नहीं चलेगी मनमानी: अस्पतालों को वेंटिलेटर का खर्च पहले से बताना होगा

Dec 22, 2025 05:27 am ISTDrigraj Madheshia मिंट
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डॉक्टर को यह बताना जरूरी होगा कि वेंटिलेटर क्यों लगाया जा रहा है, इससे क्या फायदा होगा, क्या जोखिम हैं और कितने समय तक इसकी जरूरत पड़ सकती है। साथ ही यह भी साफ-साफ बताना होगा कि आईसीयू और वेंटिलेटर का रोज का खर्च कितना आएगा।

नहीं चलेगी मनमानी: अस्पतालों को वेंटिलेटर का खर्च पहले से बताना होगा

सरकार ने निजी अस्पतालों के लिए ‘वेटिंलेटर बिलिंग नियमों’ का पालन करना अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत अब अस्पतालों को मरीज को वेंटीलेटर पर रखने से पहले परिजनों की लिखित अनुमति लेनी होगी। साथ ही उन्हें इसका संभावित खर्च पहले से बताना होगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, निजी अस्पतालों को ‘वेंटिलेटर बिलिंग नियमों’ का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा। अब कोई भी निजी अस्पताल मरीज को वेंटिलेटर पर रखने से पहले उसके परिवार से लिखित और स्पष्ट सहमति लेगा।

डॉक्टर को यह बताना जरूरी होगा कि वेंटिलेटर क्यों लगाया जा रहा है, इससे क्या फायदा होगा, क्या जोखिम हैं और कितने समय तक इसकी जरूरत पड़ सकती है। साथ ही यह भी साफ-साफ बताना होगा कि आईसीयू और वेंटिलेटर का रोज का खर्च कितना आएगा।

इसलिए उठाया कदम

वेंटिलेटर उपयोग में पारदर्शिता के लिए लागू नए दिशा-निर्देशों को हाल ही में स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय की वेबसाइट पर डाला गया है। मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद निजी अस्पतालों द्वारा वेंटिलेटर उपयोग में पारदर्शिता लाना है ताकि आम लोगों पर किसी तरह का वित्तीय संकट न खड़ा हो। साथ ही निजी स्वास्थ्य प्रणाली में भरोसा बहाल हो।

अस्पतालों को ये कदम उठाने होंगे

1. खर्च अब सबके सामने दिखाना होगा

नए नियमों के मुताबिक, निजी अस्पतालों को वेंटिलेटर से जुड़े सभी खर्च, जैसे मशीन चार्ज, आईसीयू चार्ज और इस्तेमाल होने वाली चीजें, सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होंगी। ये जानकारी बिलिंग काउंटर, आईसीयू के बाहर और अस्पताल की वेबसाइट पर दिखानी होगी, ताकि मरीज के परिवार को पहले से पता रहे कि कितना खर्च आने वाला है।

2. शिकायतों पर आसानी से सुनवाई

अब हर अस्पताल को समयबद्ध शिकायत निवारण व्यवस्था बनानी होगी। अगर मरीज के परिवार को इलाज या बिल को लेकर कोई आपत्ति है, तो वे औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज करा सकेंगे और अस्पताल को तय समय में उसका जवाब देना होगा।

3. उपयोग-आधारित बिलिंग

वेंटिलेटर के उपयोग का बिल केवल उस समय के लिए लिया जा सकेगा, जब वेंटिलेटर वास्तव में मरीज के लिए इस्तेमाल हो रहा हो। यदि वेटिंलेटर बंद है तो उसका खर्च बिल में नहीं जोड़ा जाएगा।

4. पूरी जानकारी देनी होगी

वेंटिलेटर पर रखने से पहले मरीज के परिजनों को उसके दैनिक खर्च और आईसीयू लागत की विस्तृत जानकारी दी जाएगी ताकि परिवार आर्थिक रूप से तैयार रह सके।

5. पूरी रिकॉर्ड रखना होगा

अस्पतालों को मरीजों के इलाज का परिणाम, मृत्यु दर और वेंटिलेटर सपोर्ट की अवधि तथा प्रकार का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रूप से रखना होगा, जिसे निगरानी एजेंसियों द्वारा जांच के लिए उपलब्ध कराया जा सके।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया:-लाइव हिन्दुस्तान में पिछले 6 साल से बिजनेस टीम का अहम हिस्सा हैं। दृगराज को पत्रकारिता में 21 वर्षों का लंबा अनुभव है। इन्होंने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी स्पेशल खबरों से खास पहचान बनाई है। शेयर मार्केट, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी पर विशेष पकड़। मैथ्स से ग्रेजुएट, मास कम्युनिकेशन और कंप्यूटर साइंस में पीजी डिप्लोमा। दृगराज, रिसर्च और एनॉलिस के जरिए मार्केट डेटा को आसान भाषा में 'कुछ अलग' पाठकों तक पहुंचाते हैं। लाइव हिन्दुस्तान से पहले साढ़े सात साल तक हिन्दुस्तान अखबार में बतौर सीनियर रिपोर्टर काम किया। इसके अलावा सहारा समय, दैनिक जागरण, न्यूज नेशन में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

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