पुरानी पेंशन पर सरकार ने दिया बड़ा अपडेट, सरकारी कर्मचारियों को जानना बेहद जरूरी

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुख्य बातें

  • केंद्र सरकार ने संसद में साफ कर दिया है कि फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन (Old Pension Scheme) को फिर से लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है
  • हालांकि, कई कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग के सामने OPS बहाल करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अपने पुराने रुख को बरकरार रखा है
old pension scheme
केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन को फिर से लागू करने का सरकार का कोई प्रस्ताव नहीं।

अगर आप केंद्रीय सरकारी कर्मचारी हैं और 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से पुरानी पेंशन (Old Pension Scheme) की वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं, तो आपके लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने संसद में साफ कर दिया है कि फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों के लिए OPS (Old Pension Scheme) को दोबारा लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है, यानी अभी के लिए NPS (National Pension System) और UPS (Unified Pension Scheme) ही लागू रहेंगे। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

23 जुलाई 2026 को राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (Department of Expenditure) की ओर से सरकार ने कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाल करने पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है। यह जवाब सरकार के पहले के रुख के अनुरूप ही है और इससे साफ संकेत मिलता है कि निकट भविष्य में OPS की वापसी की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही।

हालांकि, कई कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने पुरानी पेंशन (Old Pension Scheme) को दोबारा लागू करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि NPS में मिलने वाली पेंशन शेयर बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करती है, जिससे रिटायरमेंट के बाद निश्चित आय की गारंटी नहीं रहती। वहीं, पुरानी पेंशन (Old Pension Scheme) में कर्मचारियों को अंतिम वेतन के आधार पर तय पेंशन मिलती थी, जिससे भविष्य अधिक सुरक्षित माना जाता था।

OPS की मांग करने वाले संगठनों में NC-JCM (National Council of Joint Consultative Machinery), FNPO (Federation of National Postal Organisations), AIDEF (All India Defence Employees Federation), AINPSEF (All India NPS Employees Federation) और IRTSA (Indian Railways Technical Supervisors Association) शामिल हैं। इन संगठनों ने अपने ज्ञापन में कहा है कि खासकर 1 जनवरी 2004 के बाद नौकरी में आए कर्मचारियों को NPS के कारण रिटायरमेंट के समय कम लाभ मिलने की आशंका है।

NC-JCM ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा कि NPS पूरी तरह बाजार आधारित व्यवस्था है, इसलिए इसमें पेंशन की कोई निश्चित गारंटी नहीं होती। संगठन का कहना है कि 1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती कर्मचारियों को पुरानी पेंशन (Old Pension Scheme) से बाहर रखना भेदभावपूर्ण है और इससे उनकी सामाजिक सुरक्षा प्रभावित होती है।

कर्मचारी संगठनों ने UPS (Unified Pension Scheme) पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि 26 लाख से अधिक पात्र कर्मचारियों में से केवल करीब 1.22 लाख कर्मचारियों ने ही UPS को चुना है। इसे आधार बनाकर संगठनों का कहना है कि कर्मचारी अभी भी पुरानी पेंशन (Old Pension Scheme) को ज्यादा सुरक्षित और बेहतर विकल्प मानते हैं।

बता दें कि केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2004 से नियुक्त अधिकांश केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (National Pension System) लागू किया था। बाद में कई राज्यों ने भी इसे अपनाया, हालांकि कुछ राज्यों ने बाद में अपने कर्मचारियों के लिए फिर से पुरानी पेंशन (Old Pension Scheme) लागू कर दी।

फिलहाल, सरकार का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। संसद में दिए गए ताजा बयान के मुताबिक केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन (Old Pension Scheme) को वापस लाने की कोई योजना नहीं है। ऐसे में अभी NPS और UPS ही लागू रहेंगे। हालांकि, कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग के माध्यम से अपनी मांग लगातार उठा रहे हैं, इसलिए आने वाले समय में आयोग की सिफारिशों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।

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