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सावधान! बैंक या बीमा में नॉमिनी का मतलब 'मालिक' नहीं होता, जानें पूरी सच्चाई

सावधान! बैंक या बीमा में नॉमिनी का मतलब 'मालिक' नहीं होता, जानें पूरी सच्चाई

संक्षेप:

नॉमिनी vs उत्तराधिकारी: अब आप अपने बैंक खाते में चार लोगों तक को नॉमिनी नामित कर सकेंगे, लेकिन क्या नॉमिनी ही पैसे का मालिक होता है या उत्तराधिकारी? नॉमिनी और उत्तराधिकारी दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है। आइए समझें...

Fri, 24 Oct 2025 06:31 AMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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नॉमिनी vs उत्तराधिकारी: अब आप अपने बैंक खाते में चार लोगों तक को नॉमिनी नामित कर सकेंगे। साथ ही, आप यह भी तय कर सकेंगे कि आपकी जमा पूंजी या संपत्ति किसे मिले और उसका बंटवारा कैसे हो। यह नई व्यवस्था 1 नवंबर, 2025 से लागू होगी, लेकिन क्या नॉमिनी ही पैसे का मालिक होता है या उत्तराधिकारी? नॉमिनी और उत्तराधिकारी दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है। आइए समझें...

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अक्सर लोग नॉमिनी और उत्तराधिकारी को एक ही समझ बैठते हैं, जबकि इन दोनों के मतलब और अधिकार पूरी तरह अलग-अलग हैं।

  • नॉमिनी सिर्फ एक 'रखवाला' होता है। वह संपत्ति का असली मालिक नहीं बनता।
  • उत्तराधिकारी वह व्यक्ति होता है जो कानूनी तौर पर मृतक की संपत्ति पर हकदार होता है।

नॉमिनी को मिलता है सिर्फ 'ट्रस्टी' का दर्जा

कानूनी विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि चाहे बैंक खाते की बात हो या बीमा पॉलिसी की, नॉमिनी बनना मालिकाना हक नहीं देता। नॉमिनी का नामांकन सिर्फ लेन-देन की सुविधा के लिए होता है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि नॉमिनी ही उस पैसे का असली मालिक बन गया है। अगर खाताधारक या पॉलिसीधारक ने कोई वसीयत नहीं लिखी है, तो जमा राशि उसके सभी कानूनी वारिसों में बराबर बांट दी जाएगी।

कौन होता है कानूनी उत्तराधिकारी?

मृतक की संपत्ति उसके कानूनी उत्तराधिकारियों को हस्तांतरित की जाती है। उत्तराधिकार का निर्धारण व्यक्ति के धर्म के अनुसार अलग-अलग कानूनों से होता है…

  • हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के तहत पुत्र, पुत्री, विधवा पत्नी और मां क्लास-1 उत्तराधिकारी हैं। पिता, भाई-बहन आदि क्लास-2 में आते हैं।
  • मुस्लिम परिवारों में शरीयत कानून (1937) के अनुसार वारिस तय होते हैं।
  • ईसाई लोगों के लिए भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 लागू होता है, जिसके तहत पति, पत्नी, बेटे और बेटियां वारिस माने जाते हैं।

असली दावेदार कौन? एक उदाहरण से समझें

मान लीजिए, किसी व्यक्ति ने अपने बड़े बेटे को बैंक खाते में नॉमिनी बनाया है, लेकिन कोई वसीयत नहीं की है। उसकी मृत्यु के बाद:

  • नॉमिनी (बेटा) बैंक से पैसे निकाल तो सकता है।
  • लेकिन उस पैसे पर मृतक के सभी क्लास-1 उत्तराधिकारियों (पत्नी, दूसरे बच्चे, मां) का बराबर-बराबर हक बनता है।
  • नॉमिनी की भूमिका सिर्फ एक 'ट्रस्टी' की है, यानी उसे पूरी रकम को सभी कानूनी वारिसों के बीच बांटना होगा।
  • अगर कोई क्लास-1 उत्तराधिकारी नहीं है, तो रकम का बंटवारा क्लास-2 उत्तराधिकारियों के बीच होगा।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia
टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल मिलाकर 20 साल का अनुभव। एचटी डिजिटल से पहले दृगराज न्यूज नेशन, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, सहारा समय और वॉच न्यूज एमपी /सीजी में रिपोर्टिग और डेस्क पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। स्पेशल स्टोरीज,स्पोर्ट्स, पॉलिटिक्स, सिनेमा, स्पोर्ट्स के बाद अब बिजनेस की खबरें लिख रहे हैं। दृगराज, लाइव हिन्दुस्तान में बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर काम कर रहे हैं। और पढ़ें
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