मोदी सरकार की इस स्कीम में 223% का रिटर्न, ₹4,740 का निवेश बना ₹15,295
मुख्य बातें
- SGB: इस गणना में SGB पर मिलने वाला 2.5% सालाना ब्याज शामिल नहीं है
- यानी ब्याज को जोड़ दिया जाए तो निवेशक का कुल रिटर्न और अधिक होगा
- भारत सरकार ने नवंबर 2015 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना शुरू की थी
- इसका मकसद लोगों को सोने में निवेश का एक वैकल्पिक तरीका देना था

मोदी सरकार की स्कीम सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने SGB 2021-22 सीरीज-V के समय से पहले रिडेम्पशन की घोषणा कर दी है। यह बॉन्ड 17 अगस्त 2021 को जारी किए गए थे और अब पांच साल पूरे होने पर निवेशकों को इन्हें समय से पहले भुनाने का मौका दिया गया है।
इस सीरीज के लिए रिडेम्पशन कीमत ₹15,295 प्रति यूनिट तय की गई है। जिन निवेशकों ने इसे ₹4,740 प्रति यूनिट की इश्यू कीमत पर खरीदा था, उन्हें करीब 223% का रिटर्न मिला है। वहीं ₹4,790 की मूल इश्यू कीमत के आधार पर रिटर्न करीब 219.31% है।
RBI के नियमों के मुताबिक SGB को जारी होने की तारीख से पांच साल पूरा होने के बाद समय से पहले रिडीम किया जा सकता है। RBI ने 14 अगस्त को बताया कि इस सीरीज के लिए 17 अगस्त 2026 को समय से पहले रिडेम्पशन की तारीख तय की गई है।
₹15,295 की कीमत कैसे तय हुई?
रिडेम्पशन कीमत मनमाने तरीके से तय नहीं की गई है। इसे इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) की 12, 13 और 14 अगस्त 2026 के तीन कारोबारी दिनों की सोने की कीमतों के औसत के आधार पर तय किया गया है।
SGB में 2.5% ब्याज भी मिलता है
SGB की खासियत यह है कि इसमें सिर्फ सोने की कीमत बढ़ने का फायदा नहीं मिलता, बल्कि सरकार की ओर से 2.5% सालाना निश्चित ब्याज भी मिलता है। यह ब्याज हर छह महीने में निवेशक के बैंक खाते में जमा किया जाता है। इस तरह निवेशक को दो तरह का फायदा मिलता है, पहला सोने की कीमत बढ़ने से कैपिटल गेन और दूसरा 2.5% सालाना ब्याज।
टैक्स का क्या नियम है: SGB से मिलने वाला ब्याज आयकर के दायरे में आता है। हालांकि, व्यक्तिगत निवेशकों के लिए इन बॉन्ड के रिडेम्पशन पर होने वाले कैपिटल गेन को टैक्स से छूट प्राप्त है।
क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड?
भारत सरकार ने नवंबर 2015 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना शुरू की थी। इसका मकसद लोगों को भौतिक सोना खरीदने के बजाय सोने में निवेश का एक वैकल्पिक तरीका देना था।
SGB को RBI सरकार की ओर से जारी करता है। इनकी कीमत सोने के बाजार भाव से जुड़ी होती है। निवेशक को सोना अपने पास रखने, उसकी सुरक्षा करने या मेकिंग चार्ज जैसी परेशानियों से भी नहीं जूझना पड़ता।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी बात
₹4,740 की इश्यू कीमत से ₹15,295 का रिडेम्पशन मूल्य यानी करीब पांच साल में सोने की कीमत से मिलने वाला रिटर्न बेहद मजबूत रहा। इसके ऊपर निवेशकों को हर साल 2.5% ब्याज भी मिला। हालांकि, यह रिटर्न इस खास SGB सीरीज के पिछले प्रदर्शन को दिखाता है। भविष्य में सोने की कीमत इसी गति से बढ़ेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
SGB योजना क्यों बंद की गई?
सरकार ने अक्टूबर 2023 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की नई किस्तें जारी करना बंद कर दिया था। सरकार का मानना था कि इस योजना ने अपने ज्यादातर लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। साथ ही, इन बॉन्ड को जारी करने, संभालने और निवेशकों को इसकी सेवा देने का खर्च भी काफी बढ़ गया था।
एक और बड़ी वजह यह थी कि अब लोगों के पास सोने में निवेश करने के लिए गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड जैसे दूसरे विकल्प भी मौजूद हैं। ऐसे में सरकार को बार-बार SGB की नई किस्त जारी करने की जरूरत कम महसूस हुई।
हालांकि, पहले से खरीदे गए SGB बंद नहीं हुए हैं। जिन लोगों के पास पहले के सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड हैं, वे उन्हें उनकी तय अवधि पूरी होने तक रख सकते हैं। इसके अलावा, योजना के नियमों के मुताबिक कुछ मामलों में समय से पहले भी पैसा निकालने (प्रीमैच्योर रिडेम्पशन) का विकल्प मिलता है।


