8वें वेतन आयोग में जिस फिटमेंट फैक्टर की चर्चा तेज, उसके लागू होते ही ₹69,000 पहुंचेगी कर्मचारियों की सैलरी; समझिए गणित

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुख्य बातें

  • 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स में उत्साह बढ़ता जा रहा है
  • कर्मचारी संगठन फिटमेंट फैक्टर 3.8 से 3.833 तक करने की मांग कर रहे हैं, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर लगभग ₹68,000 से ₹69,000 तक पहुंच सकती है
  • हालांकि, सरकार ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है
8वें वेतन आयोग में जिस फिटमेंट फैक्टर की चर्चा तेज, उसके लागू होते ही ₹69,000 पहुंचेगी कर्मचारियों की सैलरी; समझिए गणित

8th Pay Commission latest updates: देश के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर इस समय 8वें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं। सबसे ज्यादा चर्चा जिसकी हो रही है, वह फिटमेंट फैक्टर है। यही वह फार्मूला होता है, जिसके जरिए पुराने बेसिक वेतन को नए वेतन में बदला जाता है। अगर 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर बढ़ता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी सीधे ₹68,000 से ₹69,000 तक पहुंच सकती है। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन लगातार ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं। आइए जरा विस्तार से इसको समझते हैं।

भारत में अब तक 7 वेतन आयोग लागू हो चुके हैं। पहला वेतन आयोग साल 1946 में बना था और उसके बाद लगभग हर 10 साल में नया वेतन आयोग गठित किया गया। 8वां वेतन आयोग 3 नवंबर 2025 को गठित किया गया, लेकिन अभी इसकी अंतिम सिफारिशें आना बाकी हैं। इसमें सैलरी, पेंशन और भत्तों से जुड़े बड़े फैसले लिए जाएंगे।

फिटमेंट फैक्टर का मतलब बेहद आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसा गुणांक (Multiplier) है, जिससे आपकी पुरानी बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था। इसी वजह से 6वें वेतन आयोग की ₹7,000 बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग ₹18,000 हो गई थी। इसकी गणना (7000×2.57=17990) इस तरह हुई थी। इसके बाद इसे राउंड ऑफ करके ₹18,000 तय किया गया।

वेतन आयोगगठन वर्षलागू वर्षअध्यक्षसंशोधन के बाद न्यूनतम बेसिक वेतन
पहला वेतन आयोग19461947श्रीनिवास वरदाचारियर₹55
दूसरा वेतन आयोग19571959जगन्नाथ दास₹80
तीसरा वेतन आयोग19701973रघुबीर दयाल₹185
चौथा वेतन आयोग19831986पी. एन. सिंघल₹750
पांचवां वेतन आयोग19941996-97एस. रत्नावेल पांडियन₹2,550
छठा वेतन आयोग20062008 (1 जनवरी 2006 से प्रभावी)बी. एन. श्रीकृष्ण₹7,000
सातवां वेतन आयोग20142016 (1 जनवरी 2016 से प्रभावी)ए. के. माथुर₹18,000
आठवां वेतन आयोग202520 मई 2026 तक लागू नहींजस्टिस रंजना प्रकाश देसाईअभी तय नहीं

अब 8वें वेतन आयोग में कई कर्मचारी यूनियन फिटमेंट फैक्टर 3.8 से 3.833 तक करने की मांग कर रही हैं। अगर सरकार इन मांगों को मान लेती है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है। अगर फिटमेंट फैक्टर 3.8 लागू होता है, तो गणना 18000×3.8=68400 के हिसाब से होगी, यानी न्यूनतम बेसिक वेतन करीब ₹68,400 तक पहुंच सकता है। वहीं, अगर 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो इसकी कैलकुलेशन 18000×3.833=68994 के हिसाब से होगी। इस स्थिति में बेसिक वेतन लगभग ₹69,000 तक पहुंच सकता है।

यूनियन / प्रस्तावप्रस्तावित फिटमेंट फैक्टरगणनाअनुमानित संशोधित न्यूनतम बेसिक वेतन
वर्तमान 7वां वेतन आयोग (संदर्भ)2.577,000 × 2.57 = 17,990₹18,000
महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन3.818,000 × 3.8 = 68,400~ ₹68,500 या ₹69,000
NCJCM3.83318,000 × 3.833 = 68,994~ ₹69,000
AIDEF3.83318,000 × 3.833 = 68,994~ ₹69,000

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक सरकार या 8वें वेतन आयोग ने कोई अंतिम फिटमेंट फैक्टर तय नहीं किया है। फिलहाल, ये केवल कर्मचारी संगठनों की मांगें हैं। अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई, बढ़ती जीवन लागत और कर्मचारियों की जरूरतों को देखते हुए इस बार वेतन में बड़ा इजाफा हो सकता है। 8वें वेतन आयोग का असर सिर्फ कर्मचारियों पर ही नहीं बल्कि करीब 1.1 करोड़ पेंशनर्स और उनके परिवारों पर भी पड़ेगा। यही कारण है कि पूरे देश में इस आयोग को लेकर उत्सुकता और चर्चा तेजी से बढ़ रही है।

अगर फिटमेंट फैक्टर 3.8 या उससे ज्यादा तय होता है, तो आने वाले सालों में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी संरचना पूरी तरह बदल सकती है। इससे न केवल कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, बल्कि बाजार में खर्च और मांग भी बढ़ सकती है, जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।

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