8th Pay Commission: पे कमीशन कब करेगा फिटमेंट फैक्टर और सैलरी रिवीजन का ऐलान?
मुख्य बातें
- 8th Pay Commission Latest Updates: 8वें वित्त आयोग की इस समय देश भर में बैठकें चल रही हैं
- केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाह इस समय इन मीटिंग्स पर है

8th Pay Commission Latest Updates: 8वें पे कमीशन को लेकर अब प्रक्रिया काफी तेज हो गई है। वित्त आयोग देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठकें कर रहा है। कर्मचारी संगठनों से लगातार राय मांगी जा रही है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाह वित्त आयोग की बैठकों और इससे जुड़ी जानकारी पर बनी हुई है।
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की फिटमेंट फैक्टर पर सबसे अधिक निगाह है। 6वें और 7वें वित्त आयोग के दौरान फिटमेंट फैक्टर ही केंद्र में रहा था। इसी से सैलरी संशोधन, डीए अन्य सभी कैलकुलेट किया जाएगा। बता दें, 28 फरवरी 2014 को 7वें वित्त आयोग का गठन किया गया था। लेकिन इसके लागू होने में 21 महीने का समय लगा था। 19 नवंबर 2015 को 7वें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट जमा की थी।
8वें वित्त आयोग की बात करें तो इसका गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग के पास रिपोर्ट जमा करने के लिए 18 महीने का समय है। रिपोर्ट्स के अनुसार पे कमीशन 25 जुलाई 2027 तक सभी पक्षों से बातचीत के आधार पर तय रिपोर्ट को जमा कर सकता है। जिसपर अंतिम फैसला सरकार की तरफ से लिया जाएगा।
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर? (What is Fitment Factor)
एक तरह से फॉर्मूला होता है जिसके कैलकुलेशन के आधार पर कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी का पता चलता है। इसी फॉर्मूला के जरिए पुराने बेसिक पे की जगह नया रिवाइज बेसिक सैलरी तय किया जाता है।
कैसे प्रयोग होता है फॉर्मूला?
मौजूदा बेसिक पे x फिटमेंट फैक्टर = नया बेसिक पे
सातवें बेसिक पे के वक्त पर फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। जिसके बाद मिनिमम बेसिक सैलरी केंद्रीय कर्मचारियों की 7000 रुपये से बढ़कर 18000 रुपये के स्तर पर पहुचं गया। बता दें, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी में हर 10 साल में एक बार इजाफा होता है।
इस बार कितना फिटमेंट फैक्टर रह सकता है?
अभी तक 8वें पे कमीशन के लिए कोई आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर का ऐलान नहीं किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार 2.28 से 3.83 फिटमेंट फैक्टर इस बार तय किया जा सकता है।
पहले के समय में फिटमेंट फैक्टर नहीं हुआ करता था। जिसकी वजह से पे कमीशन की तरफ से सैलरी रिवीजन के लिए अलग-अलग फैक्टर्स को आधार बनाया जाता था। जिसके बाद कोई फैसला होता था। हालांकि, तब भी मूल में कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और भत्ता ही होते थे। जिसे मार्केट के अनुसार बढ़ाया जाता था। बता दें, 8वें पे कमीशन के फैसलों का असर 1.1 केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को होगा।


