
69 लाख पेंशनर्स के लिए खबर, 8वें वेतन आयोग में पेंशन पर कर्मचारियों की बढ़ी टेंशन
यूनियनों और संगठनों ने वेतन संशोधन, पेंशन व्यवस्था, NPS/UPS से संबंधित प्रावधान, DA एरियर, दया नियुक्ति और ट्रेड यूनियन अधिकार जैसी कई महत्वपूर्ण बातों पर स्पष्टता की कमी को लेकर आपत्ति जताई है। इसी कारण कर्मचारी और पेंशनभोगी सरकार की मंशा को लेकर असमंजस में हैं।
8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगी हाल ही में जारी किए गए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस (ToR) में दिख रही विसंगतियों को लेकर चिंतित हैं। विभिन्न कर्मचारी यूनियनों ने सरकार को पत्र लिखकर बताया है कि इस बार ToR में कई महत्वपूर्ण बिंदु पिछले वेतन आयोगों की तुलना में या तो गायब हैं या अस्पष्ट रखे गए हैं। इन यूनियनों और संगठनों ने वेतन संशोधन, पेंशन व्यवस्था, NPS/UPS से संबंधित प्रावधान, DA एरियर, दया नियुक्ति और ट्रेड यूनियन अधिकार जैसी कई महत्वपूर्ण बातों पर स्पष्टता की कमी को लेकर आपत्ति जताई है। इसी कारण कर्मचारी और पेंशनभोगी सरकार की मंशा को लेकर असमंजस में हैं।
1 दिसंबर से शुरू हो रहा शीतकालीन सत्र
अब जब संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू होने वाला है, कर्मचारियों और पेंशनरों की उम्मीदें इस सत्र से जुड़ी चर्चाओं पर टिकी हैं। लोकसभा और राज्यसभा में कई सांसद इन मुद्दों पर सरकार से सवाल पूछने वाले हैं, जिससे स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है। अगले हफ्ते वित्त मंत्रालय इन प्रमुख मुद्दों पर आधिकारिक तौर पर जवाब देगा। राज्यसभा की वेबसाइट पर दर्ज प्रश्नों में सांसद जावेद अली खान और रामजी लाल सुमन ने सरकार से पूछा है कि क्या 8वें वेतन आयोग के ToR से पेंशन संशोधन को हटा दिया गया है? इस सवाल के बाद ToR पर गंभीर बहस छिड़ गई है। पहले के सभी वेतन आयोगों में पेंशन संशोधन का स्पष्ट उल्लेख होता था, लेकिन इस बार 8वें CPC के ToR में यह हिस्सा नजर नहीं आ रहा है। इस अस्पष्टता ने पेंशनभोगियों में आशंका पैदा कर दी है कि कहीं इस बार पेंशन संशोधन को आयोग के कार्यक्षेत्र से बाहर तो नहीं कर दिया गया है।
राज्यसभा में उठे सवाल में सरकार से सीधे पूछा गया है कि क्या पेंशन संशोधन “प्रस्तावित नहीं” है और अगर ऐसा है तो इस ऐतिहासिक बदलाव की वजह क्या है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह बदलाव लाखों पेंशनभोगियों के लिए चिंता का विषय है। सांसदों ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है—DA और DR को बेसिक पे में मर्ज करने का। महंगाई भत्ता (DA) 50% से ऊपर जा चुका है और महंगाई भी ऊँचे स्तर पर बनी हुई है, ऐसे में कर्मचारी संगठनों का मानना है कि DA-DR मर्जर तत्काल राहत ला सकता है। वित्त मंत्रालय 2 दिसंबर को जो जवाब देगा, उससे यह स्पष्ट होगा कि क्या सरकार DA-DR मर्जर को तुरंत लागू करने पर विचार कर रही है या इसे 2027 में आने वाली 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट तक टाल दिया जाएगा।
69 लाख पेंशनभोगी पेंशन संशोधन पर निर्भर
लगभग 69 लाख पेंशनभोगी पेंशन संशोधन पर निर्भर हैं, जिससे उनकी आय वर्तमान कर्मचारियों के अनुरूप बनी रहती है। अगर सरकार 8वें वेतन आयोग के दायरे से पेंशन संशोधन हटाती है, तो इससे पेंशन संरचना में व्यापक बदलाव आ सकता है और पुराने-नए पेंशनरों के बीच आय का अंतर और बढ़ सकता है। यूनियनों का कहना है कि ToR में “unfunded cost of non-contributory pension schemes” जैसी भाषा यह संकेत देती है कि सरकार सामाजिक सुरक्षा के बजाय वित्तीय बोझ को प्राथमिकता दे रही है। इससे पेंशनभोगियों में असंतोष और आशंका बढ़ गई है। कर्मचारी संगठन और महासंघ 2 दिसंबर को आने वाले सरकारी जवाब पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं। यदि जवाब कर्मचारियों की चिंताओं का समाधान नहीं करता, तो वे अपने आंदोलन को तेज करने की तैयारी कर रहे हैं। कई यूनियनें पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि आवश्यक हुआ तो देशव्यापी प्रदर्शन किए जाएंगे। फिलहाल सभी कर्मचारी और पेंशनभोगी दो प्रमुख मुद्दों पर सरकार के रुख का इंतजार कर रहे हैं। क्या 8वें वेतन आयोग के तहत पेंशन संशोधन किया जाएगा और क्या महंगाई भत्ते को बेसिक पे में जल्द मर्ज किया जाएगा। इन दोनों सवालों का जवाब करोड़ों परिवारों के भविष्य को सीधे प्रभावित करेगा।





