इस मेटल ने बनाया नया रिकॉर्ड! ये सोना या चांदी नहीं…क्या अभी और बढ़ेगा भाव?
एल्युमिनियम की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार लंडन मेटल एक्सचेंज (London Metal Exchange-LME) पर यह 4 साल के उच्च स्तर पर है, जबकि भारत में इसकी कीमत करीब ₹375 प्रति किलो तक पहुंच गई है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

दुनिया भर के मेटल मार्केट में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा जिस मेटल की हो रही है, वह एल्युमिनियम है। हाल के दिनों में एल्युमिनियम की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार लंडन मेटल एक्सचेंज (London Metal Exchange-LME) पर यह 4 साल के उच्च स्तर पर है, जबकि भारत में इसकी कीमत करीब ₹375 प्रति किलो तक पहुंच गई है। सवाल यह है कि आखिर इस तेजी के पीछे कारण क्या है और आगे इसका रुख कैसा रह सकता है?
सबसे पहले बात करें मांग (Demand) की, तो कंस्ट्रक्शन, ऑटोमोबाइल और पैकेजिंग सेक्टर में एल्युमिनियम की खपत तेजी से बढ़ रही है। खासकर इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में इसकी जरूरत और भी ज्यादा हो गई है। इसके अलावा चीन, जो दुनिया का सबसे बड़ा एल्युमिनियम उपभोक्ता है, वहां इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स की वजह से मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
दूसरी ओर सप्लाई (Supply) की स्थिति उतनी मजबूत नहीं है। कई बड़े उत्पादक देशों में ऊर्जा लागत बढ़ने और सख्त पर्यावरण नियमों के कारण उत्पादन पर दबाव है। एल्युमिनियम बनाने में बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत होती है और जब ऊर्जा महंगी होती है, तो उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है। इससे सप्लाई सीमित हो जाती है और कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बनता है।
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव ने भी बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है। भले ही यह क्षेत्र एल्युमिनियम का बड़ा उत्पादक नहीं है, लेकिन यहां के हालात से ग्लोबल ट्रेड रूट और एनर्जी सप्लाई प्रभावित होती है। इससे निवेशकों में डर और अनिश्चितता बढ़ती है, जिसका असर कीमतों पर रिस्क प्रीमियम के रूप में दिखता है।
इसके अलावा LME और शंघाई जैसे बाजारों में एल्युमिनियम का स्टॉक लगातार घट रहा है। इसका मतलब है कि खपत ज्यादा और सप्लाई कम है, जिससे कीमतों में तेजी बनी हुई है। निवेशक भी अब एल्युमिनियम को एक सुरक्षित निवेश (hedge) के रूप में देख रहे हैं, खासकर तब जब महंगाई बढ़ रही हो।
आगे की बात करें तो 2026 में एल्युमिनियम की कीमतें मजबूत बनी रह सकती हैं। जब तक मांग ऊंची और सप्लाई सीमित रहेगी, तब तक कीमतों में गिरावट की संभावना कम है। हालांकि, अगर मिडिल ईस्ट में तनाव कम होता है या चीन की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ती है, तो कीमतों पर दबाव आ सकता है।
एल्युमिनियम इस समय परफेक्ट स्टॉर्म की स्थिति में है। मजबूत मांग, कमजोर सप्लाई और ग्लोबल अनिश्चितता—जो इसे रिकॉर्ड ऊंचाई तक ले गई है। आने वाले महीनों में यह धातु निवेशकों और इंडस्ट्री दोनों के लिए बेहद अहम बनी रहेगी।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते
हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में
ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के
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