8th Pay Commission: किसे और कैसे मिल सकता है ₹6.72 लाख का अतिरिक्त फायदा

By Drigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान

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8वां वेतन आयोग अपडेट्स

8th Pay Commission: कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स संघों का प्रस्ताव है कि 8वें वेतन आयोग के तहत कम्यूटेड पेंशन की बहाली अवधि 15 साल से घटाकर 11 साल कर दी जाए। इसका मतलब है कि पेंशनर्स को घटी हुई पेंशन सिर्फ 11 साल ही मिलेगी, और उसके बाद पूरी पेंशन बहाल हो जाएगी। इससे लंबी अवधि में बड़ा आर्थिक लाभ हो सकता है। उन पेंशनर्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो कम्यूटेशन का विकल्प चुनते हैं या पहले चुन चुके हैं। जिनकी मूल पेंशन जितनी अधिक होगी, उनका फायदा उतना ही बड़ा होगा।

कम्यूटेशन क्या है

रिटायरमेंट के समय सरकारी कर्मचारी अपनी मूल पेंशन का अधिकतम 40% हिस्सा एकमुश्त राशि में बदल सकते हैं। इसे ही कम्यूटेशन कहते हैं। इसके बदले में मासिक पेंशन से वह हिस्सा कुछ सालों के लिए काट लिया जाता है। अभी यह कटौती 15 साल तक चलती है, उसके बाद कम्यूटेड हिस्सा पूरी तरह बहाल हो जाता है।

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11 साल का कम्यूटेशन क्या बदलेगा?

मान लीजिए किसी पेंशनर्स की मूल पेंशन ₹35,000 प्रति माह है।

40% कम्यूटेशन = ₹14,000 प्रति माह।

15 साल में कुल कटौती = ₹14,000 × 180 = ₹25,20,000

11 साल में कुल कटौती = ₹14,000 × 132 = ₹18,48,000

अंतर = ₹25,20,000 – ₹18,48,000 = ₹6,72,000

यानी 4 साल की कटौती से बचत होगी, जो ₹6.72 लाख बैठती है।

कर्मचारी संगठन कितनी बहाली अवधि चाह रहे हैं?

अधिकांश संगठनों ने 11 साल की बहाली अवधि की मांग की है। NC-JCM, AIDEF, FNPO, भारत पेंशनर्स समाज (BPS) और ऑल पेंशनर्स एसोसिएशन ने 11 साल की सिफारिश की है। AINPSEF 10 साल चाहता है, जबकि IRTSA ने 12 साल का प्रस्ताव दिया है। उनकी सिफारिशें इस तर्क पर आधारित हैं कि मौजूदा ढांचे की शुरुआत के बाद से ब्याज दरों, जीवन प्रत्याशा, मृत्यु दर और जोखिम कारकों में काफी बदलाव आया है।

पेंशन कम्यूटेशन कैलकुलेटर: एक पेंशनर्स को एडवांस कितनी राशि मिलती है?

NC-JCM के अनुमान में 61 वर्ष के पेंशनर्स पर विचार किया गया है, जो 100 रुपये प्रति माह (यानी 1,200 रुपये सालाना) का कम्यूटेशन करता है। 8.194 के कम्यूटेशन फैक्टर का उपयोग करते हुए, पेंशनर्स को 9,833 रुपये की एकमुश्त राशि मिलती है। हालांकि, मासिक पेंशन में कटौती रिटायरमेंट के बाद भी जारी रहती है। 1,200 रुपये सालाना के हिसाब से, 10 वर्षों में कुल कटौती 12,000 रुपये और 15 वर्षों में 18,000 रुपये हो जाती है।

8वां वेतन आयोग पेंशन बहाली: NC-JCM 11 साल को उचित क्यों मानता है?

NC-JCM का तर्क है कि उसके उदाहरण के तहत, कम्यूटेड मूल्य पेंशन कटौती के माध्यम से लगभग 10 वर्षों में वसूल हो जाता है। इसके बाद भी कटौती जारी रखना पेंशनर्स से अतिरिक्त वसूली है। इस गणना के आधार पर, संगठन ने सिफारिश की है कि कम्यूटेड पेंशन को मौजूदा 15 साल की अवधि के बजाय 11 साल के बाद बहाल किया जाना चाहिए।

पेंशन कम्यूटेशन नियम: बीपीएस 15-वर्षीय समीक्षा क्यों चाहता है?

भारत पेंशनर्स समाज (BPS) का कहना है कि 15-वर्षीय बहाली ढांचा 1986 में तत्कालीन स्थितियों के आधार पर पेश किया गया था। उसकी तुलना से पता चलता है कि सांकेतिक ब्याज दरें 1986 में 12% से गिरकर 2023 में 7.10% हो गईं, जबकि औसत जीवन प्रत्याशा 57.7 वर्ष से बढ़कर 70.42 वर्ष हो गई। बीपीएस का कहना है कि ये बदलाव मौजूदा बहाली अवधि के पीछे की मान्यताओं की समीक्षा को उचित ठहराते हैं।

₹35,000 पेंशन कैलकुलेटर: 11-वर्षीय नियम से कितना अंतर आ सकता है?

बीपीएस ने अपने उदाहरण में 35,000 रुपये मासिक मूल पेंशन वाले पेंशनर्स का उपयोग करके संभावित प्रभाव की गणना की है। यदि हर महीने 14,000 रुपये का कम्यूटेशन किया जाता है, तो 11 साल की बहाली अवधि का मतलब 132 महीने (11 वर्ष) की कटौती होगी, जो कुल 18.48 लाख रुपये बनती है। जबकि मौजूदा 15-वर्षीय अवधि के तहत, कटौती 180 महीने तक जारी रहेगी, जिससे कुल राशि 25.20 लाख रुपये हो जाएगी।

₹6.72 लाख पेंशन लाभ कैसे मिलेगा

35,000 रुपये पेंशन वाले उदाहरण में, 11 और 15 वर्षों के बीच का अंतर 48 महीने (4 वर्ष) की अतिरिक्त कटौती का है। 14,000 रुपये प्रति माह के हिसाब से, यह 6.72 लाख रुपये बनता है। इसलिए बीपीएस का दावा है कि बहाली अवधि को घटाकर 11 साल करने से पेंशनर्स को उन चार वर्षों में 15 साल तक कटौती जारी रखने की तुलना में 6.72 लाख रुपये अधिक मिल सकते हैं।

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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