पर्सनल लोन की EMI से हैं परेशान? दूसरे लोन में जोड़ने से पहले जान लें ये बातें, वरना होगा नुकसान
मुख्य बातें
- अगर आप हर महीने दो या तीन पर्सनल लोन की ईएमआई भर रहे हैं और सोच रहे हैं कि इन्हें एक ही लोन में बदल दिया जाए? तो जल्दबाजी न करें
- एक ईएमआई और एक ही बैंक का विकल्प सुनने में आसान जरूर लगता है, लेकिन हर बार यह आपके लिए फायदे का सौदा नहीं होता
अगर आप हर महीने दो या तीन पर्सनल लोन की ईएमआई भर रहे हैं और सोच रहे हैं कि इन्हें एक ही लोन में बदल दिया जाए? तो जल्दबाजी न करें। एक ईएमआई और एक ही बैंक का विकल्प सुनने में आसान जरूर लगता है, लेकिन हर बार यह आपके लिए फायदे का सौदा नहीं होता। गलत फैसला लेने पर आपकी कुल ब्याज लागत बढ़ सकती है और कर्ज से निकलना और मुश्किल हो सकता है।
लोन कंसोलिडेशन से होता है फायदा?
आजकल कई बैंक और एनबीएफसी लोन कंसोलिडेशन की सुविधा दे रहे हैं। इसमें आपके सभी छोटे-छोटे पर्सनल लोन को मिलाकर एक नया लोन दिया जाता है। इससे हर महीने सिर्फ एक ईएमआई भरनी होती है और अलग-अलग तारीखें याद रखने की परेशानी खत्म हो जाती है।
हालांकि, सबसे पहले नए लोन की ब्याज दर जरूर देखें। अगर नया लोन पुराने लोन के मुकाबले काफी कम ब्याज पर मिल रहा है, तभी इसका फायदा हो सकता है। लेकिन अगर ब्याज में ज्यादा अंतर नहीं है, तो प्रोसेसिंग फीस, डॉक्यूमेंटेशन चार्ज और दूसरे शुल्क आपकी सेविंग खत्म कर सकते हैं।
कम ईएमआई से न करें फैसला
कम ईएमआई देखकर भी तुरंत फैसला नहीं लेना चाहिए। अक्सर बैंक ईएमआई कम करने के लिए लोन का पीरियड बढ़ा देते हैं। इससे हर महीने किस्त तो कम हो जाती है, लेकिन लंबे समय तक ब्याज देना पड़ता है। ऐसे में अंत में आपकी जेब से पहले से ज्यादा पैसा निकल सकते हैं।
यह भी सोचें कि आखिर आपको लोन मर्ज करने की जरूरत क्यों पड़ रही है। अगर सिर्फ अलग-अलग ईएमआई की तारीखें संभालना मुश्किल हो रहा है, तो कंसोलिडेशन मददगार हो सकता है। लेकिन अगर आपकी इनकम कम है और ईएमआई भरने में दिक्कत हो रही है, तो सिर्फ लोन मर्ज करने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी।
अगर पिछले कुछ सालों में आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर हुआ है, तो आपको नए लोन पर कम ब्याज मिल सकता है। वहीं अगर आपकी आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है, तो बैंक पहले से बेहतर शर्तें नहीं देगा। एक और जरूरी बात यह है कि पुराने लोन को समय से पहले बंद करने पर बैंक प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज ले सकता है। इसलिए नया लोन लेने से पहले इन सभी खर्चों का हिसाब जरूर लगा लें।
कई लोग लोन कंसोलिडेशन के बाद कम ईएमआई देखकर फिर से नया कर्ज लेना शुरू कर देते हैं। इससे कुछ समय बाद वे पहले से भी ज्यादा कर्ज के बोझ में फंस जाते हैं। अगर सही तरीके से योजना बनाकर लोन कंसोलिडेट किया जाए तो यह फायदेमंद हो सकता है। लेकिन फैसला सिर्फ कम ईएमआई देखकर न लें।


