एग्रीकल्चर लैंड बेचने पर टैक्स छूट हमेशा नहीं मिलती, यहां देना होता है Tax
मुख्य बातें
- क्या आप एग्रीकल्चर लैंड बेचने पर टैक्स छूट के नियमों से अनजान हैं? जानें ग्रामीण और शहरी एग्रीकल्चर लैंड के बीच के फर्क और कैसे कर सकते हैं टैक्स प्लानिंग

क्या आप भी मानते हैं कि एग्रीकल्चर लैंड बेचने पर कभी टैक्स नहीं लगता? अगर हां, तो पहले इनकम टैक्स के नियम जान लेना जरूरी है। एग्रीकल्चर लैंड बेचने पर टैक्स लगेगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि जमीन ग्रामीण (रूरल) है या शहरी (अर्बन)। दोनों के लिए टैक्स के अलग-अलग नियम हैं। ऐसे में जमीन बेचने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपकी जमीन किस केटेगरी में आती है और किन मामलों में टैक्स छूट का फायदा मिल सकता है।
ग्रामीण एग्रीकल्चर लैंड पर नहीं लगता टैक्स
इनकम टैक्स अधिनियम 1961 की सेक्शन 2(14)(iii) के अनुसार ग्रामीण एग्रीकल्चर लैंड को कैपिटल एसेट नहीं माना जाता। इसलिए ऐसी जमीन बेचने से होने वाले मुनाफे पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता। यानी अगर आपकी जमीन रूरल केटेगरी में आती है, तो उसकी सेल पर आमतौर पर इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता।
वहीं, शहरी एग्रीकल्चर लैंड को कैपिटल एसेट माना जाता है। इसलिए इसकी सेल पर कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है। टैक्स इस बात पर भी निर्भर करता है कि जमीन कितने समय तक आपके पास रही। अगर जमीन दो साल या उससे कम समय तक रखी गई और फिर बेची गई, तो उससे होने वाला फायदा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाएगा। इस पर टैक्स आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार लगेगा।
अगर जमीन दो साल से अधिक समय तक आपके पास रही और उसके बाद बेची गई, तो लाभ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाएगा। इस पर सामान्य तौर पर 20 प्रतिशत टैक्स इंडेक्सेशन प्रॉफिट के साथ देना होता है। वहीं, इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स चाहें तो 12.5 प्रतिशत टैक्स बिना इंडेक्सेशन प्रॉफिट का विकल्प भी चुन सकते हैं।
अब सवाल यह है कि किसी एग्रीकल्चर लैंड को ग्रामीण या शहरी कैसे माना जाता है। इसके लिए जमीन की लोकेशन और नगर पालिका से उसकी दूरी देखी जाती है। यदि जमीन ऐसी नगर पालिका के एरिया में है जिसकी आबादी 10 हजार से कम है, तो उसे ग्रामीण एग्रीकल्चर लैंड माना जा सकता है।
किसे माना जाता है रूरल केटेगरी में आने वाली एग्रीकल्चर लैंड
यदि जमीन नगर पालिका सीमा से बाहर है, तो आबादी के आधार पर उसकी दूरी भी अहम होती है। 10 हजार से अधिक आबादी वाली नगर पालिका से दो किलोमीटर से ज्यादा, एक लाख से अधिक आबादी वाली नगर पालिका से छह किलोमीटर से ज्यादा और 10 लाख से अधिक आबादी वाली नगर पालिका से आठ किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर स्थित एग्रीकल्चर लैंड को ग्रामीण केटेगरी में रखा जाता है। इन शर्तों के पूरा नहीं करने वाली एग्रीकल्चर लैंड शहरी मानी जाएगी।
ITR दाखिल करते समय भी दोनों तरह की एग्रीकल्चर लैंड के लिए अलग नियम हैं। ग्रामीण एग्रीकल्चर लैंड की सेल से होने वाली इनकम पर टैक्स नहीं लगता, लेकिन इसे शेड्यूल EI (Exempt Income) में दिखाना जरूरी होता है। दूसरी ओर शहरी एग्रीकल्चर लैंड की सेल से होने वाले कैपिटल गेन को शेड्यूल CG (कैपिटल गेन) में रिपोर्ट करना होता है।
अगर आपने शहरी एग्रीकल्चर लैंड बेची है, तो इनकम टैक्स की सेक्शन 54B के तहत टैक्स बचाने का मौका भी मिलता है। इसके लिए जरूरी है कि बेची गई जमीन का इस्तेमाल सेल से पहले लगातार दो सालों तक मालिक या उसके माता-पिता ने एग्रीकल्चर काम के लिए किया हो। साथ ही सेल से हुए कैपिटल गेन को दो साल के अंदर दूसरी एग्रीकल्चर लैंड खरीदने में निवेश करना होगा।
यदि तुरंत नई एग्रीकल्चर लैंड खरीदना संभव नहीं है, तो टैक्सपेयर ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख से पहले कैपिटल गेन्स अकाउंट स्कीम (CGAS) में अमाउंट जमा कर सेक्शन 54B का फायदा ले सकते हैं। ऐसे में फ्यूचर में नई एग्रीकल्चर लैंड खरीदने पर टैक्स छूट क्लेम किया जा सकता है।


