AI ने 8 महीने में खाई 1.65 लाख नौकरियां, HCL के Ex. CEO ने कहा, 'इंसान पहले...'

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

मुख्य बातें

  • AI Layoffs: 55 से ज्यादा CEO AI को छंटनी का कारण बता चुके हैं
  • AI के नाम पर कर्मचारियों की Jobs छीनने वाली कंपनियों में केवल टेक कंपनियां ही नहीं हैं
  • बैंकिंग, कंसल्टिंग, लॉ, लॉजिस्टिक्स, रिटेल, मैन्युफैक्चरिंग और मीडिया जैसे क्षेत्रों में भी इसका असर दिख रहा है
AI Layoffs
55 से ज्यादा CEO AI को छंटनी का कारण बता चुके हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन का बड़ा असर अब कंपनियों के कारोबार के साथ-साथ नौकरियों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। रिपोर्टों के आधार पर 2026 के पहले 8 महीनों में ही 1.65 लाख से ज्यादा नौकरियां AI से जुड़े कारणों के चलते प्रभावित हुई हैं। यह संख्या 2025 के लेऑफ के पूरे साल के आंकड़े से करीब 65% अधिक बताई गई है।

‘ह्यूमन्स फर्स्ट, मशीन्स सेकंड’

एआई के चलते लगातार जा रही नौकरियों पर संपर्क फाउंडेशन के संस्थापक और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के पूर्व सीईओ विनीत नायर ने छंटनी की खुलकर आलोचना की है। उनका कहना है कि हर क्रांति और हर नई खोज इंसानों की अगुवाई में ही हुई है, इसलिए लोगों को समस्या या फेंकने की चीज नहीं माना जाना चाहिए। यह बातें उन्होंने अपनी किताब ‘ह्यूमन्स फर्स्ट, मशीन्स सेकंड’ के बारे में बातचीत के दौरान कहीं, जिसकी खबर एनडीटीवी प्रॉफिट ने दी।

उन्होंने एचसीएल के अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि असली जादू तब होता है, जब संगठन को उल्टा कर दिया जाए यानी कर्मचारी ही अपने बॉस का मूल्यांकन करें। उनके अनुसार, यह तरीका किसी AI या वित्तीय विश्लेषक से अधिक कारगर है। इंसानों को हर दिन माउंट एवरेस्ट चढ़ने की तरह प्रेरित होने की जरूरत होती है, न कि केवल आंकड़ों में बांधे जाने की।

‘AI कैलकुलेटर और इंटरनेट जैसा आम हो जाएगा’

फिलैंथ्रोपिस्ट नायर ने यह भी कहा कि आने वाले समय में AI उतना ही आम हो जाएगा जितना आज कैलकुलेटर या इंटरनेट है। यह अपने आप में कोई बड़ा अंतर पैदा करने वाला औजार नहीं रहेगा। असली फायदा उन्हीं लोगों को मिलेगा, जो AI का इस्तेमाल उन समस्याओं को सुलझाने के लिए करेंगे जो अब तक हल नहीं हो पाई थीं। उनके अनुसार, ज्ञान तो अब सबके लिए आसानी से उपलब्ध हो गया है, इसलिए जरूरत है कि ध्यान ज्ञान को बांटने से हटकर उसे लागू करने पर दिया जाए।

दो साल में 8 गुना से ज्यादा बढ़ा AI का असर

programs.com के मुताबिक AI से जुड़ी छंटनी का आंकड़ा बेहद तेजी से बढ़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2024 में सात बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में करीब 18 हजार नौकरियां AI से जुड़े बदलावों के कारण प्रभावित हुई थीं। 2025 में यह संख्या बढ़कर 1 लाख से ज्यादा हो गई। अब 2026 के सिर्फ 8 महीनों में ही 1.65 लाख से अधिक पदों पर असर पड़ चुका है।

मेटा, अमेजन, डेल से लेकर टीसीएस तक में AI ने छीनी नौकरियां

रिपोर्ट के अनुसार, 55 से ज्यादा CEO AI को छंटनी का कारण बता चुके हैं। AI के नाम पर कर्मचारियों की संख्या घटाने वाली कंपनियों में केवल टेक्नोलॉजी कंपनियां ही नहीं हैं। बैंकिंग, कंसल्टिंग, लॉ, लॉजिस्टिक्स, रिटेल, मैन्युफैक्चरिंग और मीडिया जैसे क्षेत्रों में भी इसका असर दिख रहा है।

2025 के बाद से कम से कम 11 कंपनियों ने 10 हजार या उससे अधिक कर्मचारियों को प्रभावित करने वाली AI-संबंधित छंटनी की घोषणा की है। इनमें एक्सेंचर, अमेजन, सिटिग्रुप, डेल, HSBC, इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, ओरेकल, TCS और UPS जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

सिर्फ टेक कंपनियों तक सीमित नहीं है खतरा

AI का असर उन नौकरियों पर भी बढ़ रहा है जिन्हें कुछ समय पहले तक टेक्नोलॉजी से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं माना जाता था। Baker McKenzie जैसे लॉ फर्म में सपोर्ट स्टाफ, रिसर्च और सेक्रेटेरियल भूमिकाओं पर असर पड़ा। Lufthansa ने 2030 तक हजारों प्रशासनिक पद खत्म करने की योजना बताई है।

वहीं Nike ने सप्लाई चेन और डिजिटल ऑपरेशन में ऑटोमेशन का इस्तेमाल बढ़ाया है। लॉजिस्टिक्स कंपनी C.H. Robinson ने भी AI आधारित प्राइसिंग, शेड्यूलिंग और शिपमेंट ट्रैकिंग टूल्स के इस्तेमाल के बाद कर्मचारियों की संख्या घटाई।

AI नई नौकरियां भी पैदा कर रहा है, लेकिन कौशल बदल रहा है

कंपनियों के फैसलों से एक महत्वपूर्ण बात यह भी सामने आती है कि AI केवल नौकरियां खत्म नहीं कर रहा, बल्कि नौकरी की प्रकृति बदल रहा है। कई कंपनियां प्रभावित कर्मचारियों को AI, डेटा एनालिटिक्स और दूसरी नई तकनीकी भूमिकाओं के लिए प्रशिक्षण देने की कोशिश कर रही हैं।

बड़ी चुनौती उन कर्मचारियों के सामने है, जिनके मौजूदा कौशल को कंपनियां AI के दौर में कम उपयोगी मान रही हैं। यही वजह है कि कई कंपनियां अब कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के बजाय AI एक्सपर्ट कर्मचारियों की भर्ती और मौजूदा कर्मचारियों की री-स्किलिंग पर ज्यादा जोर दे रही हैं।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

बिजनेस न्यूज, आज के पेट्रोल और डीजल के दाम, शेयर बाजार की ताज़ा खबरें, आईटीआर न्यूज से जुड़ी जरूरी जानकारी पढ़ने के लिए Live Hindustan App अभी डाउनलोड करें।
Hindi Newsबिज़नेस न्यूज़AI ने 8 महीने में खाई 1.65 लाख नौकरियां, HCL के Ex. CEO ने कहा, 'इंसान पहले...'