अडानी का डिफेंस सेक्टर में बड़ा दांव: फ्लाइट सिमुलेशन कंपनी में खरीद ली पूरी हिस्सेदारी
मुख्य बातें
- Adani Group: इस अधिग्रहण का असर FSSPL की सहायक कंपनी, फ्लाइट सिमुलेशन तकनीक केंद्र प्राइवेट लिमिटेड (FSTC) पर भी पड़ेगा
- इस सौदे के बाद ADSTL का FSTC में प्रभावी स्वामित्व 72.8 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा

अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (ADSTL) ने फ्लाइट सिमुलेशन सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (FSSPL) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस शेयर खरीद समझौते के तहत ADSTL FSSPL के मौजूदा शेयरधारकों से बची हुई 44.6 प्रतिशत की हिस्सेदारी खरीदेगी। फिलहाल ADSTL के पास FSSPL में 55.4 प्रतिशत की हिस्सेदारी है और इस सौदे के पूरा होने के बाद यह बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगी, जिससे FSSPL ADSTL की पूर्ण रूप से स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बन जाएगी।
FSTC भी हुई अडानी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी
इस अधिग्रहण का असर FSSPL की सहायक कंपनी, फ्लाइट सिमुलेशन तकनीक केंद्र प्राइवेट लिमिटेड (FSTC) पर भी पड़ेगा। इस सौदे के बाद ADSTL का FSTC में प्रभावी स्वामित्व 72.8 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा, जिसके बाद FSTC भी अडानी ग्रुप की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बन जाएगी। यह कदम अडानी ग्रुप के रक्षा क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, खासकर उड़ान सिमुलेशन और संबंधित तकनीकों के क्षेत्र में।
क्या निवेशकों पसंद नहीं आई यह डील?
कंपनी ने बताया कि उसे इस लेन-देन की जानकारी 16 जुलाई, 2026 को दोपहर 12:28 बजे प्राप्त हुई थी। इसके बाद कंपनी ने SEBI के लिस्टिंग नियमों के तहत इस विकास की जानकारी शेयर बाजारों को दे दी है, जिससे निवेशकों को इस महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। हालांकि, इस खबर के बाद शेयर बाजार में कंपनी के शेयर में हल्की गिरावट देखने को मिली।
15,000 करोड़ के QIP का ऐलान
इससे पहले, 7 जुलाई को कंपनी ने शेयर बाजारों को सूचित किया था कि उसने अपना 15,000 करोड़ रुपये का क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। कंपनी के बोर्ड ने पात्र योग्य संस्थागत खरीदारों को 5.20 करोड़ इक्विटी शेयर आवंटित करने को मंजूरी दी, जिनमें से प्रत्येक की फेस वैल्यू 1 रुपये है। इस QIP के तहत शेयरों की कीमत 2,883 रुपये प्रति शेयर निर्धारित की गई थी। यह मंगलवार के बंद भाव की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत की छूट दर्शाती है।
मुनाफा घाटे में बदला, लेकिन राजस्व में उछाल
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो Q4FY26 में अडानी एंटरप्राइजेज को 220.7 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में कंपनी को 3,844.9 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।
हालांकि, कंपनी का राजस्व साल-दर-साल 20.3 प्रतिशत बढ़कर 26,965.9 करोड़ रुपये से 32,439.3 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, EBITDA में मामूली 0.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 3,731 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 3,710 करोड़ रुपये था। EBITDA मार्जिन, हालांकि, पिछले साल के 13.8 प्रतिशत से घटकर 11.5 प्रतिशत रह गया है, जो बढ़ती लागतों का संकेत देता है।
शेयर बाजार में कैसा रहा अडानी एंटरप्राइजेज का प्रदर्शन?
बाजार में कंपनी के शेयर की बात करें तो गुरुवार, 16 जुलाई को NSE पर अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4.60 रुपये घटकर 3,146 रुपये पर बंद हुए। इससे स्पष्ट है कि बाजार ने इन ताजा घटनाक्रमों पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


