क्या अडानी ग्रुप से विदेशी निवेशकों का भंग हो रहा मोह? हिस्सेदारी में बड़ी कटौती

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मुख्य बातें

  • Adani Group Stocks: सबसे बड़ी कटौती अडानी एंटरप्राइजेज में देखने को मिली, जहां GQG पार्टनर्स इमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी फंड की हिस्सेदारी मार्च तिमाही के 1.59 प्रतिशत से घटकर जून तिमाही में शून्य हो गई
  • दूसरी ओर घरेलू म्यूचुअल फंडों ने अडानी एंटरप्राइजेज में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है
Indian billionaire Gautam Adani

अडानी ग्रुप की कंपनियों में विदेशी निवेशक जीक्यूजी पार्टनर्स ने जून तिमाही के दौरान अपनी हिस्सेदारी में भारी कमी की है। सबसे बड़ी कटौती अडानी एंटरप्राइजेज में देखने को मिली, जहां GQG पार्टनर्स इमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी फंड की हिस्सेदारी मार्च तिमाही के 1.59 प्रतिशत से घटकर जून तिमाही में शून्य हो गई।

मनीकंट्रोल के मुताबिक यह स्पष्ट नहीं है कि फंड ने पूरी हिस्सेदारी बेच दी है या फिर उसकी हिस्सेदारी 1 प्रतिशत की सीमा से नीचे आ गई है, जिसके कारण वह शेयर होल्डिंग पैटर्न में दिखाई नहीं दे रही है। मार्च तिमाही के अंत में इस फंड के पास अडानी एंटरप्राइजेज में करीब 6,200 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी थी।

गोल्डमैन सैक्स ट्रस्ट ने भी घटाई भागीदारी

गोल्डमैन सैक्स ट्रस्ट जीक्यूजी पार्टनर्स इंटरनेशनल ऑपर्च्युनिटीज फंड ने भी अडानी एंटरप्राइजेज में अपनी हिस्सेदारी 2.31 प्रतिशत से घटाकर 2.06 प्रतिशत कर दी। 0.25 प्रतिशत की इस कटौती का मूल्य लगभग 932 करोड़ रुपये आंका गया है।

म्यूचुअल फंडों ने बढ़ाई हिस्सेदारी

विदेशी निवेशकों की निकासी के विपरीत, घरेलू म्यूचुअल फंडों ने अडानी एंटरप्राइजेज में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। म्यूचुअल फंडों की संयुक्त हिस्सेदारी पिछली तिमाही के 2.71 प्रतिशत से बढ़कर 5.4 प्रतिशत हो गई। इस बढ़ोतरी का मूल्य लगभग 10,692 करोड़ रुपये है। इस बढ़ोतरी में एसबीआई इक्विटी हाइब्रिड फंड और क्वांट स्मॉल कैप फंड का प्रमुख योगदान रहा।

अडानी ग्रीन एनर्जी में भी कटौती

जीक्यूजी पार्टनर्स ने अडानी ग्रीन एनर्जी में भी करीब 0.6 प्रतिशत की हिस्सेदारी घटाई है। जून तिमाही के औसत शेयर मूल्य के आधार पर इस कटौती का मूल्य लगभग 1,457 करोड़ रुपये है। हालांकि, अन्य विदेशी संस्थागत निवेशकों ने अडानी ग्रीन एनर्जी में अपनी संयुक्त हिस्सेदारी 0.74 प्रतिशत बढ़ाई, जिसका मूल्य करीब 1,814 करोड़ रुपये है।

शेयर होल्डिंग पैटर्न में खरीदारों की पहचान नहीं बताई गई है। घरेलू म्यूचुअल फंडों ने भी अडानी ग्रीन एनर्जी में अपनी हिस्सेदारी 3.22 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.49 प्रतिशत कर ली, जिसका मूल्य लगभग 644 करोड़ रुपये है।

अडानी पोर्ट्स में भी गिरावट

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन में जीक्यूजी पार्टनर्स ने अपनी हिस्सेदारी 2.26 प्रतिशत से घटाकर 1.93 प्रतिशत कर दी। 0.33 प्रतिशत की इस कटौती का मूल्य करीब 1,380 करोड़ रुपये है। अन्य विदेशी निवेशकों ने इस कंपनी में अपनी संयुक्त हिस्सेदारी 13.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.58 प्रतिशत कर ली। इस बढ़ोतरी का मूल्य लगभग 9,716 करोड़ रुपये है। शेयर होल्डिंग पैटर्न में खरीदारों की पहचान नहीं बताई गई है।

अडानी पावर और अडानी टोटल गैस में भी कमी

जीक्यूजी पार्टनर्स ने अडानी पावर में भी अपनी हिस्सेदारी 4.8 प्रतिशत से घटाकर 4.32 प्रतिशत कर दी। 0.48 प्रतिशत की इस कटौती का मूल्य लगभग 2,070 करोड़ रुपये है। वहीं अन्य विदेशी निवेशकों ने इस कंपनी में अपनी हिस्सेदारी मामूली रूप से 11.74 प्रतिशत से बढ़ाकर 11.76 प्रतिशत कर ली।

अडानी टोटल गैस में विदेशी निवेशकों की कुल हिस्सेदारी पिछली तिमाही के 6.82 प्रतिशत से घटकर 6.7 प्रतिशत हो गई। अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस ने जून तिमाही का शेयर होल्डिंग पैटर्न प्रकाशित होने के समय तक जारी नहीं किया था।

प्रमोटरों की हिस्सेदारी में भी बदलाव

इस तिमाही के दौरान प्रमोटरों की हिस्सेदारी में भी बदलाव देखने को मिला। अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन में प्रमोटरों की हिस्सेदारी 68.02 प्रतिशत से घटकर 66.03 प्रतिशत हो गई, जिसका मूल्य लगभग 8,302 करोड़ रुपये है। वहीं, अडानी एंटरप्राइजेज में प्रमोटरों की हिस्सेदारी 74.67 प्रतिशत से बढ़कर 74.84 प्रतिशत हो गई, जिसका मूल्य करीब 2,736 करोड़ रुपये है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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