
अमीर और गरीब के बीच की खाई को और गहरा करेगा AI
एआई का बढ़ता प्रभाव दुनिया में अमीर और गरीब के बीच की खाई को और गहरा कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार एआई के लाभ केवल अमीर देशों तक ही सीमित रहेंगे। दुनिया भर में लाखों लोग जिनके पास डिजिटल कौशल, बिजली और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, वे पीछे छूट जाएंगे।
एआई का बढ़ता प्रभाव दुनिया में अमीर और गरीब के बीच की खाई को और गहरा कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की नई रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार एआई के लाभ केवल अमीर देशों तक ही सीमित रहेंगे। दुनिया भर में लाखों लोग जिनके पास डिजिटल कौशल, बिजली और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, वे पीछे छूट जाएंगे।

औद्यौगिक क्रांति से तुलना
संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में एआई की तुलना औद्यौगिक क्रांति के दौर से की गई है। यह दावा किया गया है कि औद्यौगिक क्रांति के दौरान जिस तरह से पश्चिमी देश तेजी से आगे बढ़ गए थे, और बाकी देश पीछे रह गए थे। वैसा ही एआई के दौर में भी होगा। रिपोर्ट यह भी कहती है कि गरीब और विस्थापित लोग अदृश्य हो सकते हैं, जिससे एआई सिस्टम उनकी जरूरतों को ध्यान में नहीं रखेगा।
एआई का ध्यान उत्पादकता पर
संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि कंपनियां और दूसरे संस्थान एआई का इस्तेमाल कैसे करेंगे, यह सवाल चिंता का विषय है। एआई पर ज्यादातर ध्यान उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा और ग्रोथ पर है। सवाल यह है कि इसका इंसानी जिंदगी पर क्या असर होगा।
रिपोर्ट के अनुसार एआई नए उद्योग शुरू करने की क्षमता है। यह तकनीक खेती के लिए बेहतर सलाह, एक्स-रे का तेजी से विश्लेषण, जल्द मेडिकल निदान, और मौसम पूर्वानुमान जैसी चीजों में ग्रामीण समुदायों और आपदा वाले इलाकों में मदद कर सकती है।
अमीर देशों में चिंताएं भी
एआई डाटा सेंटर बहुत ज्यादा बिजली और पानी खाते हैं। इसने अमेरिका जैसे अमीर देशों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए जीवाश्म ईंधन का ज्यादा इस्तेमाल ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के प्रयासों को धीमा कर सकता है। इसके अलावा एआई से साइबर हमले, डीपफेक और निगरानी जैसे खतरे पैदा होते हैं जो गोपनीयता के अधिकारों का उल्लंघन कर सकते हैं।





