रकों के लिए अपने मांग अनुमान को बढ़ाया है और अब उसे यूरोप में 2.9 प्रतिशत और अमेरिका में 2.7 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

जानें Hindi News, Business News, Budget 2026, बजट 2026 Live, Income Tax Live Updates की लेटेस्ट खबरें, शेयर बाजार का लेखा-जोखा, Share Market के लेटेस्ट अपडेट्स Investment Tips के बारे में सबकुछ।,