8वें वेतन आयोग में जिस फिटमेंट फैक्टर की चर्चा तेज, उसके लागू होते ही ₹69,000 पहुंचेगी कर्मचारियों की सैलरी; समझिए गणित
मुख्य बातें
- 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स में उत्साह बढ़ता जा रहा है
- कर्मचारी संगठन फिटमेंट फैक्टर 3.8 से 3.833 तक करने की मांग कर रहे हैं, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर लगभग ₹68,000 से ₹69,000 तक पहुंच सकती है
- हालांकि, सरकार ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है

8th Pay Commission latest updates: देश के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर इस समय 8वें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं। सबसे ज्यादा चर्चा जिसकी हो रही है, वह फिटमेंट फैक्टर है। यही वह फार्मूला होता है, जिसके जरिए पुराने बेसिक वेतन को नए वेतन में बदला जाता है। अगर 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर बढ़ता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी सीधे ₹68,000 से ₹69,000 तक पहुंच सकती है। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन लगातार ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं। आइए जरा विस्तार से इसको समझते हैं।
भारत में अब तक 7 वेतन आयोग लागू हो चुके हैं। पहला वेतन आयोग साल 1946 में बना था और उसके बाद लगभग हर 10 साल में नया वेतन आयोग गठित किया गया। 8वां वेतन आयोग 3 नवंबर 2025 को गठित किया गया, लेकिन अभी इसकी अंतिम सिफारिशें आना बाकी हैं। इसमें सैलरी, पेंशन और भत्तों से जुड़े बड़े फैसले लिए जाएंगे।
फिटमेंट फैक्टर का मतलब बेहद आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसा गुणांक (Multiplier) है, जिससे आपकी पुरानी बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था। इसी वजह से 6वें वेतन आयोग की ₹7,000 बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग ₹18,000 हो गई थी। इसकी गणना (7000×2.57=17990) इस तरह हुई थी। इसके बाद इसे राउंड ऑफ करके ₹18,000 तय किया गया।
| वेतन आयोग | गठन वर्ष | लागू वर्ष | अध्यक्ष | संशोधन के बाद न्यूनतम बेसिक वेतन |
|---|---|---|---|---|
| पहला वेतन आयोग | 1946 | 1947 | श्रीनिवास वरदाचारियर | ₹55 |
| दूसरा वेतन आयोग | 1957 | 1959 | जगन्नाथ दास | ₹80 |
| तीसरा वेतन आयोग | 1970 | 1973 | रघुबीर दयाल | ₹185 |
| चौथा वेतन आयोग | 1983 | 1986 | पी. एन. सिंघल | ₹750 |
| पांचवां वेतन आयोग | 1994 | 1996-97 | एस. रत्नावेल पांडियन | ₹2,550 |
| छठा वेतन आयोग | 2006 | 2008 (1 जनवरी 2006 से प्रभावी) | बी. एन. श्रीकृष्ण | ₹7,000 |
| सातवां वेतन आयोग | 2014 | 2016 (1 जनवरी 2016 से प्रभावी) | ए. के. माथुर | ₹18,000 |
| आठवां वेतन आयोग | 2025 | 20 मई 2026 तक लागू नहीं | जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई | अभी तय नहीं |
अब 8वें वेतन आयोग में कई कर्मचारी यूनियन फिटमेंट फैक्टर 3.8 से 3.833 तक करने की मांग कर रही हैं। अगर सरकार इन मांगों को मान लेती है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है। अगर फिटमेंट फैक्टर 3.8 लागू होता है, तो गणना 18000×3.8=68400 के हिसाब से होगी, यानी न्यूनतम बेसिक वेतन करीब ₹68,400 तक पहुंच सकता है। वहीं, अगर 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो इसकी कैलकुलेशन 18000×3.833=68994 के हिसाब से होगी। इस स्थिति में बेसिक वेतन लगभग ₹69,000 तक पहुंच सकता है।
| यूनियन / प्रस्ताव | प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर | गणना | अनुमानित संशोधित न्यूनतम बेसिक वेतन |
|---|---|---|---|
| वर्तमान 7वां वेतन आयोग (संदर्भ) | 2.57 | 7,000 × 2.57 = 17,990 | ₹18,000 |
| महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन | 3.8 | 18,000 × 3.8 = 68,400 | ~ ₹68,500 या ₹69,000 |
| NCJCM | 3.833 | 18,000 × 3.833 = 68,994 | ~ ₹69,000 |
| AIDEF | 3.833 | 18,000 × 3.833 = 68,994 | ~ ₹69,000 |
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक सरकार या 8वें वेतन आयोग ने कोई अंतिम फिटमेंट फैक्टर तय नहीं किया है। फिलहाल, ये केवल कर्मचारी संगठनों की मांगें हैं। अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई, बढ़ती जीवन लागत और कर्मचारियों की जरूरतों को देखते हुए इस बार वेतन में बड़ा इजाफा हो सकता है। 8वें वेतन आयोग का असर सिर्फ कर्मचारियों पर ही नहीं बल्कि करीब 1.1 करोड़ पेंशनर्स और उनके परिवारों पर भी पड़ेगा। यही कारण है कि पूरे देश में इस आयोग को लेकर उत्सुकता और चर्चा तेजी से बढ़ रही है।
अगर फिटमेंट फैक्टर 3.8 या उससे ज्यादा तय होता है, तो आने वाले सालों में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी संरचना पूरी तरह बदल सकती है। इससे न केवल कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, बल्कि बाजार में खर्च और मांग भी बढ़ सकती है, जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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