
भारी कर्ज में अडानी की यह कंपनी, अब मुनाफा भी घटा, ₹65 पर आ गया शेयर
तिमाही का सबसे चिंताजनक पहलू रहा कंपनी पर ब्याज खर्च का भारी बोझ। Q2 में ₹52.90 करोड़ का ब्याज खर्च कंपनी के ऑपरेटिंग प्रॉफिट का 213% रहा, जिससे मुनाफे की कोई गुंजाइश नहीं बची।
Sanghi Industries Q2 Result: अडानी समूह की सीमेंट क्षेत्र की दिग्गज कंपनी सांघी इंडस्ट्रीज ने वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (Q2 FY26) के नतीजे जारी किए हैं। दूसरी तिमाही में कंपनी की रेवेन्यू तो बढ़ा है लेकिन प्रॉफिट के मामले में कंपनी ने एक बार फिर निराश किया है। बता दें कि कंपनी की नेट सेल्स ₹284.93 करोड़ रही, जो तिमाही आधार पर 16.12% और सालाना आधार पर 88.07% की तेज बढ़ोतरी को दिखाती है। यह उछाल सिमेंट की बेहतर मांग और गुजरात स्थित प्लांट में क्षमता उपयोग में सुधार का नतीजा माना जा रहा है। बढ़े हुए राजस्व के बावजूद ऑपरेटिंग प्रॉफिट (अन्य आय को छोड़कर) मात्र ₹24.87 करोड़ रहा, जिससे ऑपरेटिंग मार्जिन 8.73% पर सिमट गया। यह पिछली तिमाही के 10.36% से 163 बेसिस पॉइंट की गिरावट है। इसका मतलब है कि लागत दबाव अब भी कंपनी की कमाई को प्रभावित कर रहा है। कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन बेहद अस्थिर रहा है। बता दें कि कल कंपनी के शेयर फोकस में रह सकते हैं। बीते शुक्रवार को इसकी कीमत 65.24 रुपये थी। शेयर में मामूली तेजी दर्ज की गई थी।

ब्याज खर्च ने निगल लिया सारा ऑपरेटिंग प्रॉफिट
तिमाही का सबसे चिंताजनक पहलू रहा कंपनी पर ब्याज खर्च का भारी बोझ। Q2 में ₹52.90 करोड़ का ब्याज खर्च कंपनी के ऑपरेटिंग प्रॉफिट का 213% रहा, जिससे मुनाफे की कोई गुंजाइश नहीं बची। इसके अलावा ₹92.89 करोड़ का मूल्यह्रास जोड़ने पर कुल खर्च ₹145.79 करोड़ हो जाता है, जो ऑपरेटिंग प्रॉफिट से छह गुना ज्यादा है। इस स्थिति में कंपनी के लिए मौजूदा स्तर पर लाभ अर्जित करना लगभग असंभव है।
छह महीने का घाटा ₹191.95 करोड़
वित्त वर्ष की पहली छमाही (H1 FY26) में कंपनी की कुल बिक्री ₹530.31 करोड़ रही, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 41.61% अधिक है। इसके बावजूद, कंपनी को ₹191.95 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ। यह दर्शाता है कि वित्तीय दबाव लगातार बना हुआ है। पिछले वित्त वर्ष (FY25) में कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो -₹248.55 करोड़ रहा, यानी कंपनी के नुकसान सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि वास्तविक नकद बहाव को भी प्रभावित कर रहे हैं।
भारी कर्ज बना सबसे बड़ा संकट
कंपनी की सबसे बड़ी चुनौती उसकी बैलेंस शीट की संरचना है। मार्च 2025 तक कंपनी पर ₹2,485 करोड़ का दीर्घकालिक कर्ज था, जो पिछले साल के ₹2,081.30 करोड़ से लगभग 19.4% अधिक है। इसका परिणाम है 4.06 का डेब्ट-टू-इक्विटी अनुपात, जो सिमेंट क्षेत्र की सबसे अधिक लीवरेज्ड कंपनियों में से एक बनाता है। यह कर्ज का जाल कंपनी की लाभप्रदता को जकड़े हुए है। कर्ज पर ब्याज चुकाने के लिए कंपनी को जितना मुनाफा कमाना चाहिए, उतनी कमाई फिलहाल हो नहीं रही।
निवेशकों का भरोसा घटा
कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) औसतन 1.31% और हालिया अवधि में -65.93% रहा, जो बताता है कि कंपनी शेयरधारकों के मूल्य को तेजी से घटा रही है। वहीं रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) -4.89% पर है, जो पूंजी के अप्रभावी उपयोग को दर्शाता है। ₹1,684 करोड़ के मार्केट कैप वाली यह कंपनी गुजरात के कच्छ जिले के सांघीपुरम में दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-स्ट्रीम सिमेंट प्लांट का संचालन करती है। इसके बावजूद, कंपनी लगातार सात तिमाहियों से घाटे में चल रही है।





