
सैलरी से पेंशन तक...केंद्रीय कर्मचारियों के लिए क्या कुछ बदल गया, समझें
साल 2025 के आखिरी कुछ दिन बचे हैं। इस पूरे साल मे सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए हैं जिसका सीधा असर केंद्रीय कर्मचारियों पर पड़ा है। इसमें सबसे बड़ा फैसला आठवें वेतन आयोग का रहा तो पेंशन से भी जुड़े नियम बदले गए।
8th Pay Commission latest: साल 2025 के आखिरी कुछ दिन बचे हैं। इस पूरे साल मे सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए हैं जिसका सीधा असर केंद्रीय कर्मचारियों पर पड़ा है। इसमें सबसे बड़ा फैसला आठवें वेतन आयोग का रहा तो पेंशन से भी जुड़े नियम बदले गए। आइए जानते हैं कि पूरे साल में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए क्या कुछ बदल गया है।
आठवें वेतन आयोग का गठन
केंद्र सरकार ने इस साल आठवें वेतन आयोग का गठन किया। उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई को आयोग की कमान सौंपी गई है। आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट 18 महीनों में देगा, जबकि समय-समय पर अंतरिम रिपोर्टें भी देता रहेगा। एक जनवरी, 2026 से सिफारिशें प्रभावी होने की संभावना है। इन सिफारिशों से केंद्र सरकार के करीब 50 लाख कर्मचारी और 69 लाख पेंशनभोगी लाभान्वित होंगे। इसके साथ ही इसकी अनुशंसाओं का प्रभाव राज्य सरकारों के कर्मचारियों के वेतन ढांचे पर भी पड़ेगा। मीडिया रिपोर्ट में अनुमान लगाया जा रहा है कि इस वेतन आयोग की सिफारिशें फिटमेंट फॉर्मूले के तहत होंगी। इससे कर्मचारियों की सैलरी दो गुना या उससे अधिक बढ़ सकती हैं। साल 2025 में, सरकार ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए दो DA/DR बढ़ोतरी को मंजूरी दी। पहली छमाही में 2% की बढ़ोतरी हुई तो दूसरी छमाही के लिए 3% का इजाफा हुआ। अब यह भत्ता 58% है। इससे केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में इजाफा हुआ है।
एनपीएस में क्या बदला?
पेंशन कोष नियामक पीएफआरडीए ने सरकारी कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में कई बदलाव किए हैं। अब सरकारी कर्मचारी 85 वर्ष की उम्र तक एनपीएस में बने रह सकते हैं। लेकिन उन्हें सेवानिवृत्ति पर 60 प्रतिशत निकासी की ही अनुमति होगी और शेष 40 प्रतिशत राशि एन्यूटी खरीदने के लिए रखनी होगी। हालांकि, अगर कोई सरकारी कर्मचारी समय से पहले इस्तीफा, हटाए जाने या बर्खास्तगी के कारण एनपीएस से अलग होता है, तो 80 प्रतिशत राशि एन्यूटी खरीदने में लगेगी और शेष को एकमुश्त निकासी के रूप में लिया जा सकेगा।
यूपीएस को लागू किया गया
केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) एक अप्रैल, 2025 को लागू हुआ। यूपीएस का विकल्प चुनने की समयसीमा शुरू में 30 जून 2025 तक उपलब्ध थी। इस समयसीमा को बाद में पहले 30 सितंबर 2025 तक और उसके बाद 30 नवंबर 2025 तक बढ़ाया गया। इस योजना के तहत 25 साल की न्यूनतम योग्यता सेवा के लिए, सेवानिवृत्ति से पहले पिछले 12 महीनों में प्राप्त औसत मूल वेतन की 50 प्रतिशत की दर से सुनिश्चित भुगतान देय होगा।
केंद्रीय कर्मचारियों के लिए स्विच की सुविधा
सरकार ने यूपीएस चुनने वाले केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को कुछ शर्तों के अधीन, अपनी सेवा के दौरान कभी भी एनपीएस में लौटने के लिए एक बार की वन-वे स्विच सुविधा दी है। एक बार की ‘वन-वे स्विच’ सुविधा की अनुमति नौकरी से मुअत्तल किये जाने, बर्खास्तगी या दंड के रूप में अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामले में या उन मामलों में नहीं दी जाएगी, जहां अनुशासनात्मक कार्यवाही चल रही है या विचाराधीन है।
दो नए निवेश विकल्प
सरकार ने एनपीएस और यूपीएस के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए दो नए निवेश विकल्पों- 'लाइफ साइकल' और 'बैलेंस्ड लाइफ साइकल' को मंजूरी दी है। एनपीएस और यूपीएस के तहत, केंद्र सरकार के कर्मचारी अब कई निवेश विकल्पों में से चुन सकते हैं। एक डिफॉल्ट विकल्प है जो समय-समय पर पेंशन कोष नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा परिभाषित निवेश का 'डिफॉल्ट पैटर्न' है। दूसरा विकल्प स्कीम-जी है जिसमें कम जोखिम, निश्चित रिटर्न के लिए 100 प्रतिशत निवेश सरकारी प्रतिभूतियों में होगा।
लाइफ साइकल (एलसी-25) विकल्प के तहत अधिकतम इक्विटी आवंटन 25 प्रतिशत है, जो 35 वर्ष की आयु से 55 वर्ष की आयु तक धीरे-धीरे कम होता जाता है, जबकि एलसी-50 विकल्प में अधिकतम इक्विटी आवंटन सेवानिवृत्ति कोष के 50 प्रतिशत तक सीमित है। बैलैंड लाइफ साइकल' (बीएलसी) विकल्प एलसी50 का ही एक संशोधित संस्करण है, जिसमें इक्विटी आवंटन 45 वर्ष की आयु से कम होता जाता है ताकि कर्मचारी लंबी अवधि के लिए इक्विटी में निवेश कर सकें। वहीं एलसी75 विकल्प में अधिकतम इक्विटी आवंटन 75 प्रतिशत है, जो 35 वर्ष की आयु से 55 वर्ष की आयु तक धीरे-धीरे कम होता जाता है।





