अडानी की झोली में आई 2 रुपये के शेयर वाली कंपनी, NCLT की हरी झंडी
यह पूरा मामला ICICI बैंक द्वारा दायर की गई दिवालिया याचिका से जुड़ा है। साल 2019 में कंपनी पर करीब ₹6,000 करोड़ का कर्ज था, जिसमें अकेले ICICI बैंक का बकाया लगभग ₹854 करोड़ था। अब अडानी समूह के अडानी इंफ्रा ने इस कंपनी को खरीदा है।
कभी देश की दिग्गज इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में गिनी जाने वाली पुंज लॉयड (Punj Lloyd) के अधिग्रहण को लेकर बड़ी खबर आई है। दरअसल, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने कंपनी को लिक्विडेशन के दौरान गोइंग कंसर्न के रूप में बेचने को मंजूरी दे दी है। NCLT ने साफ किया है कि कंपनी को मौजूदा हालत में ही लिया जाएगा। पुरानी देनदारियां, कानूनी विवाद और दावे अपने-अपने कानूनी प्रावधानों के तहत निपटाए जाएंगे।
क्या है मामला?
दरअसल, 12 फरवरी को दिल्ली के नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की प्रिंसिपल बेंच ने आदेश पारित करते हुए कहा कि पुंज लॉयड का अधिग्रहण अडानी इंफ्रा (इंडिया) लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। यह पूरा मामला ICICI बैंक द्वारा दायर की गई दिवालिया याचिका से जुड़ा है। पहले कंपनी के खिलाफ कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू हुआ था लेकिन कोई समाधान योजना सफल नहीं हो सकी। इसके बाद लिक्विडेशन का आदेश दिया गया। यह आदेश जून 2022 में आया था। लिक्विडेशन के दौरान कई ई-ऑक्शन हुए। इसके बाद अडानी समूह की कंपनी अडानी इंफ्रास्ट्रक्चर की बोली को मंजूरी मिली।
शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी
बता दें कि पुंज लॉयड शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी है। इस कंपनी के शेयर एक समय 600 रुपये के पार कारोबार करते थे लेकिन हालात इतने बिगड़े कि कीमत 2 रुपये के आसपास आ गई। अब शेयर की ट्रेडिंग ठप पड़ी हुई है। कंपनी के मुताबिक IBC के तहत कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस या लिक्विडेशन में जाने पर इक्विटी ट्रेडिंग निलंबित रहती है। इसी वजह से पंज लॉयड के शेयर फिलहाल एनएसई और बीएसई पर सस्पेंड हैं। कंपनी ने यह भी बताया कि अडानी इंफ्रा को डीलिस्टिंग की मंजूरी मिल गई है। इसका मतलब है कि शेयरधारकों को भविष्य में लिक्विडेशन मूल्य के आधार पर भुगतान किया जा सकता है।
कंपनी के बारे में
पुंज लॉयड लिमिटेड के शेयरहोल्डिंग पैटर्न की बात करें तो दिसंबर 2025 तिमाही के अंत तक प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 13.93% थी। वहीं, रिटेल निवेशकों तथा अन्य श्रेणी का हिस्सा 83.55% तक है। अन्य घरेलू संस्थानों की हिस्सेदारी 2.30% है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) का हिस्सा बहुत कम 0.23% है। एक दौर में कंपनी का कारोबार इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी, डिफेंस और हाईवे प्रोजेक्ट्स में फैला हुआ था लेकिन भारी कर्ज इसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गया। साल 2019 में कंपनी पर करीब ₹6,000 करोड़ का कर्ज था, जिसमें अकेले ICICI बैंक का बकाया लगभग ₹854 करोड़ था। कोरोना के बाद हालात बिगड़ गए और कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में आ गई। अब अडानी समूह ने इसे खरीदा है।





