63000 रुपये पहुंचेगी न्यूनतम सैलरी, अगर लगा यह फॉर्मूला, कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुख्य बातें

  • 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और सबसे ज्यादा ध्यान फिटमेंट फैक्टर पर है
  • कर्मचारी संगठन 3 से 4 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं
  • अगर 3.5 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर करीब ₹63,000 हो सकती है
63000 रुपये पहुंचेगी न्यूनतम सैलरी, अगर लगा यह फॉर्मूला, कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले

8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है। सबसे ज्यादा चर्चा जिस मुद्दे पर हो रही है, वह फिटमेंट फैक्टर है। यही वह महत्वपूर्ण संख्या होती है, जिसके आधार पर कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी को नए वेतनमान में बदला जाता है। इस बार कुछ कर्मचारी संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3.5 से लेकर 4.0 तक रखने की मांग की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार वास्तव में 3.5 का फिटमेंट फैक्टर लागू कर सकती है और अगर ऐसा होता है, तो इसका कर्मचारियों और सरकारी खजाने पर क्या असर पड़ेगा?

फिलहाल, 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जिसके आधार पर न्यूनतम बेसिक वेतन 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हुआ था। अगर 8वें वेतन आयोग में 3.5 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो मौजूदा 18,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी सीधे बढ़कर 63,000 रुपये तक पहुंच सकती है, यानी कर्मचारियों के वेतन में करीब 250 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन इस मांग को जोर-शोर से उठा रहे हैं।

हालांकि, मामला सिर्फ वेतन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। सरकार को इसके वित्तीय प्रभावों का भी आकलन करना होगा। वर्तमान में करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और लगभग 69 लाख पेंशनभोगी 8वें वेतन आयोग के दायरे में आते हैं। अगर 3.5 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो सरकार पर वेतन और पेंशन का अतिरिक्त बोझ लाखों करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। एक्सपर्ट का मानना है कि यह फैसला देश के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को भी प्रभावित कर सकता है, क्योंकि सरकार पहले से ही ब्याज भुगतान और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर भारी खर्च कर रही है।

एक्सपर्ट का कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए 2.86 का फिटमेंट फैक्टर ज्यादा व्यावहारिक माना जा रहा है। इसके बावजूद कर्मचारी यूनियन 3 से 4 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रही हैं। उनका तर्क है कि पिछले कुछ सालों में महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास की लागत में भारी वृद्धि हुई है। ऐसे में कर्मचारियों की क्रय शक्ति को बनाए रखने के लिए बड़ा वेतन संशोधन जरूरी है।

यूनियन/ऑर्गनाइजेशनफिटमेंट फैक्टर डिमांडप्रोपोज्ड मिनिमम बेसिक पे( ₹18,000 बेस)
BPMS4.0₹72,000
NCJCM Staff Side3.833~ ₹69,000
AIDEF3.833~ ₹69,000
महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन3.8~ ₹68,400–69,000
FNPO3.0–3.25₹54,000–58,500
AITUCमिनिमम 3.0₹54,000

अगर सरकार 3.5 का फिटमेंट फैक्टर लागू करती है, तो इसका सकारात्मक असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। कर्मचारियों की जेब में ज्यादा पैसा आने से उपभोग बढ़ेगा। इसका फायदा FMCG, ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, बैंकिंग, पर्यटन और रिटेल जैसे सेक्टरों को मिल सकता है। बाजार में मांग बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

दूसरी ओर सरकार को राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की चुनौती का भी सामना करना पड़ेगा। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ते सरकारी खर्च के बीच इतना बड़ा वेतन संशोधन आसान नहीं होगा। इसलिए, अंतिम फैसला कर्मचारी हितों और सरकारी वित्तीय क्षमता के बीच संतुलन बनाकर ही लिया जाएगा।

फिलहाल, 8वें वेतन आयोग के लिए सुझाव और मांगें जमा करने की प्रक्रिया जारी है। आने वाले महीनों में आयोग विभिन्न कर्मचारी संगठनों, पेंशनभोगी संघों और विशेषज्ञों की राय लेने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगा। ऐसे में 3.5 फिटमेंट फैक्टर की मांग भले ही कर्मचारियों के लिए आकर्षक हो, लेकिन इसका भविष्य पूरी तरह सरकार की आर्थिक स्थिति और आयोग की अंतिम सिफारिशों पर निर्भर करेगा।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।

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